Istikhara Ki Dua In Hindi | इस्तिख़ारा करने का सुन्नत तरीक़ा और दुआ

By Rokaiya

istikhara ki dua

Quick Summary

Dua Name

Istikhara Ki Dua

Arabic Text

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْتَخِيرُكَ بِعِلْمِكَ وَأَسْتَقْدِرُكَ بِقُدْرَتِكَ، وَأَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ الْعَظِيمِ، فَإِنَّكَ تَقْدِرُ وَلاَ أَقْدِرُ وَتَعْلَمُ وَلاَ أَعْلَمُ وَأَنْتَ عَلاَّمُ الْغُيُوبِ، اللَّهُمَّ إِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الأَمْرَ خَيْرٌ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي فَاقْدُرْهُ لِي وَيَسِّرْهُ لِي ثُمَّ بَارِكْ لِي فِيهِ، وَإِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الأَمْرَ شَرٌّ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي فَاصْرِفْهُ عَنِّي وَاصْرِفْنِي عَنْهُ، وَاقْدُرْ لِي الْخَيْرَ حَيْثُ كَانَ ثُمَّ أَرْضِنِي بِهِ

Hindi Transliteration

अल्लाहुम्मा इन्नी अस्तख़ीरुका बि-इल्मिका व अस्तक़दिरुका बि-क़ुदरतिका व अस-अलुका मिन फ़ज़लिकल अज़ीम, फ़-इन्नका तक़दिरु व ला अक़दिरु, व ता'लमु व ला आ'लमु, व अन्ता अल्लामुल ग़ुयूब। अल्लाहुम्मा इन कुन्ता ता'लमु अन्ना हाज़ल अम्र ख़ैरुल-ली फ़ी दीनी व म-आशी व आक़िबति अमरी फ़क़दुरहू ली व यस्सिरहू ली सुम्मा बारिक ली फ़ीह, व इन कुन्ता ता'लमु अन्ना हाज़ल अम्र शर्रुल-ली फ़ी दीनी व म-आशी व आक़िबति अमरी फ़स्रिफ़हू अन्नी वस्रिफ़्नी अन्हु वक़दुर लियल ख़ैर हैसु काना सुम्मा अर्ज़िनी बिह।

English Transliteration

Allahumma inni astakhiruka bi ‘ilmika, wa astaqdiruka bi qudratika, wa as’alu ka min fadlika al-‘azim, fa innaka taqdiru wa la aqdiru, wa ta’lamu wa la a’lamu, wa anta ‘allamul-ghuyub. Allahumma in kunta ta’lamu anna hadhal amra khairun li fi deeni wa ma’ashi wa ‘aqibati amri faqdurhu li wa yassirhu li, thumma barik li fihi, wa in kunta ta’lamu anna hadhal amra sharrun li fi deeni wa ma’ashi wa ‘aqibati amri fasrifhu ‘anni wasrifni ‘anhu, waqdur li al-khaira haithu kana thumma radh-dhinee bihi.

Source

Sahih Bukhari: 1162

ज़िंदगी में अक्सर ऐसे मवाक़े (मोड़) आते हैं जब समझ नहीं आता कि कौन सा रास्ता इख़्तियार किया जाए। चाहे बात किसी अच्छे रिश्ते (निकाह) की हो, नए कारोबार का आग़ाज़ हो या किसी नए शहर में जॉब का फ़ैसला, इंसान हमेशा उलझन में रहता है। ऐसी शक-ओ-शुबहात की सूरत में अल्लाह ताला से ख़ैर तलब करने (मदद मांगने) का नाम इस्तिख़ारा है।

अगर आप Istikhara ki dua और इसे करने का सही सुन्नत तरीक़ा तलाश कर रहे हैं, तो नीचे दी गई मुकम्मल गाइड आपकी मदद करेगी।


इस्तिख़ारा करने का सुन्नत तरीक़ा (Step-by-Step Guide)

इस्तिख़ारा का तरीक़ा निहायत सादा और आसान है। इसे आप ख़ुद अपने घर पर किसी भी वक़्त (मकरूह औक़ात को छोड़कर) कर सकते हैं। गूगल पर अक्सर लोग इसका सही तरीक़ा ढूंढते हैं, जो इस तरह है:

  1. ताज़ा वज़ू करें: सबसे पहले पाकीज़गी हासिल करने के लिए अच्छी तरह सुन्नत के मुताबिक़ वज़ू करें।
  2. दो रकात नफ़्ल नमाज़ पढ़ें: इस्तिख़ारा की नीयत से दो रकात नफ़्ल नमाज़ अदा करें। (सुन्नत यह है कि पहली रकात में सूरह फ़ातिहा के बाद ‘सूरह काफ़िरून’ और दूसरी रकात में ‘सूरह इख़लास’ पढ़ें)।
  3. अल्लाह की हम्द-ओ-सना: नमाज़ मुकम्मल करने के बाद वहीं क़िबला रुख़ बैठ जाएं। पहले अल्लाह की तारीफ़ बयान करें और नबी-ए-करीम ﷺ पर दुरूद शरीफ़ (दुरूद-ए-इब्राहीमी) भेजें।
  4. इस्तिख़ारा की दुआ पढ़ें: इसके बाद मुकम्मल यक़ीन और तवज्जो (एकाग्रता) के साथ इस्तिख़ारा की मसनून दुआ पढ़ें।
  5. अपने मक़सद का तसव्वुर: दुआ में जब अरबी लफ़्ज़ “हाज़ल-अमरा” (هَذَا الأَمْرَ) आए, तो उस ख़ास काम या फ़ैसले का दिल में तसव्वुर करें जिसके लिए आप इस्तिख़ारा कर रहे हैं।

इस्तिख़ारा की मसनून दुआ (Istikhara Ki Dua In Arabic, Roman & Hindi)

नीचे दी गई दुआ वही है जो नबी-ए-करीम ﷺ ने सहाबा-ए-कराम को सिखाई थी। इसे पूरे यक़ीन के साथ पढ़ें:

Arabic:

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْتَخِيرُكَ بِعِلْمِكَ وَأَسْتَقْدِرُكَ بِقُدْرَتِكَ، وَأَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ الْعَظِيمِ، فَإِنَّكَ تَقْدِرُ وَلاَ أَقْدِرُ وَتَعْلَمُ وَلاَ أَعْلَمُ وَأَنْتَ عَلاَّمُ الْغُيُوبِ، اللَّهُمَّ إِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الأَمْرَ خَيْرٌ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي فَاقْدُرْهُ لِي وَيَسِّرْهُ لِي ثُمَّ بَارِكْ لِي فِيهِ، وَإِنْ كُنْتَ تَعْلَمُ أَنَّ هَذَا الأَمْرَ شَرٌّ لِي فِي دِينِي وَمَعَاشِي وَعَاقِبَةِ أَمْرِي فَاصْرِفْهُ عَنِّي وَاصْرِفْنِي عَنْهُ، وَاقْدُرْ لِيَ الْخَيْرَ حَيْثُ كَانَ ثُمَّ أَرْضِنِي بِهِ

Hindi:

अल्लाहुम्मा इन्नी अस्तख़ीरुका बि-इल्मिका, व अस्तक़दिरुका बि-क़ुदरतिका, व अस्अलुका मिन फ़ज़्लिकल-अज़ीम। फ़-इन्नका तक़दिरु व ला अक़दिरु, व तअलमु व ला अअलमु, व अन्ता अल्लामुल-ग़ुयूब। अल्लाहुम्मा इन कुन्ता तअलमु अन्ना हाज़ल-अमरा ख़ैरुल-ली फ़ी दीनी व मआशी व आक़ि़बति अमरी, फ़क़दुरहु ली व यस्सिरहु ली सु़म्मा बारिक ली फ़ीहि। व इन कुन्ता तअलमु अन्ना हाज़ल-अमरा शर्रुल-ली फ़ी दीनी व मआशी व आक़ि़बति अमरी, फ़सरिफ़हु अन्नी वसरिफ़नी अन्हु, वक़दुर लियल-ख़ैरा हैसु़ काना सु़म्मा अरज़िनी बिह।

Roman:

Allahumma inni astakhiruka bi-ilmika, wa astaqdiruka bi-qudratika, wa as’aluka min fadlikal-azim. Fa-innaka taqdiru wala aqdiru, wa ta’lamu wala a’lamu, wa Anta Allamul-ghuyub. Allahumma in kunta ta’lamu anna hazal-amra khairun li fi dini wa ma’ashi wa aqibati amri, faqdurhu li wa yassirhu li thumma barik li fih. Wa in kunta ta’lamu anna hazal-amra sharrun li fi dini wa ma’ashi wa aqibati amri, fasrifhu anni wasrifni anhu, waqdur liyal-khaira haisu kana thumma ardini bih.

तर्जुमा / मत्लब:

“ऐ अल्लाह! मैं तेरे इल्म की मदद से ख़ैर मांगता हूँ और तेरी क़ुदरत के ज़र्ये से ताक़त मांगता हूँ। मैं तेरे अज़ीम फ़ज़ल का सवाली हूँ। बेशक तू क़ुदरत रखता है और मैं बेबस हूँ, तू जानता है और मैं नहीं जानता, और तू तमाम ग़ैब की बातों को जानने वाला है। ऐ अल्लाह! अगर तू जानता है कि ये काम (यहाँ अपने काम का तसव्वुर करें) मेरे दीन, मेरी दुनिया और मेरे अंजाम के ऐतबार से बेहतर है, तो इसे मेरे नसीब में कर दे और मेरे लिए इसे आसान कर दे, फिर मेरे लिए इसमें बरकत अता फ़रमा। और अगर तू जानता है कि ये काम मेरे दीन, मेरी दुनिया और मेरे अंजाम के ऐतबार से मेरे हक़ में बुरा (शर) है, तो इसे मुझसे दूर कर दे और मुझे इससे फेर दे, और जहाँ भी मेरे लिए ख़ैर हो, वो मेरे नसीब में कर दे, फिर मुझे उस पर राज़ी कर दे।” (हवाला: सहीह बुख़ारी, हदीस 1162)


इस्तिख़ारा का नतीजा कैसे मालूम होता है?

ज़्यादातर लोग समझते हैं कि इस्तिख़ारा के बाद कोई ख़्वाब आएगा या आसमान से कोई इशारा मिलेगा। असल में, इस्तिख़ारा का नतीजा आपके दिल के रुझान और हालात की तब्दीली में छुपा होता है।

अगर दुआ के बाद आपका दिल उस काम की तरफ़ मुतमईन (संतुष्ट) होने लगे और रास्ते आसान होते जाएं, तो समझ लें कि उसमें ख़ैर है। लेकिन अगर उस काम में रुकावटें आने लगें या आपका दिल उस काम से उचाट हो जाए (हट जाए), तो ये इस बात की अलामत (निशानी) है कि अल्लाह ताला आपको उस काम से दूर रखना चाहता है।


इस्तिख़ारा से जुड़ी आम ग़लतफ़हमियां

हमारे मुआशरे (समाज) में इस्तिख़ारा को लेकर कुछ बातें मशहूर हैं जिनका शरीयत से कोई ताल्लुक़ नहीं है:

  • “ख़्वाब आना लाज़िमी है”: लोग सोचते हैं कि अगर हरा या सफ़ेद रंग दिखा तो काम ठीक है, और लाल या काला दिखा तो ग़लत। शरीयत में इसकी कोई बुनियाद नहीं है।
  • “किसी और से इस्तिख़ारा करवाना”: बहुत से लोग ख़ुद दुआ करने के बजाय किसी आलिमे-दीन या बुज़ुर्ग से इस्तिख़ारा करवाते हैं। सुन्नत तरीक़ा यह है कि जिस इंसान को ज़रूरत हो, वह ख़ुद अल्लाह से दुआ करे।
  • “सिर्फ़ निकाह के लिए इस्तिख़ारा”: लोग इसे सिर्फ़ रिश्तों तक महदूद रखते हैं, जबकि जॉब, सफ़र और हर छोटे-बड़े जायज़ फ़ैसले के लिए इस्तिख़ारा किया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सवाल 1: क्या ख़्वातीन (औरतें) ख़ुद इस्तिख़ारा कर सकती हैं?
जवाब: जी हाँ, बिल्कुल। ख़्वातीन अपने किसी भी फ़ैसले के लिए ख़ुद नफ़्ल नमाज़ पढ़ कर इस्तिख़ारा की दुआ कर सकती हैं।

सवाल 2: क्या एक ही फ़ैसले के लिए बार-बार इस्तिख़ारा कर सकते हैं?
जवाब: जी हाँ, अगर एक बार में दिल को इत्मीनान हासिल न हो, तो आप इसे दोबारा या कई बार दोहरा सकते हैं, जब तक कि आपका दिल किसी एक तरफ़ जम न जाए (आमतौर पर उलेमा 7 दिन तक करने का मशवरा देते हैं)।


अल्लाह पर कामिल तवक्कुल (भरोसा)

इस्तिख़ारा करने का मत्लब यह नहीं कि हम जद्दोजहद (कोशिश) करना छोड़ दें। हमें चाहिए कि तजुर्बेकार लोगों से मशवरा भी करें और फिर अल्लाह से ख़ैर की दुआ मांगें। जब आप Istikhara Ki Dua पढ़ लेते हैं, तो आपने अपना मामला उस ज़ात के सुपुर्द कर दिया जो सबसे बेहतर फ़ैसला करने वाली है।

अल्लाह ताला हमारे हर फ़ैसले में ख़ैर और बरकत अता फ़रमाए। आमीन।