Hifazat Ki Dua | हर तरह की हिफ़ाज़त के लिए दुआ

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मुख़्तसर रहनुमाई

हर तरह की हिफ़ाज़त के लिए दुआ

اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ ۚ لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ ۚ لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ مَنْ ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِنْدَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ ۚ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۖ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ ۚ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ ۖ وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا ۚ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ
तलफ़्फ़ुज़:
अल्लाहु ला इला-ह इल्ला हुवल हय्युल क़य्यूम, ला तअ-ख़ुज़ुहू सिनतुंव-वला नौम, लहू मा फ़िस्समावाति वमा फ़िल अर्द, मन ज़ल्लज़ी यश्फ़अु इन्दहू इल्ला बि-इज़निह, यअलमु मा बैना अैदीहिम वमा ख़ल्फ़हुम, वला युहीतूना बिशैइम-मिन इल्मिही इल्ला बिमा शा-अ, वसिअ कुरसिय्युहुस् समावाति वल अर्द, वला यऊदुहू हिफ़्ज़ुहुमा वहुवल अलिय्युल अज़ीम।
तर्जुमा:
अल्लाह, जिसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह ज़िंदा है और सबको सँभालने वाला है। उसे न ऊंघ आती है न नींद। जो कुछ आसमानों और ज़मीन में है, सब उसी का है। कौन है जो उसकी इजाज़त के बिना उसके पास सिफ़ारिश कर सके? वह जानता है जो कुछ उनके सामने है और जो कुछ उनके पीछे है। और वे उसके इल्म में से किसी चीज़ का अहाता नहीं कर सकते, सिवाय उसके जितना वह चाहे। उसकी कुर्सी आसमानों और ज़मीन को घेरे हुए है, और उनकी हिफ़ाज़त उसे थकाती नहीं। वह बहुत बुलंद और अज़ीम है।
मसदर: 
Surah Al-Baqarah, Ayat: 255 (Ayatul Kursi) | Sahih Bukhari: 2311
hifazat ki dua main

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ज़िंदगी के सफ़र में इंसान कई तरह के हालात से गुज़रता है। कभी सब कुछ ठीक होता है, तो कभी अचानक आने वाली परेशानियां या अनजाने डर उसे बेचैन कर देते हैं। इस्लाम हमें सिखाता है कि हम अपनी कोशिशों के साथ-साथ हमेशा अल्लाह की पनाह मांगें। यह एहसास कि अल्लाह हमारे साथ है और वही सबसे बड़ा हिफ़ाज़त करने वाला है, इंसान के दिल को एक अजीब सा सुकून और हौसला देता है।

Insaan Aur Hifazat Ki Zarurat

इंसानी ज़िंदगी में हर लम्हा यक़ीनी नहीं होता। हम कल के बारे में नहीं जानते और न ही आने वाली मुश्किलों का हमें अंदाज़ा होता है। चाहे वह जिस्मानी नुक़सान हो, माली परेशानी हो या ज़हनी बेचैनी, इंसान हर मोड़ पर बेबस महसूस कर सकता है। Hifazat ki dua असल में अपनी इसी बेबसी को अल्लाह के सामने पेश करने का नाम है। जब हम अल्लाह से हिफ़ाज़त मांगते हैं, तो हम यह मान लेते हैं कि कोई भी ताक़त अल्लाह की मर्ज़ी के बिना हमें नुक़सान नहीं पहुँचा सकती। यह सोच हमें डर और ख़ौफ़ से आज़ाद करती है।

Hifazat Ka Matlab Sirf Bachav Nahi

अक्सर लोग हिफ़ाज़त का मतलब सिर्फ़ हादसों या बीमारियों से बच जाना समझते हैं। लेकिन दीन की रोशनी में हिफ़ाज़त का दायरा बहुत बड़ा है। हिफ़ाज़त का मतलब दिल का सुकून भी है, ताकि मुश्किल वक़्त में इंसान टूटे नहीं। इसका मतलब अल्लाह की रहमत के साये में होना है, जिससे इंसान का ईमान महफ़ूज़ रहे। जब हम अल्लाह के हवाले अपनी ज़िंदगी कर देते हैं, तो वह हमें न सिर्फ़ ज़ाहिरी नुक़सान से बचाता है बल्कि हमारे अंदर एक मज़बूत भरोसा पैदा कर देता है।

Masnoon Duas Jo Hifazat Ke Liye Padhi Ja Sakti Hain

उत्तर भारत (North India) में हिफ़ाज़त के लिए आयतुल कुर्सी और मसनून दुआएं बहुत मशहूर हैं। ये दुआएं रसूले करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत से साबित हैं और हर तरह के नुक़सान से पनाह के लिए मुस्तनद (authentic) ज़रिया हैं।

Arabic Dua

اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ ۚ لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ ۚ لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ مَنْ ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِنْدَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ ۚ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۖ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ ۚ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ ۖ وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا ۚ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ

तलफ़्फ़ुज़

Hindi

अल्लाहु ला इला-ह इल्ला हुवल हय्युल क़य्यूम, ला तअ-ख़ुज़ुहू सिनतुंव-वला नौम, लहू मा फ़िस्समावाति वमा फ़िल अर्द, मन ज़ल्लज़ी यश्फ़अु इन्दहू इल्ला बि-इज़निह, यअलमु मा बैना अैदीहिम वमा ख़ल्फ़हुम, वला युहीतूना बिशैइम-मिन इल्मिही इल्ला बिमा शा-अ, वसिअ कुरसिय्युहुस् समावाति वल अर्द, वला यऊदुहू हिफ़्ज़ुहुमा वहुवल अलिय्युल अज़ीम।

Roman (Hinglish)

Allahu la ilaha illa huwal hayyul qayyum, la ta’khuzuhu sinatun wala nawm, lahu ma fissamawati wama fil ard, man zallazi yashfa’u ‘indahu illa bi-iznih, ya’lamu ma baina aidihim wama khalfahum, wala yuhituna bishai’im-min ‘ilmihi illa bima sha’a, wasi’a kursiyyuhus samawati wal ard, wala ya’uduhu hifzuhuma wahuwal ‘aliyul ‘azeem.

तर्जुमा

अल्लाह, जिसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह ज़िंदा है और सबको सँभालने वाला है। उसे न ऊंघ आती है न नींद। जो कुछ आसमानों और ज़मीन में है, सब उसी का है। कौन है जो उसकी इजाज़त के बिना उसके पास सिफ़ारिश कर सके? वह जानता है जो कुछ उनके सामने है और जो कुछ उनके पीछे है। और वे उसके इल्म में से किसी चीज़ का अहाता नहीं कर सकते, सिवाय उसके जितना वह चाहे। उसकी कुर्सी आसमानों और ज़मीन को घेरे हुए है, और उनकी हिफ़ाज़त उसे थकाती नहीं। वह बहुत बुलंद और अज़ीम है।

Masdar

Surah Al-Baqarah, Ayat: 255 (Ayatul Kursi) | Sahih Bukhari: 2311


Arabic Dua

بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ

तलफ़्फ़ुज़

Hindi

बिस्मिल्लाहिल्लज़ी ला यदुर्रु मअस्मिही शैऊन फ़िल अर्दि वला फ़िस्समाइ वहुवस् समीउल अलीम।

Roman (Hinglish)

Bismillahillazi la yadurru ma’asmihi shai’un fil ardi wa la fissama’i wa huwas-sami’ul ‘aleem.

तर्जुमा

अल्लाह के नाम के साथ, जिसके नाम की बरकत से ज़मीन और आसमान में कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुँचा सकती, और वही सब कुछ सुनने वाला और जानने वाला है।

Masdar

Sunan Abi Dawud: 5088 (Sahih)

Dua Ke Saath Dil Ka Andaz

दुआ सिर्फ़ अल्फ़ाज़ को दोहराने का नाम नहीं है, बल्कि यह दिल की एक कैफियत है। दुआ मांगते वक़्त मुकम्मल यक़ीन होना चाहिए कि अल्लाह सुन रहा है और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। जब तक दिल में तवक्कुल यानी अल्लाह पर पूरा भरोसा न हो, तब तक इंसान को वह दिली सुकून नहीं मिलता जिसकी उसे तलाश होती है। हमें बे-इख़्लासी और सिर्फ़ रस्मी तौर पर दुआ मांगने से बचना चाहिए। पूरे होश और दिल की हाज़िरी के साथ मांगी गई दुआ इंसान के अंदर की घबराहट को दूर कर देती है।

Rozmarrah Zindagi Mein Hifazat Ka Ehsaas

हिफ़ाज़त का एहसास पैदा करने के लिए ज़रूरी नहीं कि कोई ख़ास वक़्त ही मुक़र्रर किया जाए। सुब ह-शाम के अज़कार में इन दुआओं को शामिल करना सुन्नत है। जब आप घर से निकलें, तो अल्लाह का नाम लेकर निकलें। रात को सोते वक़्त जब आप पनाह मांगते हैं, तो आप अपनी रूह और जिस्म को अल्लाह की निगरानी में दे देते हैं। यह छोटी-छोटी आदतें हमें हर वक़्त अल्लाह की याद से जोड़े रखती हैं और हमें यह महसूस कराती हैं कि हम इस दुनिया में अकेले नहीं हैं।

Short FAQ

क्या हिफ़ाज़त की दुआ रोज़ पढ़ना ज़रूरी है?
जी हाँ, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सुब ह और शाम के वक़्त दुआएं पढ़ने की ताकीद फरमाई है। यह इंसान के लिए एक रूहानी ढाल की तरह काम करती हैं और उसे अल्लाह की याद में मसरूफ़ रखती हैं।

क्या अपनी ज़ुबान में अल्लाह से पनाह मांग सकते हैं?
बिल्कुल, अल्लाह हर ज़ुबान समझता है और वह दिलों के हाल से वाक़िफ़ है। मसनून दुआएं अफ़ज़ल हैं क्योंकि वे नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के अल्फ़ाज़ हैं, लेकिन आप अपनी ज़रूरत के मुताबिक़ अपनी मादरी ज़ुबान में भी अल्लाह से हिफ़ाज़त और रहमत की दरख़्वास्त कर सकते हैं।

आख़िरी बात

अल्लाह की पनाह में आना ही असल कामयाबी है। दुनिया के तमाम वसाईल अपनी जगह, लेकिन एक मोमिन का असली सहारा अल्लाह का ज़िक्र और उस पर भरोसा है। जब हम सिदक़-ए-दिल से अल्लाह की तरफ़ रुजू करते हैं, तो वह न सिर्फ़ हमें ज़ाहिरी और बातिनी शर से महफ़ूज़ रखता है, बल्कि हमारे दिल को वह इत्मीनान अता करता है जो किसी और चीज़ से मुमकिन नहीं।