Shohar Ki Mohabbat Ki Dua | शौहर के दिल में मोहब्बत के लिए दुआ

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मुख़्तसर रहनुमाई

शौहर के दिल में मोहब्बत के लिए दुआ

رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًا
तलफ़्फ़ुज़:
रब्बना हब लना मिन अज़वाजिना व ज़ुर्रिय्यातिना कुर्रत अअ्युनिंव-वजअ़लना लिल मुत्तक़ीना इमामा।
तर्जुमा:
ऐ हमारे रब, हमें हमारी बीवियों (या शौहर) और औलाद की तरफ़ से आँखों की ठंडक अता फ़र्मा, और हमें नेक लोगों का पेशवा बना।
मसदर: 
Surah Al-Furqan, Ayat 74
shohar ki mohabbat ki dua main

Table of Content

Rishton Mein Mohabbat Aur Insaani Haalat

एक खुशहाल अज़दवाजी ज़िंदगी की बुनियाद मोहब्बत और एक दूसरे की इज़्ज़त पर होती है। लेकिन इंसानी ताल्लुकात हमेशा एक जैसे नहीं रहते। कभी काम की थकान, कभी ज़ेहनी दबाव या कभी सिर्फ़ वक़्त की कमी की वजह से मियाँ-बीवी के दरमियान एक ख़ामोशी सी आ जाती है। जब शौहर के रवैये में सख़्ती या बेरुखी महसूस होने लगे, तो एक बीवी के दिल में बेचैनी होना फ़ितरी है।

ऐसे वक़्त में घबराने या मायूस होने के बजाय अल्लाह की तरफ़ रुजू करना ही बेहतरीन रास्ता है। दुआ सिर्फ़ अल्फ़ाज़ का मजमुआ नहीं है, बल्कि यह उस रब से गुफ़्तगू है जो दिलों को फेरने की ताक़त रखता है। हम किसी इंसान को अपने बस में नहीं कर सकते, लेकिन अल्लाह से उनके दिल में अपने लिए नर्म-गोशा और सुकून मांग सकते हैं।

Islam Mohabbat Ko Kaise Dekhta Hai

इस्लाम में मियाँ-बीवी के रिश्ते को ‘मवद्दत’ और ‘रहम़त’ (मोहब्बत और रहम) का नाम दिया गया है। यह रिश्ता किसी ज़ोर-ज़बर्दस्ती या कंट्रोल पर मबनी नहीं है, बल्कि यह दो दिलों का मेल है जो अल्लाह की मर्ज़ी से होता है। इस्लाम हमें सिखाता है कि मोहब्बत एक तोहफ़ा है, और इस तोहफ़े की हिफ़ाज़त सब्र और नेक नीयत से की जाती है।

दुआ मांगते वक़्त हमारी नीयत किसी को मजबूर करना नहीं, बल्कि अपने घर में बरकत और शौहर के दिल में अल्लाह की तरफ़ से मोहब्बत पैदा करना होनी चाहिए। जब हम अल्लाह पर भरोसा करके दुआ करते हैं, तो हमारे अंदर ख़ुद-ब-ख़ुद एक इत्मीनान पैदा हो जाता है, जो हमारे रवैये को भी नर्म बना देता है।

Mohabbat Aur Sukoon Ke Liye Masnoon Duas

यहाँ वह कुरान-ए-करीम की दुआ दी जा रही है जो दिलों की गहराई से मोहब्बत और घर में सुकून मांगने के लिए निहायत हसीन है।

Arabic Dua

رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًا

तलफ़्फ़ुज़

रब्बना हब लना मिन अज़वाजिना व ज़ुर्रिय्यातिना कुर्रत अअ्युनिंव-वजअ़लना लिल मुत्तक़ीना इमामा।

Roman (Hinglish)

Rabbana hab lana min azwajina wa dhurriyatina qurrata a’yunin waj’alna lil-muttaqina imama.

तर्जुमा

ऐ हमारे रब, हमें हमारी बीवियों (या शौहर) और औलाद की तरफ़ से आँखों की ठंडक अता फ़र्मा, और हमें नेक लोगों का पेशवा बना।

Masdar

Surah Al-Furqan, Ayat 74


Arabic Dua

اللَّهُمَّ أَلِّفْ بَيْنَ قُلُوبِنَا وَأَصْلِحْ ذَاتَ بَيْنِنَا

तलफ़्फ़ुज़

अल्लाहुम्मा अल्लिफ़ बैना क़ुलूबिना व अस्लिह ज़ाता बैनिना।

Roman (Hinglish)

Allahumma allif baina qulubina wa aslih dhata bainina.

तर्जुमा

ऐ अल्लाह, हमारे दिलों में मोहब्बत डाल दे और हमारे दरमियान के ताल्लुकात को दुरुस्त कर दे।

Masdar

Sunan Abi Dawud (Sahih Hadith)

Dua Ke Saath Dil Ka Safar

दुआ की क़ुबूलियत के लिए सबसे पहले अपनी नीयत को साफ़ रखना ज़रूरी है। जब आप “Shohar ki mohabbat ki dua” करती हैं, तो साथ ही अपने अंदर सब्र का मादा भी पैदा करें। कभी-कभी इंसान दूसरों की तब्दीली चाहता है, लेकिन अपने लहजे और रवैये पर गौर करना भूल जाता है।

दुआ हमें इस बात का एहसास दिलाती है कि हर चीज़ अल्लाह के हाथ में है। इसलिए जब आप दुआ करें, तो उसमें कोई जल्दबाज़ी ना दिखाएं। अल्लाह हर दिल की पुकार सुनता है, मगर उसका एक वक़्त मुक़र्रर है। इस दरमियान अपने अख़लाक़ को बेहतर रखना और शौहर के हुक़ूक़ अदा करना भी एक तरह की इबादत है जो रिश्तों में नरमी लाती है।

Rozmarrah Zindagi Mein Mohabbat Ka Ehsaas

मोहब्बत सिर्फ़ दुआओं से नहीं, बल्कि रोज़ाना की छोटी-छोटी बातों से भी परवान चढ़ती है। शौहर और बीवी के बीच गुफ़्तगू एक पुल का काम करती है। अगर कभी बातचीत कम हो जाए, तो कोशिश करें कि नर्म लहजे में बात शुरू करें। इज़्ज़त एक ऐसा जज़्बा है जो किसी भी रिश्ते को टूटने से बचा सकता है।

शुक्र-गुज़ारी का आदी बनना भी दिलों को करीब लाता है। जब शौहर को यह एहसास होता है कि उसकी मेहनत और कोशिशों की घर में क़द्र की जा रही है, तो उसके दिल में बीवी के लिए ख़ुद-ब-ख़ुद मोहब्बत और एहतराम बढ़ जाता है। रिश्तों में सुकून तभी आता है जब दोनों तरफ़ से एक दूसरे की कमियों को नज़र-अंदाज़ करने का हौसला हो।

मुख़्तसर सवाल-जवाब

Kya dua se kisi ke jazbaat badle ja sakte hain?

दुआ अल्लाह से एक दरख़्वास्त है, कोई जादू या ज़बर्दस्ती का ज़रिया नहीं। अल्लाह दिलों का मालिक है और वही दिलों को फेरने वाला है। जब हम सच्ची नीयत से दुआ करते हैं, तो अल्लाह हालात को साज़गार बना देता है और दिलों में नरमी पैदा कर देता है, लेकिन यह सब अल्लाह की मशिक़त और हिकमत के मुताबिक़ होता है।

Agar shohar ki mohabbat kam lag rahi ho to dua ke saath kya soch rakhi jaye?

ऐसे वक़्त में सब्र और अल्लाह पर तवक्कुल (भरोसा) रखना सबसे बड़ी ताक़त है। यह याद रखें कि ज़िंदगी में आज़माइश आती रहती है। अपनी तरफ़ से अख़लाक़ और अदब को बरक़रार रखें और दुआ को एक उम्मीद के तौर पर देखें, ना कि किसी नतीजे की गारंटी के तौर पर। अल्लाह पर भरोसा रखें कि वह वही करेगा जो आपके हक़ में बेहतर होगा।

Aakhiri Baat

ज़िंदगी के इस सफ़र में मियाँ-बीवी का रिश्ता अल्लाह की एक बड़ी नियामत है। कभी इसमें धूप आती है तो कभी छाँव, लेकिन दुआ का हाथ थामने से दिल को हमेशा सुकून मिलता है। अल्लाह से हमेशा बरकत, रहमत और मोहब्बत की तलब रखें और सब्र के साथ अपने घर को जन्नत बनाने की कोशिश करें। बेशक, अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है और वही दिलों में उल्फ़त पैदा करने वाला है।