Nikah Ki Dua In Hindi | निकाह के लिए मस्नून दुआ

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मुख़्तसर रहनुमाई

निकाह की दुआ

بَارَكَ اللَّهُ لَكَ وَبَارَكَ عَلَيْكَ وَجَمَعَ بَيْنَكُمَا فِي خَيْرٍ
तलफ़्फ़ुज़:
बारकल्लाहु लका व बारका अलैका व जमा-अ बैनकुमा फ़ी ख़ैर
तर्जुमा:
अल्लाह तुम्हें बरकत दे और तुम पर बरकत नाज़िल फ़रमाए और तुम दोनों को ख़ैर व भलाई के साथ (इत्तिफ़ाक़ से) रखे।
मसदर: 
सनन अबू दाऊद: 2130, जामिअ तिरमिज़ी: 1091 (सहीह)
nikah ki dua in hindi main

Table of Content

Nikah Aur Dua Ka Talluq

इस्लाम में निकाह महज़ एक समाजी समझौता नहीं है, बल्कि यह एक मुक़द्दस इबादत है। निकाह के ज़रिये दो इंसान अल्लाह की रज़ा के लिए एक नई ज़िंदगी का आग़ाज़ करते हैं। इस नए सफ़र की कामयाबी और ख़ुशहाली के लिए अल्लाह रब्बुल आलमीन से मदद माँगना निहायत ज़रूरी है।

निकाह के वक़्त और उसके बाद पढ़ी जाने वाली दुआएँ असल में अल्लाह की बारगाह में की जाने वाली वह आज़िज़ाना इल्तेजा हैं, जिसमें जोड़े के लिए बरकत, रहमत और आपस में मुहब्बत की दरख़्वास्त की जाती है। जब निकाह सुन्नत के मुताबिक़ और दुआओं के साये में होता है, तो उसमें अल्लाह की तरफ़ से सुकून और ख़ैर शामिल हो जाती है।

Nikah Ke Mauqe Par Kaunsi Duas Padhi Jati Hain

निकाह के मौक़े पर पढ़ी जाने वाली दुआएँ मुख़्तलिफ़ अंदाज़ की होती हैं। कुछ दुआएँ वह हैं जो निकाह के बाद दूल्हा और दुल्हन को मुबारकबाद देने के लिए पढ़ी जाती हैं, और कुछ वह जो दूल्हा ख़ुद अपनी अहलिया (पत्नी) के लिए पढ़ता है।

इन दुआओं का असल मक़सद नए जोड़े की आने वाली ज़िंदगी को शैतानी शर और आपसी इख़्तिलाफ़ात से बचाकर अल्लाह की पनाह में देना है। निकाह के वक़्त मौजूद घर वालों और मेहमानों को चाहिए कि वह सिर्फ़ रस्मी मुबारकबाद के बजाय उन अलफ़ाज़ का इस्तेमाल करें जो नबी-ए-करीम ﷺ से साबित हैं।

Masnoon Nikah Duas

निकाह के ताल्लुक़ से यहाँ दो ऐसी मोतबर और सहीह दुआएँ ज़िक्र की जा रही हैं जो सुन्नत से साबित हैं।

Arabic Dua

بَارَكَ اللَّهُ لَكَ وَبَارَكَ عَلَيْكَ وَجَمَعَ بَيْنَكُمَا فِي خَيْرٍ

तलफ़्फ़ुज़

Hindi

बारकल्लाहु लका व बारका अलैका व जमा-अ बैनकुमा फ़ी ख़ैर

Roman (Hinglish)

Barakallahu laka wa baraka alaika wa jama’a bainakuma fii khair

तर्जुमा

अल्लाह तुम्हें बरकत दे और तुम पर बरकत नाज़िल फ़रमाए और तुम दोनों को ख़ैर व भलाई के साथ (इत्तिफ़ाक़ से) रखे।

Masdar

सनन अबू दाऊद: 2130, जामिअ तिरमिज़ी: 1091 (सहीह)

nikah ki dua in hindi

Arabic Dua

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَهَا وَخَيْرَ مَا جَبَلْتَهَا عَلَيْهِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّهَا وَمِنْ شَرِّ مَا جَبَلْتَهَا عَلَيْهِ

तलफ़्फ़ुज़

Devanagari

अल्लाहुम्मा इन्नी अस्अलुका ख़ैराहा व ख़ैरा मा जबल्तहा अलैहि, व अऊज़ु बिका मिन शर्रिहा व मिन शर्रि मा जबल्तहा अलैहि

Roman (Hinglish)

Allahumma inni as’aluka khairaha wa khaira ma jabaltaha alaihi, wa a’uzu bika min sharriha wa min sharri ma jabaltaha alaihi

तर्जुमा

ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इसकी (अपनी अहलिया की) भलाई और उस फ़ितरत की भलाई माँगता हूँ जिस पर तूने इसे पैदा किया, और मैं इसकी बुराई और उस फ़ितरत की बुराई से तेरी पनाह माँगता हूँ जिस पर तूने इसे पैदा किया।

Masdar

सनन अबू दाऊद: 2160, सुनन इब्न माजाह: 1918 (हसन)

Dua Ka Andaz Aur Niyyat

दुआ सिर्फ़ अलफ़ाज़ को दोहराने का नाम नहीं है, बल्कि यह दिल की आवाज़ होनी चाहिए। निकाह की दुआ माँगते वक़्त दिल में इख़्लास और यह यक़ीन होना चाहिए कि सारी बरकतें और खुशियाँ सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में हैं। जब कोई शख़्स दूल्हा-दुल्हन के लिए दुआ करे, तो उसके दिल में उनके लिए सच्ची ख़ैरख़्वाही और नेक तमन्नाएँ होनी चाहिए।

अल्लाह पर कामिल भरोसा ही इंसान की दुआओं में तासीर पैदा करता है। यह दुआएँ एक मोमिन के लिए वह मज़बूत ढाल हैं जो उसकी इज़्दिवाजी ज़िंदगी (married life) को हर तरह की नहूसत से बचाकर अल्लाह की रहमत का ज़रिया बनाती हैं।

Ghar Walon Aur Mehmano Ke Liye Rehnumai

निकाह के दौरान मौजूद मेहमानों और रिश्तेदारों की यह ज़िम्मेदारी है कि वह सुन्नत का पास रखें। आम तौर पर लोग सिर्फ़ “मुबारक हो” कहकर ख़ामोश हो जाते हैं, लेकिन अगर सुन्नत दुआ “बारकल्लाहु लका…” पढ़ी जाए, तो यह ज़्यादा बेहतर और बाइस-ए-अजर है।

निकाह की तक़रीब में अदब का ख़याल रखना और शोर-शराबे या फ़ुज़ूल रस्मों से बचकर ज़िक्र व दुआ में मशगूल रहना रहमतों के नुज़ूल का सबब बनता है। मेहमानों को चाहिए कि वह दूल्हा और दुल्हन के हक़ में दिल से नेक दुआएँ करें ताकि उनका यह नया रिश्ता दीन और दुनिया दोनों लिहाज़ से कामियाब हो।

मुख़्तसर सवाल-जवाब

क्या निकाह के बाद भी यह दुआ पढ़ी जा सकती है?
जी हाँ, निकाह के फ़ौरन बाद और उसके बाद भी जब कभी आप नए जोड़े से मिलें या उनके लिए दुआ करना चाहें, तो मसनून दुआएँ पढ़ी जा सकती हैं। बरकत की दुआ किसी भी वक़्त की जा सकती है।

क्या अपनी ज़ुबान में निकाह के लिए दुआ माँगना जाइज़ है?
मसनून दुआएँ पढ़ना अफ़ज़ल और सुन्नत है क्योंकि उनके अलफ़ाज़ जामिअ होते हैं। हालांकि, अगर किसी को अरबी दुआ याद न हो, तो वह अपनी ज़ुबान (हिंदी, उर्दू वगैरह) में भी अल्लाह से ख़ैर व बरकत की दुआ माँग सकता है। अल्लाह हर ज़ुबान और दिल के हाल को जानता है।

आख़िरी बात

निकाह ज़िंदगी का एक निहायत ही अहम मोड़ है, जिसकी बुनियाद अगर सुन्नत और दुआओं पर रखी जाए, तो अल्लाह की रहमत ज़रूर शामिल-ए-हाल रहती है। मसनून दुआओं के ज़रिये हम अल्लाह से उस बरकत की उम्मीद करते हैं जो हमारे घरों को सुकून का गहवारा बना देती है। एक नेक शुरुआत ही एक नेक मुस्तक़बिल की ज़मानत है।