Ghusl Ki Dua | ग़ुस्ल की दुआ : सुन्नत से पाकीज़गी हासिल करें

Quick Guide
मुख़्तसर रहनुमाई

ग़ुस्ल की नीयत

نَوَيْتُ أَنْ أَغْتَسِلَ مِنْ غُسْلِ لِرَفْعِ الْحَدَثِ
तलफ़्फ़ुज़:
Nawaitu an aqtasila min ghusli li raf‘il hadath
तर्जुमा:
मैंने नीयत की कि ग़ुस्ल करके नापाकी को दूर करूंगा/करूंगी।
मसदर: 
फिक़्ह की किताबें
ghusl ki dua

Table of Content

Ghusl Kya Hai Aur Kyun Zaroori Hai | ग़ुस्ल क्या है और क्यों ज़रूरी है

इस्लाम में पाकी और सफ़ाई को बहुत ऊंचा मक़ाम दिया गया है। ‘ग़ुस्ल’ (Ghusl) का आसान मतलब है पूरे जिस्म को इस तरह धोना कि बदन का कोई भी हिस्सा सूखा न रहे। यह सिर्फ़ मेल-कुचैल साफ़ करना नहीं है, बल्कि यह एक इबादत है, जिससे एक मुसलमान नापाकी (Impurity) से निकलकर पाकी हासिल करता है।

कुछ ख़ास मौक़ों पर ग़ुस्ल करना ‘फ़र्ज़’ होता है, जैसे जनाबत (Janabat) के बाद, या ख़्वातीन (women) के लिए माहवारी (periods) और निफ़ास से फ़ारिग़ होने के बाद। इसके अलावा जुमे की नमाज़ और ईद के लिए ग़ुस्ल करना सुन्नत है और इसकी बड़ी फ़ज़ीलत है।


Kya Ghusl Ke Liye Koi Khaas Dua Hai? | क्या ग़ुस्ल के लिए कोई ख़ास दुआ है?

यह बात समझना बहुत ज़रूरी है कि हदीस में Ghusl Ki Dua के नाम से कोई मख़सूस (ख़ास) दुआ साबित नहीं है जो नहाते वक़्त पढ़नी ज़रूरी हो।

अक्सर लोग इंटरनेट पर “ग़ुस्ल की दुआ” तलाश करते हैं, लेकिन सही इल्म यह है कि ग़ुस्ल की बुनियाद “नीयत” (Intention) और “तरीक़े” (Method) पर है। जब आप पाकी हासिल करने के लिए ग़ुस्ल करते हैं, तो आपका इरादा और अल्लाह का नाम लेना ही काफ़ी होता है।

हालाँकि, बुज़ुर्गों और उलमा ने नीयत को पक्का करने के लिए कुछ अल्फाज़ बताए हैं, जिन्हें आप पढ़ सकते हैं। नीचे हम नीयत और ग़ुस्ल के बाद की सुन्नत दुआ दे रहे हैं।


Ghusl Ki Niyyat Aur Dua | ग़ुस्ल की नीयत और दुआ

1. ग़ुस्ल शुरू करने की नीयत (Ghusl Ki Niyyat)

यह दुआ ग़ुस्ल शुरू करने से पहले पढ़ी जाती है। इसे ज़ुबान से कहना ज़रूरी नहीं, दिल में सोचना काफ़ी है। लेकिन अगर आप ज़ुबान से कहना चाहें तो यह पढ़ सकते हैं:

LanguageText
Arabic (अरबी)نَوَيْتُ الْغُسْلَ لِرَفْعِ الْحَدَثِ
Hindi Talaffuz (हिंदी तलफ़्फ़ुज़)नवैतुल ग़ुस्ल लि-रफ़-इल हदस
Roman EnglishNawaitul Ghusla Li-Raf’il Hadath
Tarjuma (तर्जुमा)मैंने नापाकी दूर करने के लिए ग़ुस्ल की नीयत की।
MeaningI intend to perform Ghusl to remove impurity.

(नोट: नीयत के बाद “बिस्मिल्लाह” पढ़कर ग़ुस्ल शुरू करें)

2. ग़ुस्ल के बाद की दुआ (After Ghusl Dua)

जब आप नहाकर फ़ारिग़ हो जाएं (कपड़े पहन लें या बाथरूम से बाहर आ जाएं), तो यह दुआ पढ़ना सुन्नत है। यह वही दुआ है जो वुज़ू के बाद पढ़ी जाती है (कलमा शहादत)। इससे गुनाह माफ़ होते हैं।

LanguageText
Arabic (अरबी)أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
Hindi Talaffuz (हिंदी तलफ़्फ़ुज़)अश-हदु अल्ला इलाह इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीक लहू, व अश-हदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुह
Roman EnglishAsh-hadu an la ilaha illallahu wahdahu la sharika lahu, wa ash-hadu anna Muhammadan ‘abduhu wa rasuluhu
Tarjuma (तर्जुमा)मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) उसके बंदे और रसूल हैं।
MeaningI bear witness that there is no god but Allah, alone without any partner, and I bear witness that Muhammad (PBUH) is His servant and Messenger.

Ghusl Karne Ka Masnoon Tareeqa | ग़ुस्ल करने का मसनून तरीक़ा

सही तरीक़े से ग़ुस्ल करने पर ही मुकम्मल पाकी हासिल होती है। इसका मसनून और आसान तरीक़ा यह है:

  1. नीयत और हाथ धोना: सबसे पहले दिल में नीयत करें और अपने दोनों हाथों को पहुँचों (wrists) तक तीन बार धोएं।
  2. इस्तिंजा (Istinja): जिस्म पर जहाँ भी गंदगी लगी हो, उसे धोएं और इस्तिंजा करें।
  3. वुज़ू (Wuzu): फिर वैसा ही वुज़ू करें जैसा नमाज़ के लिए करते हैं।
  4. पानी बहाना: पहले अपने सर पर पानी डालें, फिर दाएं (right) कंधे पर और फिर बाएं (left) कंधे पर पानी बहाएं।
  5. पूरा जिस्म: आख़िर में पूरे जिस्म पर पानी इस तरह बहाएं कि बाल बराबर जगह भी सूखी न रहे

Aksar Hone Wali Galtiyan | अक्सर होने वाली ग़लतियाँ

जानकारी न होने की वजह से लोग ग़ुस्ल में कुछ ग़लतियाँ करते हैं, जिन्हें दुरुस्त करना ज़रूरी है:

  • ख़ुद से दुआ बना लेना: कुछ लोग अपनी तरफ़ से कोई भी अरबी अल्फाज़ पढ़ते रहते हैं। ऐसा करना सही नहीं है, सुन्नत तरीक़े पर अमल करें।
  • कुल्ली और नाक में पानी न डालना: ग़ुस्ल में मुँह भरकर कुल्ली (Gargle) करना और नाक की नरम हड्डी तक पानी पहुँचाना फ़र्ज़ है। अगर यह छूट गया तो ग़ुस्ल नहीं होगा।
  • अटैच्ड बाथरूम में दुआ पढ़ना: अगर टॉयलेट और बाथरूम साथ में हैं, तो ज़ुबान से दुआ या बिस्मिल्लाह न बोलें, दिल में पढ़ें।
  • पानी का इसराफ़: बहुत ज़्यादा पानी बहाना इस्लाम में पसंदीदा नहीं है। ज़रूरत के मुताबिक़ पानी इस्तेमाल करें।

Zaruri Sawal Jawab (FAQ)

सवाल: क्या बिना किसी दुआ के ग़ुस्ल हो जाता है?

जवाब: जी हाँ, बिल्कुल। अगर आपने नीयत की है और सही तरीक़े से पानी बहाया है (कुल्ली और नाक में पानी डालने के साथ), तो आपका ग़ुस्ल मुकम्मल हो गया।

सवाल: क्या मर्द और औरत के ग़ुस्ल के तरीक़े में फ़र्क़ है?

जवाब: बुनियादी तरीक़ा (फ़र्ज़) दोनों के लिए एक ही है। बस ख़्वातीन को बालों की जड़ों (roots) तक पानी पहुँचाने का ख़ास ख़याल रखना चाहिए। अगर बाल गुंधे हुए (plaited) हों तो भी जड़ों का गीला होना ज़रूरी है।

सवाल: अगर ग़ुस्ल के बाद याद आए कि बदन का कोई हिस्सा सूखा रह गया था?

जवाब: तो दोबारा पूरा नहाने की ज़रूरत नहीं है। बस उसी सूखे हिस्से को धो लेना काफ़ी है।


सफ़ाई, नीयत और इबादत

ग़ुस्ल सिर्फ़ शरीर धोने का नाम नहीं, बल्कि यह एक रूहानी अमल है। जब हम अल्लाह के हुक्म के मुताबिक़ पाकी हासिल करते हैं, तो यह हमारे लिए सवाब का ज़रिया बन जाता है।

इसलिए “ग़ुस्ल की दुआ” तलाश करने से ज़्यादा ज़रूरी है कि हम अपनी “नीयत” को ख़ालिस रखें और उस तरीक़े को अपनाएं जो हमारे प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने सिखाया है।

अल्लाह हम सबको पाकी और सफ़ाई का एहतमाम करने की तौफ़ीक़ दे। (आमीन)