Tarbiyat Sirf Sikhaana Nahi Hoti
औलाद अल्लाह तआला की तरफ से एक कीमती अमानत है। जब हम ‘तरबियत’ की बात करते हैं, तो इसका मतलब सिर्फ नसीहतें देना या आदतों को सुधारना नहीं होता। असल तरबियत वह है जो बच्चे के दिल को अल्लाह से जोड़ दे। यह एक ऐसा एहसास है जो बच्चे के अख़्लाक़ और उसके रवैये में नज़र आता है।
एक वालिद और वालिदा के तौर पर हम अक्सर फिक्रमंद रहते हैं कि हमारे बच्चे का मुस्तक़बिल कैसा होगा और उसका इमान कितना मज़बूत होगा। हमें यह समझना होगा कि तरबियत एक रूहानी ताल्लुक है। जब घर का माहौल रहमत और सुकून वाला होता है, तो बच्चे का दिल खुद-ब-खुद भलाई की तरफ झुकने लगता है। यह हमारे अपने रवैये और अल्लाह पर हमारे भरोसे का नाम है।
Walidain Aur Dua Ka Rishta
तरबियत के इस सफ़र में कोशिश और दुआ एक साथ चलती हैं। हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश करते हैं कि उन्हें नेक बातें सिखाएं और अच्छा इंसान बनाएं, लेकिन दिलों को फेरने वाली ज़ात सिर्फ अल्लाह की है। दुआ दरअसल हमारी इसी आज़ज़ी का नाम है कि “ऐ अल्लाह, मेरी कोशिशें कम हैं, तू अपनी रहमत से मेरे बच्चे की हिफाज़त फरमा।”
दुआ कोई शॉर्टकट नहीं है, बल्कि यह अल्लाह पर मुकम्मल यकीन का इज़हार है। जब हम सब्र के साथ दुआ मांगते हैं, तो हमें खुद भी दिली सुकून मिलता है और हमारी घबराहट उमीद में बदल जाती है। अल्लाह तआला की बारगाह में की गई पुकार कभी जाया नहीं जाती, बस हमें यकीन और सब्र का दामन थामे रखना चाहिए।
Nek Tarbiyat Ke Liye Masnoon Duas
क़ुरआन करीम में पैग़ंबरों ने अपनी औलाद के लिए बहुत खूबसूरत दुआएं मांगी हैं। ये दुआएं हमें सिखाती हैं कि एक नेक औलाद के लिए अल्लाह से कैसे दरख़्वास्त करनी चाहिए।
Arabic Dua
رَبِّ اجْعَلْنِي مُقِيمَ الصَّلَاةِ وَمِن ذُرِّيَّتِي ۚ رَبَّنَا وَتَقَبَّلْ دُعَاءِ
तलफ़्फ़ुज़
रब्बि-जअ़लनी मुक़ीमस-सलाति व मिन ज़ुर्रिय्यती, रब्बना व तक़ब्बल दुआ-इ।
Roman (Hinglish)
Rabbi-j’alni muqeemas-salati wa min zurriyyati, Rabbana wa taqabbal du’a’.
तर्जुमा
ऐ मेरे रब, मुझे और मेरी औलाद को नमाज़ क़ायम करने वाला बना दे। ऐ हमारे रब, और मेरी दुआ क़बूल फरमा।
Masdar
सूरत इब्राहिम, आयत 40
Arabic Dua
رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًا
तलफ़्फ़ुज़
रब्बना हब लना मिन अज़वाजिना व ज़ुर्रिय्यातिना क़ुर्र-त अअ़-युनिंव-वज-अ़लना लिल-मुत्तक़ीना इमामा।
Roman (Hinglish)
Rabbana hab lana min azwajina wa zurriyyatina qurrata a’yunin waj’alna lil-muttaqeena imama.
तर्जुमा
ऐ हमारे रब, हमें हमारी बीवियों और हमारी औलाद से आंखों की ठंडक अता फरमा और हमें नेक लोगों का पेशवा (राह दिखाने वाला) बना।
Masdar
सूरत अल-फ़ुरक़ान, आयत 74
Dua Ke Saath Dil Ka Andaz
दुआ मांगते वक्त हमारे दिल का हाल बहुत मायने रखता है। अल्लाह के सामने अपनी कमियों को मानना और पूरी उमीद के साथ हाथ फैलाना ही असल दुआ है। यह सोचना कि “मैं अपने बच्चे को बदल दूँगा” एक बोझ बन सकता है, लेकिन यह यकीन रखना कि “अल्लाह हिदायत देने वाला है” दिल को हल्का कर देता है।
हज़रत ज़करिया अलैहिस्सलाम और हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने बुढ़ापे में भी औलाद की तरबियत और उनकी नेकी के लिए दुआएँ मांगीं। इससे हमें यह सबक मिलता है कि दुआ का सिलसिला कभी रुकना नहीं चाहिए। चाहे बच्चा छोटा हो या बड़ा, वालिद और वालिदा की दुआ हमेशा उसके इर्द-गिर्द एक हिफ़ाज़ती घेरा बनकर रहती है।
Rozmarrah Zindagi Mein Dua Ka Ehsaas
दुआ सिर्फ नमाज़ के मुसल्ले तक महदूद नहीं होती। जब आप अपने बच्चे को सोते हुए देखें, उसे स्कूल जाते हुए देखें या उसे मुस्कुराते हुए देखें, तो दिल ही दिल में अल्लाह से उसकी खैर मांगें। यह खामोश दुआएं अर्श तक बहुत जल्दी पहुँचती हैं।
अक्सर जब हम फिक्रमंद होते हैं, तो हमारा रवैया सख़्त हो जाता है। ऐसे में अपनी फिक्र को दुआ में बदल देना चाहिए। जब आप अपने दिल में बच्चे के लिए नेक ख़्वाहिशात रखते हैं, तो आपके लहजे में भी नरमी आ जाती है। यही नरमी बच्चे के अख़्लाक़ को संवारने में सबसे ज़्यादा असरदार साबित होती है।
मुख़्तसर सवाल-जवाब
क्या तरबियत सिर्फ दुआ से हो जाती है?
तरबियत के लिए कोशिश करना हमारा फ़र्ज़ है और दुआ उस कोशिश की रूह है। जैसे बीज बोना हमारा काम है और उसमें जान डालना अल्लाह का काम, वैसे ही नेक माहौल देना हमारी ज़िम्मेदारी है और उस पर बरकत अता करना अल्लाह की रहमत है।
क्या वालिदैन अपनी ज़ुबान में बच्चे के लिए दुआ मांग सकते हैं?
बिल्कुल, अल्लाह तआला हर ज़ुबान को समझता है और दिलों के हाल से वाकिफ़ है। मसनून दुआओं के साथ-साथ आप अपनी ज़ुबान (हिंदी, उर्दू या जो भी आप बोलते हों) में अपने बच्चे की नेक आदतों, सेहत और इमान के लिए गिड़गिड़ा कर दुआ मांग सकते हैं।
आख़िरी बात
बच्चे की तरबियत की दुआ दरअसल वालिदैन के अपने इमान का इम्तिहान भी है। यह सफ़र थकाने वाला नहीं बल्कि रूहानी सुकून देने वाला होना चाहिए। याद रखें, अल्लाह तआला आपकी हर तड़प और हर दुआ को सुन रहा है। अपनी नीयत साफ़ रखें, सब्र से काम लें और अल्लाह की रहमत पर पूरा भरोसा रखें। नेक औलाद एक सदक़ा-ए-जारिया है, और आपकी दुआएं उनके हक़ में सबसे बड़ा तोहफा हैं।


