Maghfirat Ki Dua | मग़फ़िरत की दुआ

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मुख़्तसर रहनुमाई

मग़फिरत की दुआ

اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ، خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ، وَأَنَا عَلَىٰ عَهْدِكَ وَوَعْدِكَ مَا اسْتَطَعْتُ، أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا صَنَعْتُ، أَبُوءُ لَكَ بِنِعْمَتِكَ عَلَيَّ، وَأَبُوءُ بِذَنْبِي فَاغْفِرْ لِي فَإِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ
तलफ़्फ़ुज़:
अल्लाहुम्मा अंता रब्बी ला इलाहा इल्ला अंता, ख़लक़्तनी व अना अबदुका, व अना अला अहदिका व वअदिका मस-ततअ-तु, अऊज़ु बिका मिन शर्रि मा सनअ-तु, अबू-उ लका बिनिअ-मतिका 'अलैया, व अबू-उ बिजन्बी फ़ग़फ़िर ली फ़इन्नहू ला यग़फ़िरुज़-ज़ुनूबा इल्ला अंता।
तर्जुमा:
ऐ अल्लाह! तू मेरा रब है, तेरे सिवा कोई इबादत के लायक नहीं। तूने मुझे पैदा किया और मैं तेरा बंदा हूँ। मैं अपनी हिम्मत के मुताबिक तेरे अहद और वादे पर कायम हूँ। मैं अपने किए हुए कामों की बुराई से तेरी पनाह मांगता हूँ। मुझ पर जो तेरी नेमतें हैं, मैं उनका इक़रार करता हूँ और अपने गुनाहों का भी एतराफ़ करता हूँ। पस, तू मुझे माफ़ कर दे, क्योंकि तेरे सिवा कोई गुनाहों को माफ़ करने वाला नहीं।
मसदर: 
सहीह बुखारी (हदीस 6306)
maghfirat ki dua main

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इंसान होने के नाते हमसे गलतियाँ हो जाती हैं। कभी-कभी दिल पर गुनाहों का बोझ इतना बढ़ जाता है कि बेचैनी होने लगती है। मन में एक शर्मिंदगी महसूस होती है और ऐसा लगता है जैसे हम अल्लाह से बहुत दूर हो गए हैं। लेकिन याद रखिए, आपके दिल में पैदा होने वाली यह नदामत (शर्मिंदगी) ही इस बात की दलील है कि अल्लाह आपको फिर से अपनी रहमत की तरफ बुला रहा है। वह चाहता है कि आप लौट आएं।

गुनाह कितना ही बड़ा क्यों न हो, अल्लाह की रहमत उससे कहीं ज़्यादा बड़ी है। वह इंतज़ार करता है कि कब उसका बंदा उसकी तरफ पलटे और वह उसे अपने गले लगा ले।


Maghfirat Aur Allah Ki Rehmat | मग़फ़िरत और अल्लाह की रहमत

अल्लाह तआला का एक नाम ‘अल-ग़फ़ूर’ है, जिसका मतलब है बहुत ज़्यादा माफ़ करने वाला। जब बंदा सच्चे दिल से तौबा करता है, तो अल्लाह न सिर्फ उसके गुनाह माफ़ करता है, बल्कि उसके दिल को एक सुकून और इत्मीनान की दौलत से भर देता है। हमें कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि “क्या मैं माफ़ किया जाऊंगा?” क्योंकि उसकी रहमत से मायूस होना सबसे बड़ी हार है।


Masnoon Duas For Maghfirat | मग़फ़िरत की मसनून दुआएं

यहाँ हम दो ऐसी दुआएं पेश कर रहे हैं जो अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने हमें सिखाई हैं। इन दुआओं को अपनी बातचीत का हिस्सा बनाएं:

1. Sayyidul Istighfar | सय्यिदुल इस्तिग़फ़ार (इस्तिग़फ़ार की सबसे अफ़ज़ल दुआ)

Arabic:

اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنْتَ، خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ، وَأَنَا عَلَىٰ عَهْدِكَ وَوَعْدِكَ مَا اسْتَطَعْتُ، أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا صَنَعْتُ، أَبُوءُ لَكَ بِنِعْمَتِكَ عَلَيَّ، وَأَبُوءُ بِذَنْبِي فَاغْفِرْ لِي فَإِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ

तलफ़्फ़ुज़:

अल्लाहुम्मा अंता रब्बी ला इलाहा इल्ला अंता, ख़लक़्तनी व अना अबदुका, व अना अला अहदिका व वअदिका मस-ततअ-तु, अऊज़ु बिका मिन शर्रि मा सनअ-तु, अबू-उ लका बिनिअ-मतिका ‘अलैया, व अबू-उ बिजन्बी फ़ग़फ़िर ली फ़इन्नहू ला यग़फ़िरुज़-ज़ुनूबा इल्ला अंता।

Roman:

Allahumma anta rabbi la ilaha illa anta, khalaqtani wa ana ‘abduka, wa ana ‘ala ‘ahdika wa wa’dika mastata’tu, a’udhu bika min sharri ma sana’tu, abu’u laka bini’matika ‘alayya, wa abu’u bidhanbi faghfir li fainnahu la yaghfiru adh-dhunuba illa anta.

तर्जुमा:

ऐ अल्लाह! तू मेरा रब है, तेरे सिवा कोई इबादत के लायक नहीं। तूने मुझे पैदा किया और मैं तेरा बंदा हूँ। मैं अपनी हिम्मत के मुताबिक तेरे अहद और वादे पर कायम हूँ। मैं अपने किए हुए कामों की बुराई से तेरी पनाह मांगता हूँ। मुझ पर जो तेरी नेमतें हैं, मैं उनका इक़रार करता हूँ और अपने गुनाहों का भी एतराफ़ करता हूँ। पस, तू मुझे माफ़ कर दे, क्योंकि तेरे सिवा कोई गुनाहों को माफ़ करने वाला नहीं।

मस्दर (हवाला): सहीह बुखारी (हदीस 6306)


2. Dua For Deep Forgiveness | मग़फ़िरत की एक और प्यारी दुआ

Arabic:

اللَّهُمَّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي ظُلْمًا كَثِيرًا، وَلَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ، فَاغْفِرْ لِي مَغْفِرَةً مِّنْ عِندِكَ وَارْحَمْنِي، إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ

तलफ़्फ़ुज़:

अल्लाहुम्मा इन्नी ज़लम-तु नफ़्सी ज़ुलमन कसीरा, व ला यग़फ़िरुज़-ज़ुनूबा इल्ला अंता, फ़ग़फ़िर ली मग़फ़िरतम-मिन इन्दिका वर-हम्नी, इन्नका अंताल ग़फ़ूरुर-रहीम।

Roman:

Allahumma inni zalamtu nafsi zulman kathiran, wa la yaghfiru adh-dhunuba illa anta, faghfir li maghfiratan min ‘indika warhamni, innaka anta al-ghafuru ar-rahim.

तर्जुमा:

ऐ अल्लाह! मैंने अपने नफ़्स पर बहुत ज़्यादा ज़ुल्म किया है और तेरे सिवा कोई गुनाहों को माफ़ नहीं कर सकता। पस, तू अपनी तरफ़ से मेरी मग़फ़िरत फ़रमा दे और मुझ पर रहम फ़रमा। बेशक तू ही बहुत माफ़ करने वाला और निहायत रहम करने वाला है।

मस्दर (हवाला): सहीह बुखारी (6346) और मुस्लिम (2705)


Dua Ke Saath Tawbah Ka Rasta | दुआ के साथ तौबा का तरीक़ा

सिर्फ ज़ुबान से दुआ पढ़ना काफ़ी नहीं, दिल का बदलना ज़रूरी है। तौबा के इन चंद आदाब का ख्याल रखें:

  • नदामत: अपने किए पर दिल से शर्मिंदगी महसूस करें।
  • गुनाह छोड़ना: जिस ग़लत काम में आप मुब्तला हैं, उसे फ़ौरन छोड़ दें।
  • पक्का इरादा: आगे से उस गुनाह को न करने का मज़बूत इरादा करें।
  • अल्लाह पर भरोसा: दुआ के बाद पूरा यकीन रखें कि अल्लाह ने आपकी पुकार सुन ली है।

Agar Dil Mein Sharm Ya Na-Umeedi Ho | अगर दिल में शर्म या ना-उम्मीदी हो

अक्सर शैतान हमारे दिल में यह डालता है कि “मैंने तो इतने गुनाह किए हैं, अब मेरी तौबा कैसे कुबूल होगी?” या “मैं बार-बार वही गलती करता हूँ।” याद रखिए, तौबा का दरवाज़ा आख़िरी सांस तक खुला है। अगर आप हज़ार बार भी गिरें, तो हज़ार एकवीं बार फिर से अल्लाह की तरफ लौटें। अल्लाह तौबा करने वालों से मुहब्बत करता है। आपकी नदामत का एक आँसू आपके सारे गुनाहों को धोने के लिए काफ़ी है।


Sawal-O-Jawab | सवाल-ओ-जवाब

क्या यह दुआ रोज़ पढ़ना जाइज़ है?

जी हाँ, अल्लाह के नबी (ﷺ) रोज़ाना सौ-सौ बार इस्तिग़फ़ार किया करते थे। इसे अपनी आदत बना लेने से दिल का ज़ंग दूर होता है।

अगर गुनाह दोबारा हो जाए तो क्या करें?

मायूस न हों। फिर से तौबा करें और अपने इरादे को और मज़बूत करें। अल्लाह माफ़ करने वालों को पसंद करता है।

क्या बिना लफ़्ज़ों के भी मग़फ़िरत मांग सकते हैं?

बिल्कुल। अल्लाह आपके दिल के हाल को जानता है। अगर आपकी ज़ुबान से लफ़्ज़ नहीं निकल रहे और सिर्फ आँखों में आँसू हैं, तो वह उसे भी समझता है।


Rehmat Ki Taraf Wapsi | रहमत की तरफ़ वापसी

अल्लाह की तरफ वापसी का सफ़र कभी मुश्किल नहीं होता, बस एक कदम बढ़ाने की ज़रूरत है। जब आप उसकी तरफ चलते हैं, तो वह आपकी तरफ दौड़ कर आता है। दुआओं के साथ अपने दिल में यह हुस्न-ए-ज़न रखें कि वह रहीम है, वह करीम है, वह आपको कभी खाली हाथ नहीं लौटाएगा।