Quick Summary
Dua Name
Nazar Ki Dua
Arabic Text
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لَامَّةٍ
Hindi Transliteration
अऊज़ु बि-कलिमातिल्लाहित-ताम्मति मिन कुल्लि शैतानिंव-व-हाम्मतिन, व मिन कुल्लि ऐनिल-लाम्मतिन।
English Transliteration
Auzu bi-kalimatillahit-tammati min kulli shaitaninw-w-hammatin, w min kulli ainil-lammatin.
Source
सहीह बुखारी (हदीस नंबर: 3371)
अक्सर वालिदैन अपने बच्चों की सेहत या अचानक आने वाली तब्दीली को लेकर फ़िक्रमंद रहते हैं। कभी कारोबार में अचानक नुक़सान या घर के सुकून में कमी आने पर लोग सबसे पहले ‘नज़र-ए-बद’ का ही सोंचते हैं। अगर आप अपने अज़ीज़ों की हिफ़ाज़त के लिए Nazar ki dua in English या हिंदी में तलाश कर रहे हैं, तो यहाँ हम सुन्नत से साबित सबसे मोतबर (Authentic) दुआएं लेकर आए हैं।
नज़र का ख़ौफ़ और इस्लाम में इसकी हक़ीक़त
नज़र-ए-बद (Evil Eye) का लगना एक हक़ीक़त है, जिसकी तस्दीक़ अल्लाह के रसूल ﷺ ने भी फ़रमाई है। लेकिन इसका मत्लब यह हरगिज़ नहीं कि हम तावीज़, काली डोरियों या वहम वाली चीज़ों पर भरोसा करने लगें।
इस्लाम हमें घबराने के बजाय अल्लाह की पनाह में आना सिखाता है। हमारा पुख़्ता अक़ीदा यह होना चाहिए कि शिफ़ा और हिफ़ाज़त सिर्फ़ अल्लाह ताला के हाथ में है। अल्लाह के हुक्म के बग़ैर कोई नज़र असर नहीं कर सकती।
नज़र-ए-बद से बचाव की मसनून दुआएं (Nazar Ki Dua In English & Hindi)
नज़र-ए-बद से हिफ़ाज़त और उसके असर को ख़त्म करने के लिए नीचे दी गई दुआएं हदीस से साबित हैं। इन्हें पूरे यक़ीन के साथ पढ़ना चाहिए:
1. बच्चों और अपनों की हिफ़ाज़त के लिए दुआ
जब बच्चों को बाहर लेकर जाएं या उन्हें नज़र लगने का अंदेशा हो, तो यह दुआ पढ़कर उन पर दम करें (फूँकें):
Arabic:
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لَامَّةٍ
Hindi:
अऊज़ु बि-कलिमातिल्लाहित-ताम्मति मिन कुल्लि शैतानिंव-व-हाम्मतिन, व मिन कुल्लि ऐनिल-लाम्मतिन।
Roman (Nazar Ki Dua In English):
A’udhu bikalimatillahit-tammati min kulli shaytanin wa hammah, wa min kulli ‘aynin lammah.
तर्जुमा / मत्लब:
“मैं अल्लाह के मुकम्मल कलिमात की पनाह मांगता हूँ हर शैतान से, हर ज़हरीले जानवर से और हर नुक़सान पहुँचाने वाली नज़र से।” (हवाला: सहीह बुख़ारी, हदीस 3371 – हुज़ूर ﷺ यह दुआ हज़रत हसन और हज़रत हुसैन रज़ि० पर पढ़कर दम फ़रमाते थे।)
2. नज़र-ए-बद उतारने और शिफ़ा की दुआ
अगर किसी को नज़र लग चुकी हो या बीमारी आ गई हो, तो शिफ़ा के लिए यह दुआ पढ़ें:
Arabic:
بِسْمِ اللَّهِ يُبْرِيكَ، وَمِنْ كُلِّ دَاءٍ يَشْفِيكَ، وَمِنْ شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ، وَشَرِّ عَيْنٍ
Hindi:
बिस्मिल्लाहि युब्रीका, व मिन कुल्लि दाइन यश्फ़ीका, व मिन शर्रि हासिदिन इज़ा हसदा, व शर्रि ऐनिन।
Roman:
Bismillahi yubrika, wa min kulli da’in yashfika, wa min sharri hasidin idha hasada, wa sharri ‘aynin.
तर्जुमा / मत्लब:
“अल्लाह के नाम के साथ, जो तुम्हें बे-ज़رر (पाक) करता है और हर बीमारी से शिफ़ा देता है, और हसद करने वाले के हसद से और हर बुरी नज़र के शर से पनाह देता है।” (हवाला: सहीह मुस्लिम, हदीस 2185 – हज़रत जिब्रील अलै० ने हुज़ूर ﷺ पर यह दुआ पढ़कर दम किया था।)
नज़र से बचने के लिए किन चीज़ों से बचना लाज़िम है?
अल्लाह पर कामिल तवक्कुल (भरोसा) रखने के लिए इन ग़लत रस्मों और बिदअत से बचना ज़रूरी है:
- तावीज़ और काले धागे: हिफ़ाज़त के लिए किसी धागे या तावीज़ को गले या हाथ में बांधना सुन्नत के ख़िलाफ़ है।
- मिर्च और नींबू के टोटके: आग में मिर्च जलाना या घर के दरवाज़े पर नींबू टांगना सिर्फ़ एक वहम है, इस्लाम में इसकी कोई जगह नहीं।
- नज़र का पत्थर या काली हांडी: गाड़ियों या मकानों पर ऐसी चीज़ें लगाना बे-बुनियाद है।
- हद से ज़्यादा ख़ौफ़: यह यक़ीन रखें कि अल्लाह की मर्ज़ी के बग़ैर कोई नुक़सान नहीं पहुँचा सकता।
बच्चों और घर के लिए कैसे पढ़ें? (अहम आदाब)
- पाबंदी: रोज़ाना सुब्ह और शाम इन दुआओं को पढ़ने की आदत डालें।
- मुअव्वज़तैन (क़ुल वाली सूरतें): सूरह इख़लास, सूरह फ़लक़ और सूरह नास (3-3 मर्तबा) पढ़कर अपने हाथों पर दम करें और बच्चों के पूरे जिस्म पर फेर दें।
- अज़कार की पाबंदी: घर में सूरह बक़रह की तिलावत का एहतेमाम करें, इससे घर में बरकत आती है और शैतानी असरात दूर रहते हैं।
- माशाअल्लाह कहना: जब भी किसी की कोई अच्छी चीज़ या अपने बच्चों की कोई ख़ूबी देखें, तो फ़ौरन ‘माशाअल्लाह ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह’ कहें, इससे नज़र नहीं लगती।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
सवाल 1: क्या नज़र से बचने के लिए तावीज़ पहनना जायज़ है?
जवाब: नहीं, सुन्नत तरीक़ा सिर्फ़ अल्लाह के ज़िक्र और मसनून दुआओं से पनाह मांगना है। किसी बेजान चीज़ या धागे पर भरोसा करना हमारे ईमान को कमज़ोर करता है।
सवाल 2: क्या नज़र हर चीज़ को लग सकती है?
जवाब: जी हाँ, नज़र इंसान, माल, कारोबार और यहाँ तक कि अपनी चीज़ या अपने आपको भी लग सकती है। इसीलिए सुन्नत है कि जब भी कोई अच्छी चीज़ देखें तो ‘माशाअल्लाह’ ज़रूर कहें।
आख़िरी बात: अल्लाह की हिफ़ाज़त ही काफ़ी है
नज़र-ए-बद का इलाज किसी वहम या टोटके में नहीं, बल्कि अल्लाह के कलाम में है। जब हम सुन्नत दुआओं को पूरे यक़ीन के साथ पढ़ते हैं, तो अल्लाह तआला हमारे इर्द-गिर्द हिफ़ाज़त का एक मज़बूत हिसार (घेरा) बना देता है। अपने दिल में यह इत्मीनान रखें कि अल्लाह के कलाम से बढ़कर कोई और हिफ़ाज़त नहीं हो सकती।
अल्लाह तआला हम सबको, हमारे बच्चों और कारोबार को हर तरह की नज़र-ए-बद और हासिदों के हसद से महफ़ूज़ रखे। आमीन।



