Hasad Aur Insaani Rishte
जिंदगी में कई बार हमें ऐसा महसूस होता है कि हमारे आस-पास का माहौल भारी हो गया है। कभी काम की जगह पर, तो कभी रिश्तेदारों के बीच, तरक्की या खुशहाली को लेकर एक अजीब सा खिंचाव (tension) पैदा हो जाता है। हसद यानी जलन एक ऐसा इंसानी जज़्बा है, जो न सिर्फ दूसरों को तकलीफ दे सकता है, बल्कि खुद हसद करने वाले के दिल का सुकून भी छीन लेता है।
अक्सर जब हम किसी को आगे बढ़ता देखते हैं, तो मुक़ाबला (comparison) का अहसास जाग सकता है। यह ज़रूरी नहीं कि सामने वाला जानबूझकर आपका बुरा चाहता हो, लेकिन इंसान की फितरत में कभी-कभी यह कमजोरी आ जाती है। इस वजह से रिश्तों में खामोश दूरियां आ जाती हैं और दिल पर एक अनचाहा बोझ महसूस होने लगता है। इस्लाम हमें सिखाता है कि इन हालात में डरने या शक करने के बजाय, अपने दिल को अल्लाह की पनाह में ले जाना चाहिए।
Islam Hasad Ke Bare Mein Kya Sikhata Hai
इस्लाम ने हसद को एक हकीकत माना है, लेकिन उसे वहम या डर की वजह नहीं बनने दिया। हसद एक बीमारी की तरह है जो इंसान के नेक आमाल को वैसे ही खा जाती है, जैसे आग लकड़ी को। लेकिन इसका इलाज लोगों पर इल्जाम लगाना नहीं है।
अल्लाह ने हमें सिखाया है कि जब भी हमें किसी की बुरी नज़र या हसद का अंदेशा हो, तो हम हिफ़ाज़त के लिए सिर्फ उसी की तरफ रुजू करें। अल्लाह की पनाह सबसे मज़बूत किला है। जब हम अल्लाह पर भरोसा करते हैं, तो किसी भी इंसान की जलन हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। इस्लाम का पैगाम यह है कि हम अपने दिल को साफ़ रखें और अपनी और दूसरों की सलामती की दुआ मांगें।
Hasad Ke Asar Se Bachne Ke Liye Masnoon Duas
यहाँ हसद के असर और शर (बुराई) से बचने के लिए कुरआन और हदीस से साबित दो बहुत ही अहम दुआएं दी गई हैं। इन्हें यकीन और सुकून के साथ पढ़ें।
Arabic Dua
وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ
तलफ़्फ़ुज़
व मिन शर्रि हासिदिन इज़ा हसद
Roman (Hinglish)
Wa min sharri hasidin iza hasad
तर्जुमा
और (मैं पनाह मांगता हूँ) हसद करने वाले की बुराई से, जब वह हसद करे।
Masdar
सूरह अल-फ़लक़ (113:5)
Arabic Dua
أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ
तलफ़्फ़ुज़
अऊज़ु बि-कलिमातिल लाहित ताम्माति मिन शर्रि मा ख़लक़
Roman (Hinglish)
A’udhu bi kalimatillahi at-tammati min sharri ma khalaq
तर्जुमा
मैं अल्लाह के कामिल (पूरे) कलिमों की पनाह में आता हूँ, हर उस चीज़ की बुराई से जो उसने पैदा की है।
Masdar
सहीह मुस्लिम
Dua Ke Saath Dil Ko Kaise Mehfooz Rakhein
सिर्फ ज़ुबान से दुआ पढ़ना काफी नहीं होता, दिल की कैफियत (state of heart) भी बहुत मायने रखती है। जब आप हसद करने वालों से बचने की दुआ मांगें, तो अपने अंदर सब्र और तवक्कुल (अल्लाह पर भरोसा) को मज़बूत करें। यह यकीन रखें कि इज्ज़त और जिल्लत, नफा और नुकसान सिर्फ अल्लाह के हाथ में है।
अपनी नियत को साफ़ रखना भी एक बड़ी हिफ़ाज़त है। कोशिश करें कि अपनी खुशियों या कामयाबी का दिखावा बहुत ज्यादा न करें, क्योंकि सादगी में ही अमन है। जब आप अल्लाह की हिफ़ाज़त पर भरोसा कर लेते हैं, तो लोगों की बातें या उनका व्यवहार आपके दिल के सुकून को चोट नहीं पहुँचा सकता। अल्लाह की रहमत हर तरह की जलन से बड़ी है।
Rozmarrah Zindagi Mein Hasad Ka Ehsaas
आजकल की तेज़ रफ़्तार जिंदगी और सोशल मीडिया के दौर में तुलना करना बहुत आम हो गया है। हम अक्सर देखते हैं कि किसी की फोटो या पोस्ट देखकर लोग अपनी जिंदगी को कमतर समझने लगते हैं। यही अहसास धीरे-धीरे हसद की शक्ल ले लेता है।
रिश्तेदारों में शादियों या दावतों के मौके पर, या दफ्तर में प्रमोशन के वक्त, कई बार हमें लगता है कि लोग खुश नहीं हैं। यह एक कुदरती सामाजिक दबाव है। लेकिन इसे अपने सर पर सवार न करें। अगर आपको लगता है कि माहौल में जलन है, तो खामोशी अख्तियार करें और ऊपर दी गई दुआओं का सहारा लें। यह अहसास आपको डराने के लिए नहीं, बल्कि अल्लाह के करीब ले जाने के लिए होना चाहिए।
मुख़्तसर सवाल-जवाब
क्या हर बुराई हसद की वजह से होती है?
नहीं, हर परेशानी या नुकसान हसद की वजह से नहीं होता। जिंदगी में उतार-चढ़ाव अल्लाह की तरफ से आज़माइश भी हो सकते हैं। हर चीज़ को हसद से जोड़ना वहम पैदा करता है।
क्या हसद से बचने के लिए अपनी ज़ुबान में दुआ मांग सकते हैं?
बिल्कुल। अल्लाह हर ज़ुबान और हर दिल की बात सुनता है। आप अपनी मादरी ज़ुबान (Mother tongue) में भी अल्लाह से हिफ़ाज़त और अमन की दुआ मांग सकते हैं।
आख़िरी बात
हसद करने वालों से बचने की दुआ का असल मकसद हमारे दिल को मज़बूत करना है। जब हम अल्लाह की पनाह मांग लेते हैं, तो फिर हमें डरने की ज़रुरत नहीं रहती। याद रखें, कोई भी इंसान आपको तब तक नुकसान नहीं पहुँचा सकता जब तक अल्लाह न चाहे। अपने अकीदे को मज़बूत रखें, लोगों के प्रति दिल में नफरत न पालें और अपनी जिंदगी अमन और सुकून के साथ गुज़ारें। अल्लाह हम सबको अपनी हिफ़ाज़त और रहमत के साये में रखे।


