अचानक आने वाली मुसीबत और दिल की घबराहट
ज़िन्दगी में सब कुछ ठीक चल रहा होता है कि अचानक कोई ऐसी खबर आती है या कोई ऐसी मुश्किल खड़ी हो जाती है जिसे देख कर पाँव तले ज़मीन खिसक जाती है। अचानक आने वाली मुसीबत—चाहे वो कोई माली नुकसान हो, सेहत की खराबी हो, या कोई कानूनी उलझन—इंसान को अंदर से तोड़ देती है।
ऐसे में सबसे पहले दिल घबराता है और ज़हन में सिर्फ़ एक ही सवाल होता है, “अब क्या होगा?” यह खौफ़ और बेचैनी फ़ितरी (natural) है। जब रास्ता न सूझे और चारों तरफ अंधेरा महसूस हो, तब एक मोमिन का सबसे बड़ा सहारा सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह की पनाह होती है। यह लेख आपको उस मज़बूत यकीन की तरफ ले जाएगा जो हर परेशानी का हल है।
मुसीबत और अल्लाह की पनाह
मुसीबत का आना कभी आज़माइश होती है तो कभी हमारे अपने आमाल का नतीजा। लेकिन वजह जो भी हो, उसका हल सिर्फ़ अल्लाह के पास है। पनाह माँगने का मतलब यह नहीं है कि हम हाथ पर हाथ धर कर बैठ जाएं, बल्कि इसका मतलब यह है कि हम अपनी पूरी कोशिश करें और नतीजे के लिए उस रब्ब पर भरोसा करें जो दरियाओं के बीच से रास्ता निकाल देता है।
अल्लाह तआला ने हमें बेसहारा नहीं छोड़ा है। रसूलुल्लाह ﷺ ने हमें ऐसी दुआएं सिखाई हैं जो न सिर्फ़ आने वाली बलाओं को टालती हैं, बल्कि दिल को वो सुकून देती हैं जिसकी उस वक़्त सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है।
मसनून दुआ: हर मुसीबत से हिफ़ाज़त के लिए
यहाँ दो ऐसी दुआएं दी जा रही हैं जो मुसीबत के वक़्त ढाल का काम करती हैं। पहली दुआ अल्लाह पर अटूट भरोसे के लिए है और दूसरी दुआ हिफ़ाज़त और सुकून के लिए।
1. मुसीबत के वक़्त अल्लाह पर भरोसे की दुआ
जब आप खुद को बेबस महसूस करें और कोई मदद नज़र न आए, तो यह क़ुरानी दुआ कसरत से पढ़ें। यह दुआ हज़रत इब्राहीम (A.S) ने उस वक़्त पढ़ी थी जब उन्हें आग में डाला जा रहा था।
حَسْبُنَا اللَّهُ وَنِعْمَ الْوَكِيلُ
तलफ़्फ़ुज़ (Devanagari): हसबुनल्लाहु व निअमल वकील
Roman: Hasbunallahu wa ni’mal wakeel
तर्जुमा: हमारे लिए अल्लाह ही काफी है और वह बेहतरीन कारसाज़ (काम बनाने वाला) है।
मस्दर: क़ुरान (सूरह अल-इमरान, आयत 173)
2. अचानक आने वाले खौफ़ और परेशानी की दुआ
अगर दिल में किसी बात का डर बैठ गया हो या बेचैनी बढ़ रही हो, तो यह मसनून दुआ सुबह-शाम के अज़कार में ज़रूर शामिल करें:
اللَّهُمَّ اسْتُرْ عَوْرَاتِي وَآمِنْ رَوْعَاتِي
तलफ़्फ़ुज़ (Devanagari): अल्लाहुम्मस्तुर औराती व आमिन् रौआती
Roman: Allahummastur ‘auraati wa aamin rau’aati
तर्जुमा: ऐ अल्लाह! मेरी पर्दापोशी फरमा (मेरे ऐबों को छुपा ले) और मुझे मेरी घबराहटों और खौफ़ से अमन (सुकून) अता फरमा।
मस्दर: सहीह हदीस (सुनन अबू दाऊद)
दुआ के साथ क्या ज़रूरी है?
दुआ एक हथियार है, लेकिन इसे चलाने का तरीक़ा भी मालूम होना चाहिए। दुआ के साथ इन बातों का ख्याल रखें:
- तवक्कुल (भरोसा): दिल में यह मुकम्मल यकीन रखें कि अल्लाह के हुक्म के बिना कोई पत्ता भी नहीं हिल सकता।
- होशियारी: जिस मुसीबत का अंदेशा है, उससे बचने के लिए जायज़ और मुमकिन कोशिश ज़रूर करें।
- तौबा व इस्तिग़फ़ार: कभी-कभी मुसीबतें हमें अल्लाह के करीब लाने के लिए आती हैं, इसलिए बार-बार माफ़ी मांगते रहें।
- सदक़ा: अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया है कि सदक़ा आने वाली मुसीबत को टाल देता है।
अगर डर बार-बार आए तो?
बहुत से लोग कहते हैं कि उन्हें हर वक़्त एक अनजाना डर लगा रहता है कि “कुछ बुरा होने वाला है”। अगर आपके साथ भी ऐसा है, तो खुद को कसूरवार न ठहराएं। यह इंसानी कमजोरी है।
जब भी दिल में घबराहट बढ़े, तो लंबी सांस लें और ऊपर दी गई दुआओं का विर्द शुरू कर दें। कोई फ़लसफ़ा उतना काम नहीं आता जितना अल्लाह का ज़िक्र दिल को मज़बूत करता है। यह याद रखें कि जो अल्लाह कल आपके साथ था, वो आज भी आपके साथ है।
आम सवाल (FAQ)
क्या ये दुआएं रोज़ पढ़ सकते हैं?
जी हाँ, नबी ﷺ इन दुआओं को सुबह और शाम पाबंदी से पढ़ा करते थे ताकि हर किस्म की अचानक आने वाली मुसीबत से हिफ़ाज़त रहे।
क्या बच्चों के लिए यह दुआ पढ़ना जाइज़ है?
बिलकुल। आप खुद पढ़कर बच्चों पर दम (blow) कर सकते हैं। यह उनके लिए बेहतरीन हिफ़ाज़त है।
रात को अचानक घबराहट हो तो क्या करें?
फ़ौरन वज़ू करें और किबला रुख होकर बैठें। “हसबुनल्लाहु व निअमल वकील” का विर्द करें, इंशाअल्लाह दिल को सुकून मिलेगा।
अल्लाह की हिफ़ाज़त में सुकून
मुसीबत चाहे कितनी ही बड़ी क्यों न लगे, अल्लाह की रहमत उससे कहीं ज़्यादा बड़ी है। जब आप सच्चे दिल से अल्लाह को पुकारते हैं, तो वो आपके लिए ऐसे रास्ते खोल देता है जिनका आपने तसव्वुर भी नहीं किया होता। बस अपना हाथ अल्लाह के हाथ में दे दें और इस्तिकामत (डटे रहना) इख्तियार करें।


