Naye Ghar Mein Dakhil Hone Ki Dua | नए घर में दाख़िल होने की दुआ

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मुख़्तसर रहनुमाई

नए घर में दाख़िल होने की दुआ

مَا شَاءَ اللَّهُ لَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ
तलफ़्फ़ुज़:
मा शाअल्लाहु ला कु़व्वता इल्ला बिल्लाह
तर्जुमा:
जो अल्लाह ने चाहा (वही हुआ), अल्लाह की मदद के बगैर किसी में कोई ताकत नहीं।
मसदर: 
सूरह अल-कहफ़ (आयत 39)
naye ghar mein dakhil hone ki dua main

Table of Content

नया घर सिर्फ चार दीवारों का नाम नहीं होता, बल्कि यह हमारी उम्मीदों, सुकून और आने वाली ज़िंदगी का एक मरकज़ होता है। चाहे आप अपना खुद का घर खरीद रहे हों, किसी नए शहर में फ्लैट ले रहे हों या किराए के घर में शिफ्ट हो रहे हों, हर नई शुरुआत अपने साथ एक अजीब सी घबराहट और ढेर सारी खुशियां लेकर आती है। हम सब चाहते हैं कि हमारे इस नए ठिकाने में बरकत हो, घर के लोगों के बीच मोहब्बत रहे और हम हर तरह की आफतों से महफूज़ रहें।

इस्लाम हमें सिखाता है कि जब भी हम किसी नई चीज़ की शुरुआत करें, तो अल्लाह का ज़िक्र हमारी ज़बान पर हो। इससे न सिर्फ दिल को इत्मीनान मिलता है, बल्कि उस जगह में अल्लाह की रहमत का साया भी शामिल हो जाता है।

शुरुआत अल्लाह के ज़िक्र से क्यों?

नए घर में कदम रखते वक्त दुआ पढ़ना महज़ एक रस्म नहीं है, बल्कि यह इस बात का इकरार है कि जो कुछ हमें मिला है, वह अल्लाह का फ़ज़ल है। जब हम दुआ के साथ घर में दाखिल होते हैं, तो हम शैतानी ताकतों को बाहर छोड़ देते हैं और अपने घर को ज़िक्र-ए-इलाही से रोशन करते हैं। सुन्नत के मुताबिक की गई ये छोटी सी कोशिश हमारे घर को एक रूहानी सुकून (Spiritual Peace) का ज़रिया बना देती है।

नए घर में दाख़िल होने की मसनून दुआ

हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल ﷺ ने फरमाया कि जब कोई शख्स अपने घर में दाखिल होते वक्त यह दुआ पढ़ता है, तो अल्लाह ताला उसे और उसके घर वालों को खैरो-बरकत अता फरमाता है।

अरबी दुआ:

مَا شَاءَ اللَّهُ لَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ

तलफ़्फ़ुज़ (Devanagari):

मा शाअल्लाहु ला कु़व्वता इल्ला बिल्लाह

तलफ़्फ़ुज़ (Roman):

Ma Sha Allahu La Quwwata Illa Billah

तर्जुमा:

जो अल्लाह ने चाहा (वही हुआ), अल्लाह की मदद के बगैर किसी में कोई ताकत नहीं।

सियाक-ओ-सबक़ (हवाला):

यह दुआ सूरह अल-कहफ़ (आयत 39) से ली गई है। हदीस की किताबों में इसे घर की बरकत और नज़र-ए-बद से हिफाज़त के लिए बेहतरीन बताया गया है।


एक और जामेअ दुआ (General Protection):

जब आप पहली बार या रोज़ाना घर में दाखिल हों, तो यह दुआ पढ़ना सुन्नत से साबित है:

अरबी दुआ:

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَ الْمَوْلِجِ وَخَيْرَ الْمَخْرَجِ، بِاسْمِ اللَّهِ وَلَجْنَا، وَبِاسْمِ اللَّهِ خَرَجْنَا، وَعَلَى اللَّهِ رَبِّنَا تَوَكَّلْنَا

तलफ़्फ़ुज़ (Devanagari):

अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका खैरल मौलिजी व खैरल मख्रजी, बिस्मिल्लाहि वलजना, व बिस्मिल्लाहि खरजना, व अ़लल्लाहि रब्बिना तवक्कलना।

तलफ़्फ़ुज़ (Roman):

Allahumma inni as’aluka khayral mawliji wa khayral makhraji, bismillahi walajna, wa bismillahi kharajna, wa ‘alallahi rabbina tawakkalna.1

तर्जुमा:

ऐ अल्लाह! मैं तुझसे घर में दाखिल होने की और घर से निकलने की भलाई मांगता हूं। अल्लाह के नाम से ही हम दाखिल हुए और अल्लाह के नाम से ही हम निकले, और हमने अपने रब अल्लाह ही पर भरोसा किया।

सियाक-ओ-सबक़ (हवाला):

सुनन अबू दाऊद (हदीस नंबर: 5096), यह दुआ घर में दाखिल होने के बेहतरीन आदाब में से है।

घर में दाखिल होने के सुन्नत आदाब

नया घर खुशियों का घर बने, इसके लिए रसूलुल्लाह ﷺ की ज़िंदगी से हमें कुछ सादा और असरदार तरीके मिलते हैं:

  • बिस्मिल्लाह से शुरुआत: घर का दरवाज़ा खोलते और कदम अंदर रखते वक्त ‘बिस्मिल्लाह’ ज़रूर कहें। इससे शैतान घर से दूर रहता है।
  • सलाम करना: चाहे घर खाली हो या घर में लोग मौजूद हों, दाखिल होते ही “अस्सलामू अलैकुम” कहें। यह दुआ आपके और आपके घर वालों के लिए रहमत का सबब है।
  • दाहिना कदम (Right Foot): सुन्नत के मुताबिक घर में पहले सीधा पैर रखना मुस्तहब (पसंदीदा) है।
  • सूरह अल-बक़रह की तिलावत: हदीस में आता है कि जिस घर में सूरह अल-बक़रह पढ़ी जाती है, वहां से शैतान भाग जाता है। नए घर में शिफ्ट होने के बाद शुरूआती दिनों में इसकी तिलावत का एहतिमाम ज़रूर करें।
  • शुक्रगुज़ारी: अल्लाह का शुक्र अदा करें कि उसने आपको सिर छुपाने के लिए एक अच्छी जगह अता फरमाई।

बरकत का माहौल कैसे बनाएं?

घर में बरकत सिर्फ महंगी सजावट या फर्नीचर से नहीं आती, बल्कि वहां के माहौल से आती है। अपने नए घर को सुकून का गहवारा बनाने के लिए इन बातों पर गौर करें:

  1. नमाज़ का एक कोना: घर में एक जगह ऐसी मुक़र्रर करें जहां पाकीज़गी का खास ख्याल हो और वहां नफ्ल नमाज़ें और ज़िक्र किया जाए।
  2. मिलकर खाना: कोशिश करें कि घर के लोग दिन में कम से कम एक वक्त का खाना साथ बैठकर खाएं। मिलकर खाने में बरकत होती है।
  3. फुज़ूलखर्ची से परहेज़: घर को सजाने में इतना खर्च न करें कि वह दिखावा बन जाए। सादगी में ही सुकून है।
  4. मीठी ज़ुबान: घर की दीवारों से ज़्यादा वहां रहने वालों के अख़्लाक़ मायने रखते हैं। अपनों से नरमी और मोहब्बत से बात करना घर में रहमत लाता है।

आम सवालात (FAQ)

सवाल: क्या किराए के घर में जाने पर भी यही दुआ पढ़नी चाहिए?

जवाब: जी बिल्कुल। चाहे घर अपना हो या किराए का, जब आप वहां रहने के लिए जाते हैं, तो वह आपका ठिकाना बन जाता है। अल्लाह की हिफाज़त और बरकत की ज़रूरत हर जगह होती है।

सवाल: अगर मैं पहली बार दाखिल होते वक्त दुआ पढ़ना भूल जाऊं तो क्या करूं?

जवाब: इसमें कोई परेशानी की बात नहीं है। जब भी याद आए, आप बिस्मिल्लाह पढ़कर दुआ कर सकते हैं। अल्लाह नीयत देखता है। आप शिफ्ट होने के बाद भी ऊपर दी गई दुआओं को अपना मामूल बना सकते हैं।

सवाल: क्या नए घर में इबादत करना ज़रूरी है?

जवाब: नए घर को आबाद करने का सबसे बेहतरीन तरीका नमाज़ और कुरान की तिलावत है। इससे घर की रूहानी सफाई होती है और बरकत आती है।

नए सफ़र की एक सादा दुआ

नया घर मुबारक हो! अल्लाह ताला आपके इस नए आशियाने को खुशियों, सुकून और सेहत से भर दे। दुआ है कि यह घर आपके लिए सिर्फ रहने की जगह न हो, बल्कि अल्लाह की इबादत और अपनों की मोहब्बत का मरकज़ बने। जब भी आप इस घर की दहलीज़ पार करें, आपका दिल शुक्र और ज़बान अल्लाह के ज़िक्र से तर रहे।

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