नज़र का ख़ौफ़ और हक़ीक़त
अक्सर वालिदैन अपने बच्चों की सेहत या अचानक आने वाली तब्दीली को लेकर फिक्रमंद रहते हैं। कभी कारोबार में अचानक नुकसान या घर के सुकून में कमी आने पर लोग सबसे पहले ‘नज़र-ए-बद’ का सोंचते हैं। यह फ़िक्र जायज़ है, लेकिन अक्सर इसी डर की वजह से लोग ग़ैर-इस्लामी और वहम वाली चीज़ों की तरफ निकल जाते हैं।
इस्लाम हमें डरना नहीं, बल्कि अल्लाह की पनाह में आना सिखाता है। घबराहट के बजाय सुन्नत के मुताबिक़ अमल करना ही असली सुकून का रास्ता है। नज़र का ज़िक्र कुरआन और हदीस में मौजूद है, लेकिन इसका हल भी अल्लाह ने हमें दुआओं की शक्ल में अता फ़रमाया है।
इस्लाम में नज़र-ए-बद का तसव्वुर
नज़र-ए-बद का लगना एक हक़ीक़त है, जिसे अल्लाह के रसूल ﷺ ने भी तस्दीक़ फ़रमाया है। लेकिन इसका मतलब यह हरगिज़ नहीं कि हम काली डोरियों, मिर्चियों या नींबू पर भरोसा करने लगें। नज़र अल्लाह के हुक्म के बिना असर नहीं कर सकती, और उसकी हिफ़ाज़त के सामने कोई भी बुराई टिक नहीं सकती। हमारा अक़ीदा यह होना चाहिए कि शिफ़ा और हिफ़ाज़त सिर्फ अल्लाह के हाथ में है।
नज़र से बचाव की मसनून दुआएं
नज़र-ए-बद से हिफ़ाज़त और उसके असर को ख़त्म करने के लिए ज़ैल में दी गई दुआएं सबसे ज़्यादा मोतबर (authentic) हैं। इन्हें पूरे यक़ीन के साथ पढ़ना चाहिए:
1. बच्चों और अपनों की हिफ़ाज़त के लिए दुआ
Arabic Dua
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لَامَّةٍ
तलफ़्फ़ुज़
अऊज़ु बि-कलिमातिल्लाहित-ताम्मति मिन कुल्लि शैतानिंव-व-हाम्मतिन, व मिन कुल्लि ऐनिल-लाम्मतिन।
Roman
A’udhu bikalimatillahit-tammati min kulli shaytanin wa hammah, wa min kulli ‘aynin lammah.
तर्जुमा
“मैं अल्लाह के मुकम्मल कलिमात की पनाह मांगता हूँ हर शैतान से, हर ज़हरीले जानवर से और हर नुकसान पहुँचाने वाली नज़र से।”
सियाक-ओ-सबक़: सहीह बुखारी (हदीस नंबर: 3371)। हुज़ूर ﷺ यह दुआ हज़रत हसन और हज़रत हुसैन रज़ि० पर पढ़कर दम फ़रमाते थे।
2. नज़र-ए-बद उतारने और शिफ़ा की दुआ
Arabic Dua
بِسْمِ اللَّهِ يُبْرِيكَ، وَمِنْ كُلِّ دَاءٍ يَشْفِيكَ، وَمِنْ شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ، وَشَرِّ عَيْنٍ
तलफ़्फ़ुज़
बिस्मिल्लाहि युब्रीका, व मिन कुल्लि दाइन यश्फ़ीका, व मिन शर्रि हासिदिन इज़ा हसदा, व शर्रि ऐनिन।
Roman
Bismillahi yubrika, wa min kulli da’in yashfika, wa min sharri hasidin idha hasada, wa sharri ‘aynin.
तर्जुमा
“अल्लाह के नाम के साथ, जो तुम्हें बे-गुनाह (पाक) करता है और हर बीमारी से शिफ़ा देता है, और हसद करने वाले के हसद से और हर बुरी नज़र के शर से पनाह देता है।”
सियाक-ओ-सबक़: सहीह मुस्लिम (हदीस नंबर: 2185)। हज़रत जिब्रील अलै० ने हुज़ूर ﷺ पर यह दुआ पढ़कर दम किया था।
दुआ के साथ क्या छोड़ना ज़रूरी है
अल्लाह पर कामिल तवक्कुल (भरोसा) रखने के लिए इन ग़लत रस्मों से बचना लाज़मी है:
- तावीज़ और काले धागे: हिफ़ाज़त के लिए किसी धागे या तावीज़ को गले या हाथ में बांधना सुन्नत के ख़िलाफ़ है।
- मिर्च और नींबू के टोटके: आग में मिर्च जलाना या घर के बाहर नींबू टांगना सिर्फ एक वहम है।
- नज़र का पत्थर या काली हांडी: गाड़ियों या मकानों पर ऐसी चीज़ें लगाना बे-बुनियाद है।
- ज़रूरत से ज़्यादा डर: यह यक़ीन रखें कि अल्लाह की मर्जी के बिना कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता।
बच्चों और घर के लिए कैसे पढ़ें
- पाबंदी: रोज़ाना सुबह और शाम इन दुआओं को पढ़ने की आदत डालें।
- मुअव्वज़तैन: सूरह इख़लास, सूरह फ़लक़ और सूरह नास पढ़कर अपने हाथों पर दम करें और बच्चों के पूरे जिस्म पर फेर दें।
- अज़कार: घर में सूरह बक़रह की तिलावत का एहतेमाम करें, इससे शैतानी असरात दूर रहते हैं।
- नीयत: हमेशा इस नीयत से पढ़ें कि अल्लाह ही सबसे बड़ा मुहाफ़िज़ (हिफ़ाज़त करने वाला) है।
सवाल-जवाब (अहम मालूमात)
सवाल: क्या नज़र से बचने के लिए तावीज़ पहनना जायज़ है?
जवाब: नहीं, सुन्नत तरीक़ा अल्लाह के ज़िक्र और दुआओं से पनाह मांगना है। किसी बेजान चीज़ पर भरोसा करना हमारे ईमान को कमज़ोर करता है।
सवाल: क्या नज़र हर चीज़ को लग सकती है?
जवाब: हाँ, नज़र इंसान, माल और यहाँ तक कि अपनी चीज़ को भी लग सकती है। इसीलिए सुन्नत है कि जब भी कोई अच्छी चीज़ देखें तो ‘माशाअल्लाह’ ज़रूर कहें।
अल्लाह की हिफ़ाज़त काफ़ी है
नज़र-ए-बद का इलाज वहम में नहीं बल्कि अल्लाह के ज़िक्र में है। जब हम सुन्नत दुआओं को पूरे यक़ीन के साथ पढ़ते हैं, तो अल्लाह तआला हमारे इर्द-गिर्द हिफ़ाज़त का एक मज़बूत हिसार बना देता है। अपने दिल में यह इत्मीनान रखें कि अल्लाह के कलाम से बढ़कर कोई और हिफ़ाज़त नहीं हो सकती। उसका ज़िक्र ही सबसे बड़ा सुकून है।


