औलाद: अल्लाह की दी हुई एक अज़ीम अमानत
इस्लाम में औलाद सिर्फ एक खुशी का ज़रिया नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ से दी गई एक मुक़द्दस अमानत है। एक मोमिन वालिद या वालिदा होने के नाते हमारी यह ज़िम्मेदारी है कि हम उनकी परवरिश और सलामती के लिए फिक्रमंद रहें। यह फिक्र किसी डर या खौफ की वजह से नहीं, बल्कि अल्लाह पर मुकम्मल तवक्कुल (भरोसा) और मोहब्बत की बुनियाद पर होनी चाहिए। जब हम अपनी औलाद को रब के सुपुर्द कर देते हैं, तो हमारा दिल हर तरह की बेचैनी से आज़ाद हो जाता है।
Hifazat Ka Matlab Islam Mein
औलाद की हिफ़ाज़त का मतलब सिर्फ उन्हें बीमारियों या चोट से बचाना नहीं है। असल हिफ़ाज़त यह है कि उन्हें बुरी सोहबत, नज़र-ए-बद, शैतानी वसवसों और अख्लाकी बुराइयों से महफूज़ रखा जाए। एक मुसलमान होने के नाते हमारा यकीन है कि असल मुहाफिज़ (Protecting entity) सिर्फ अल्लाह की ज़ात है। हमारा काम सिर्फ मसनून दुआओं के ज़रिए उन्हें अल्लाह की पनाह में देना है।
Masnoon Dua for Aulaad Ki Hifazat
North Indian Muslim society में औलाद की हिफ़ाज़त के लिए सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली और मुस्तनद (Authentic) दुआ वही है, जिसे अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) अपने नवासे हज़रत हसन और हज़रत हुसैन (रज़िअल्लाहु अन्हुमा) के लिए पढ़ा करते थे।
Arabic Dua:
أُعِيذُكَ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لَامَّةٍ
तलफ़्फ़ुज़ (Devanagari):
उईज़ुका बिकलिमातिल्लाहित-ताम्मति, मिन कुल्लि शैतानिंव-व-हाम्मतिन, व-मिन कुल्लि ऐनिल-लाम्मतिन।
Roman (Hinglish):
Ueezu-ka bi-kalimatillaahit-taammati, min kulli shaytanin wa haammatin, wa min kulli aynin laammatin.
तर्जुमा (Hindi Translation):
“मैं तुझे अल्लाह के पूरे कलाम (words) की पनाह में देता हूँ, हर शैतान से, हर ज़हरीले जानवर से और हर नुकसान पहुँचाने वाली (बुरी) नज़र से।”
मस्दर (Source):
यह दुआ सहीह बुखारी (हदीस नम्बर: 3371) से साबित है और बच्चों की हिफ़ाज़त के लिए सबसे जामे (complete) दुआ मानी जाती है।
Yeh Dua Kab Aur Kaise Padhi Jaye
इस दुआ को अपनी रोज़ाना की आदत (Daily Routine) में शामिल करना बहुत मुफीद है। यहाँ कुछ आसान तरीके दिए गए हैं:
- Subah aur Shaam: दिन की शुरुआत और इख्तिताम (end) पर यह दुआ पढ़कर बच्चों पर दम करें।
- Ghar se nikalte waqt: जब बच्चा स्कूल या बाहर खेलने जाए, तो उसे अल्लाह की पनाह में देने के लिए यह दुआ पढ़ें।
- Sote waqt: रात को सोते समय यह दुआ पढ़ना बच्चों को डरावने ख्वाबों और बेचैनी से महफूज़ रखता है।
- Nazar-e-Bad ke waqt: अगर बच्चा बिना वजह चिड़चिड़ा हो रहा हो या उसकी तबीयत नासाज़ हो, तो यह दुआ पढ़कर फूँक मारना सुन्नत है।
एक अहम बात: अगर आप एक लड़के के लिए दुआ कर रहे हैं तो ‘उईज़ुका’ कहें, लड़की के लिए ‘उईज़ुकी’ और एक से ज़्यादा बच्चों के लिए ‘उईज़ुकुमा’ कहना चाहिए।
Hifazat Sirf Dua Se Nahin
दुआ के साथ-साथ अमल और तदबीर भी ज़रुरी है। बच्चों की हिफ़ाज़त की दुआ मांगने के साथ वालिदैन को चाहिए कि उन्हें अच्छे और बुरे की तमीज़ सिखाएं और उनके आस-पास के माहौल को पाकीज़ा रखें। जब एक मुसलमान अपनी तरफ से पूरी कोशिश करता है और फिर अल्लाह से दुआ करता है, तो यह अमल अल्लाह की बारगाह में ज़्यादा मक़बूल होता है।
Short Parent-Focused Q&A
Kya bachchon par phoonk kar padh sakte hain?
जी हाँ, हदीस के मुताबिक नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) दुआ पढ़कर बच्चों पर दम फरमाया करते थे। यह रूहानी शिफा का ज़रिया है।
Agar bachcha door ho to dua kaise karein?
अल्लाह हर जगह हाज़िर-ओ-नाज़िर है। अगर आपका बच्चा सफर में है या दूर है, तब भी आप नियत करके यह दुआ पढ़ सकते हैं। अल्लाह की हिफ़ाज़त की कोई सरहद नहीं होती।
Kya ye dua sote waqt padhna theek hai?
बिल्कुल, सोते वक्त यह दुआ पढ़ने से बच्चा रात भर शैतानी शर और तकलीफों से अल्लाह की अमानत में रहता है।
अमानत को रब के हवाले करना
वालिदैन की हैसियत से हम सिर्फ ज़ाहिरी तौर पर कोशिश कर सकते हैं, लेकिन असल हिफ़ाज़त करने वाली ज़ात अल्लाह की है। अपने दिल में पूरा यकीन रखें और अपनी अमानत को अल्लाह के हवाले कर दें। जब आपका भरोसा अल्लाह पर मज़बूत होता है, तो वह आपकी औलाद की हर हाल में निगहबानी फरमाता है।


