Dua E Qunoot In Hindi | दुआ-ए-क़ुनूत हिंदी, अरबी और तर्जुमे के साथ

By Rokaiya

dua e qunoot in hindi

Quick Summary

Dua Name

Dua E Qunoot

Arabic Text

اَللَّهُمَّ إِنَّا نَسْتَعِينُكَ وَنَسْتَغْفِرُكَ وَنُؤْمِنُ بِكَ وَنَتَوَكَّلُ عَلَيْكَ وَنُثْنِي عَلَيْكَ الْخَيْرَ وَنَشْكُرُكَ وَلَا نَكْفُرُكَ وَنَخْلَعُ وَنَتْرُكُ مَنْ يَفْجُرُكَ اَللَّهُمَّ إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَلَكَ نُصَلِّي وَنَسْجُدُ وَإِلَيْكَ نَسْعَى وَنَحْفِدُ وَنَرْجُو رَحْمَتَكَ وَنَخْشَى عَذَابَكَ إِنَّ عَذَابَكَ بِالْكُفَّارِ مُلْحِقٌ

Hindi Transliteration

अल्लाहुम्मा इन्ना नस्तईनुका व नस्तग़-फिरुका व नुओमिनु बिका व नतवक्कलु अलैका व नुस्नी अलैकल खैर, व नश्कुरुका वला नकफुरुका व नख्लऊ व नतरुकु मय यफ्जुरुक। अल्लाहुम्मा इय्याका नअबुदु व लका नुसल्ली व नस्जुद, व इलैका नसआ व नहफिदु, व नरजू रहम-तका व नख्शा अज़ाबक, इन्ना अज़ाबक बिल कुफ्फारि मुल्हिक।

English Transliteration

Allahumma inna nastainuka w nastagh-firuka w nuominu bika w natawakkalu alaika w nusni alaikal khair, w nashkuruka wala nakafuruka w nakhlau w nataruku may yafjuruk. allahumma iyyaka nabudu w laka nusalli w nasjud, w ilaika nasaa w nahafidu, w naraju raham-taka w nakhsha azabak, inna azabak bil kuffari mulhik.

Source

मुसन्नफ इब्न अबी शैबा

क्या आप वित्र की नमाज़ के लिए दुआ-ए-क़ुनूत (Dua-e-Qunoot) ढूंढ रहे हैं? अक्सर लोग इसे याद करने या पढ़ने के सही तरीक़े को लेकर परेशान हो जाते हैं। यहाँ हमने अरबी, हिंदी तलफ़्फ़ुज़ (Pronunciation), रोमन इंग्लिश और तर्जुमे के साथ पूरी दुआ को आसान हिस्सों में तक़्सीम किया (बांटा) है, ताकि आप इसे आसानी से ज़हन-नशीन (याद) कर सकें।


वित्र नमाज़ में दुआ-ए-क़ुनूत पढ़ने का सही वक़्त (Time to Read)

ईशा की नमाज़ के बाद “वित्र की नमाज़” अदा करना हर मुसलमान के लिए निहायत ज़रूरी है। इंडिया में ज़्यादातर लोग हनफ़ी तरीक़े से नमाज़ अदा करते हैं, और इसमें दुआ-ए-क़ुनूत पढ़ने का सही वक़्त वित्र की तीसरी रकात में होता है।

इसका तरीक़ा बहुत आसान है:

  1. जब आप तीसरी रकात के लिए खड़े हों, तो पहले ‘सूरह फ़ातिहा’ और कोई ‘दूसरी सूरह’ (जैसे सूरह इख़लास) की तिलावत करें।
  2. इसके बाद, रुकू में जाने से पहले रुक जाएं।
  3. अब “अल्लाहु अकबर” कहते हुए अपने हाथ कानों तक उठाएं और फिर वापस नाफ़ (Navel) के नीचे बांध लें। [यहाँ हनफ़ी तरीक़े से नमाज़ में तकबीर के लिए हाथ उठाने की इमेज लगाएं]
  4. हाथ बांधने के बाद ही दुआ-ए-क़ुनूत पढ़ी जाती है। इसे मुकम्मल करने के बाद “अल्लाहु अकबर” कहकर रुकू में जाएं।

दुआ-ए-क़ुनूत की अहमियत और फ़ज़ीलत

“क़ुनूत” का मत्लब होता है अल्लाह ताला के सामने पूरी आज़िज़ी (Humility) से खड़े रहना और उसकी फ़रमाबरदारी करना। यह सिर्फ़ चन्द अल्फ़ाज़ नहीं हैं, बल्कि यह अल्लाह से एक ‘अहद’ (वादा) है।

इसमें बंदा इक़रार करता है कि “या अल्लाह! हम सिर्फ़ तेरी ही इबादत करते हैं, तुझसे ही मग़फ़िरत (माफ़ी) मांगते हैं।” इसलिए इसे सिर्फ़ ज़बान से नहीं, बल्कि मुकम्मल तवज्जो और यक़ीन के साथ पढ़ना चाहिए।


Dua-e-Qunoot in Arabic, Hindi & Roman English

याद करने में आसानी के लिए हमने इस दुआ को चार हिस्सों में बाँट दिया है:

हिस्सा 1 (Part 1)

Arabic:

اَللَّهُمَّ إِنَّا نَسْتَعِينُكَ وَنَسْتَغْفِرُكَ وَنُؤْمِنُ بِكَ وَنَتَوَكَّلُ عَلَيْكَ وَنُثْنِي عَلَيْكَ الْخَيْرَ

Hindi:

अल्लाहुम्मा इन्ना नस्तईनुका व नस्तग़-फिरुका व नुओमिनु बिका व नतवक्कलु अलैका व नुस्नी अलैकल खैर,

Roman:

Allahumma inna nasta-eenuka wa nastaghfiruka wa nu’minu bika wa natawakkalu ‘alayka wa nuthni ‘alaykal khair,

तर्जुमा / मत्लब:

ऐ अल्लाह! हम तुझसे मदद चाहते हैं और तुझसे मग़फ़िरत (माफ़ी) माँगते हैं, तुझ पर ईमान लाते हैं और तुझ पर तवक्कुल (भरोसा) करते हैं। हम तेरी बेहतरीन सना (तारीफ़) करते हैं…

हिस्सा 2 (Part 2)

Arabic:

وَنَشْكُرُكَ وَلَا نَكْفُرُكَ وَنَخْلَعُ وَنَتْرُكُ مَنْ يَفْجُرُكَ

Hindi:

व नश्कुरुका वला नकफुरुका व नख्लऊ व नतरुकु मय यफ्जुरुक।

Roman:

wa nashkuruka wala nakfuruka wa nakhla-u wa natruku man yafjuruk.

तर्जुमा / मत्लब:

…और तेरा शुक्र अदा करते हैं, तेरी नाशुक्री (कुफ़्र) नहीं करते। और जो तेरी नाफ़रमानी करे, हम उससे ताल्लुक़ तोड़ते हैं और उसे छोड़ते हैं।

हिस्सा 3 (Part 3)

Arabic:

اَللَّهُمَّ إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَلَكَ نُصَلِّي وَنَسْجُدُ وَإِلَيْكَ نَسْعَى وَنَحْفِدُ

Hindi:

अल्लाहुम्मा इय्याका नअबुदु व लका नुसल्ली व नस्जुद, व इलैका नसआ व नहफिदु,

Roman:

Allahumma iyyaka na’budu wa laka nusalli wa nasjudu, wa ilayka nas’a wa nahfidu,

तर्जुमा / मत्लब:

ऐ अल्लाह! हम तेरी ही इबादत करते हैं, तेरे ही लिए नमाज़ पढ़ते हैं और सजदा करते हैं। हम तेरी ही तरफ़ दौड़ते हैं और ख़िदमत के लिए हाज़िर होते हैं।

हिस्सा 4 (Part 4)

Arabic:

وَنَرْجُو رَحْمَتَكَ وَنَخْشَى عَذَابَكَ إِنَّ عَذَابَكَ بِالْكُفَّارِ مُلْحِقٌ

Hindi:

व नरजू रहम-तका व नख्शा अज़ाबक, इन्ना अज़ाबक बिल कुफ्फारि मुल्हिक।

Roman:

wa narju rahmataka wa nakhsha ‘azabaka, inna ‘azabaka bil-kuffari mulhiq.

तर्जुमा / मत्लब:

हम तेरी रहमत की उम्मीद रखते हैं और तेरे अज़ाब से डरते हैं। बेशक, तेरा अज़ाब काफ़िरों को पहुँचने वाला है।

(नोट: यह दुआ हज़रत उमर फ़ारूक़ (र.अ.) और हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसूद (र.अ.) से रिवायत है और इसका ज़िक्र हदीस की किताब “मुसन्नफ़ इब्न अबी शैबा” में मिलता है।)


वित्र में दुआ-ए-क़ुनूत भूल जाएं तो क्या करें? (Sajdah Sahw)

इंसान होने के नाते भूल-चूक हो ही सकती है। अगर आप तीसरी रकात में दुआ पढ़ना भूल गए और सीधे रुकू में चले गए, तो अब घबराएं नहीं और न ही वापस क़याम (खड़े होने) की तरफ़ लौटें। ऐसा करने से नमाज़ फ़ासिद (ख़राब) हो सकती है। आप अपनी नमाज़ जारी रखें।

ऐसी हालत में नमाज़ के आख़िर में सजदा-ए-सह्व (Sajdah Sahw) करना लाज़िम है। इसका तरीक़ा यह है:

  • तशहहुद (अत्तहियात) पढ़ने के बाद सिर्फ़ दाईं (सीधी) तरफ़ सलाम फेरें।
  • दो सजदे करें।
  • फिर दोबारा तशहहुद, दुरूद शरीफ़ और दुआ पढ़कर नमाज़ मुकम्मल करें।

[यहाँ सजदा-ए-सह्व करने के तरीक़े की इमेज लगाएं]

ग़ौर करें: हनफ़ी फ़िक़्ह में वित्र में यह दुआ पढ़ना ‘वाजिब’ है, इसलिए अगर जान-बूझकर छोड़ दिया तो नमाज़ दोबारा पढ़नी पड़ेगी। भूलने पर सजदा-ए-सह्व काफ़ी है।


दुआ-ए-क़ुनूत से जुड़ी आम ग़लतफ़हमियाँ

  1. सिर्फ़ रमज़ान में पढ़ना: बहुत से लोग यह समझते हैं कि दुआ-ए-क़ुनूत सिर्फ़ रमज़ान की वित्र में पढ़ी जाती है। यह बिल्कुल ग़लत है। वित्र की नमाज़ और यह दुआ पूरी ज़िंदगी हर रोज़ पढ़ना लाज़िम है।
  2. दुआ के लिए हाथ खुला रखना: हनफ़ी तरीक़े में, क़ुनूत के लिए तकबीर कहने के बाद हाथ वापस बांध लिए जाते हैं (जैसे क़याम में बांधते हैं)। हाथ आम दुआ की तरह खुले नहीं रखे जाते।
  3. दुआ याद न होने पर नमाज़ छोड़ देना: जब तक यह मुकम्मल दुआ याद न हो जाए, आप इसकी जगह “रब्बना आतिना फ़िद्दुनिया हसनतंव…” पढ़ सकते हैं या तीन बार “अल्लाहुम्मग़-फ़िरली” (ऐ अल्लाह मेरी मग़फ़िरत फ़रमा) कह लें। लेकिन कोशिश करें कि असल दुआ जल्द से जल्द ज़बानी याद कर लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सवाल 1: क्या औरतें भी यही दुआ-ए-क़ुनूत पढ़ती हैं?
जवाब: जी हाँ, मर्द और औरत दोनों के लिए वित्र की नमाज़ का तरीक़ा और दुआ बिल्कुल एक ही है। ख़्वातीन (Ladies) भी तीसरी रकात में यही दुआ पढ़ेंगी।

सवाल 2: क्या वित्र की नमाज़ दुआ-ए-क़ुनूत के बिना हो सकती है?
जवाब: हनफ़ी तरीक़े में दुआ-ए-क़ुनूत पढ़ना ‘वाजिब’ है। अगर आपको दुआ याद है और आपने जान-बूझकर नहीं पढ़ी, तो नमाज़ ना-मुकम्मल होगी और आपको दोहरानी पड़ेगी। अगर भूल गए, तो सजदा-ए-सह्व करने से नमाज़ हो जाएगी।


समझ कर दुआ पढ़ने की अहमियत

बिना समझे सिर्फ़ रट्टा लगाने से बेहतर है कि हम इसके तर्जुमे और मत्लब पर भी ग़ौर करें। इससे नमाज़ में ख़ुशू-ओ-ख़ुज़ू (तवज्जो) पैदा होता है और क़ल्बी सुकून मिलता है। अल्लाह ताला हम सबकी इबादत क़बूल फ़रमाए। आमीन।