Azaab-e-Qabr Se Bachne Ki Dua | क़ब्र की सज़ा से अल्लाह की पनाह

Quick Guide
मुख़्तसर रहनुमाई

अज़ाब-ए-क़ब्र से बचने की दुआ

اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ جَهَنَّمَ، وَمِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ، وَمِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ، وَمِنْ شَرِّ فِتْنَةِ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ
तलफ़्फ़ुज़:
अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिन अज़ाबि जहन्नम, व मिन अज़ाबिल क़ब्र, व मिन फ़ितनतिल मह्या वल ममात, व मिन शर्रि फ़ितनतिल मसीहिद दज्जाल
तर्जुमा:
ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह मांगता हूँ जहन्नम के अज़ाब से, और क़ब्र के अज़ाब से, और ज़िंदगी और मौत के फ़ितने से, और मसीह दज्जाल के फ़ितने की बुराई से।
मसदर: 
सहीह मुस्लिम: 588
azaab e qabr se bachne ki dua main

Table of Content

हर मोमिन की ज़िंदगी में एक पल ऐसा आता है जब वह दुनिया की दौड़-भाग से रुककर अपनी आख़िरत के बारे में सोचता है। इस्लाम हमें सिखाता है कि मौत ज़िंदगी का अंत नहीं, बल्कि एक नए सफ़र की शुरुआत है। इस सफ़र का पहला पड़ाव क़ब्र है।

अक्सर जब हम क़ब्र के बारे में सुनते हैं, तो दिल में एक डर पैदा होता है। लेकिन इस्लाम सिर्फ डर का मज़हब नहीं है, यह उम्मीद (Hope) का दीन है। हमारे प्यारे नबी (सल्लallahu अलैहि वसल्लम) ने हमें Azaab e qabr se bachne ki dua सिखाकर यह बताया है कि मोमिन को डरने के बजाय अल्लाह की पनाह में आना चाहिए।

अल्लाह अपने बंदों को सज़ा देने के लिए नहीं, बल्कि माफ़ करने के लिए बहाने ढूंढता है। ज़रूरत बस इस बात की है कि हम सच्चे दिल से उसकी हिफ़ाज़त तलब करें।


Aakhirat Ki Yaad Aur Insaan Ka Dil

आख़िरत की याद इंसान को मायूस करने के लिए नहीं, बल्कि उसे बेहतर बनाने के लिए होती है। जब एक इंसान को यह एहसास होता है कि उसे अपने रब के पास लौटना है, तो उसका दिल नरम हो जाता है।

क़ब्र का खयाल दिल में ‘खौफ़’ (Fear) और ‘उम्मीद’ (Hope) का एक संतुलन पैदा करता है।

  • खौफ़: ताकि हम गुनाहों से बचें और अल्लाह की नाफ़रमानी न करें।
  • उम्मीद: कि अल्लाह बहुत ग़फ़ूर-उर- रहीम है और वह हमारी कमियों को ढांप लेगा।

एक मोमिन का दिल कभी भी अल्लाह की रहमत से मायूस नहीं होता। जब भी क़ब्र के मामले में घबराहट हो, तो याद रखें कि जिस अल्लाह ने दुनिया में इतनी नेमतें दी हैं, वह आख़िरत में भी अपने नेक बंदों को अकेला नहीं छोड़ेगा।


Islam Qabr Ke Bare Mein Kya Sikhaata Hai

इस्लाम बहुत साफ़ और सीधे लफ़्ज़ों में समझाता है कि क़ब्र और उसका अज़ाब (सज़ा) एक हक़ीक़त है। इसे झुठलाया नहीं जा सकता। लेकिन इसी के साथ, इस्लाम यह भी सिखाता है कि क़ब्र मोमिन के लिए ‘जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़’ भी बन सकती है।

अल्लाह ने हमें बेयारो-मददगार नहीं छोड़ा है। उसने हमें हिफ़ाज़त के तरीक़े बताए हैं। अज़ाब-ए-क़ब्र से हिफ़ाज़त का मामला पूरी तरह अल्लाह के हाथ में है। जब एक बंदा हाथ उठाकर पनाह मांगता है, तो वह दरअसल यह इक़रार करता है कि “या अल्लाह, मैं कमज़ोर हूँ और तेरी रहमत के बिना मेरा कोई ठिकाना नहीं।”

इसलिए, डरावनी कहानियों में उलझने के बजाय हमें उन रूहानी नुस्खों पर ध्यान देना चाहिए जो हमारे नबी (सल्लallahu अलैहि वसल्लम) ने हमें अता किए हैं।


Azaab-e-Qabr Se Panah Maangne Ki Masnoon Duas

हदीस की किताबों में अज़ाब-ए-क़ब्र से पनाह मांगने की कई दुआएं मौजूद हैं। यहाँ हम सिर्फ उस दुआ का ज़िक्र करेंगे जो बेहद मोतबर (Authentic) है और जिसे नबी (सल्लallahu अलैहि वसल्लम) अक्सर नमाज़ में तशह्हुद (अत्तहियात) के बाद पढ़ा करते थे।

1. क़ब्र और जहन्नम के अज़ाब से पनाह की दुआ

यह दुआ हर नमाज़ में सलाम फेरने से पहले पढ़ी जा सकती है। यह Azaab e qabr se bachne ki dua में सबसे जामे (Comprehensive) मानी जाती है।

Arabic Dua

اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ جَهَنَّمَ، وَمِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ، وَمِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ، وَمِنْ شَرِّ فِتْنَةِ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ

तलफ़्फ़ुज़ (Hindi Pronunciation)

अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिन अज़ाबि जहन्नम, व मिन अज़ाबिल क़ब्र, व मिन फ़ितनतिल मह्या वल ममात, व मिन शर्रि फ़ितनतिल मसीहिद दज्जाल

Roman (Hinglish)

Allahumma inni a’uzubika min azaabi jahannam, wa min azaabil qabr, wa min fitnatil mahya wal mamaat, wa min sharri fitnatil maseehid dajjal.

तर्जुमा (Translation)

“ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह मांगता हूँ जहन्नम के अज़ाब से, और क़ब्र के अज़ाब से, और ज़िंदगी और मौत के फ़ितने से, और मसीह दज्जाल के फ़ितने की बुराई से।”

Masdar (Reference)

[सहीह मुस्लिम: 588]


Dua Ke Saath Dil Ka Rukh

सिर्फ़ ज़बान से दुआ के अल्फाज़ दोहराना काफ़ी नहीं है, दुआ के साथ दिल का शामिल होना भी ज़रूरी है। जब आप Azaab e qabr se bachne ki dua पढ़ें, तो आपके दिल में ये जज़्बात होने चाहिए:

  1. सच्ची तौबा (Repentance): अपने गुज़रे हुए गुनाहों पर शर्मिंदगी महसूस करें और आइंदा उनसे बचने का इरादा करें। तौबा अज़ाब के सामने ढाल बन जाती है।
  2. अल्लाह पर भरोसा: यकीन रखें कि अल्लाह आपकी दुआ सुन रहा है। वह अपने बंदे को खाली हाथ नहीं लौटाता।
  3. आजिज़ी (Humility): अपने आप को अल्लाह के सामने छोटा समझें। घमंड और तकब्बुर इंसान को हलाकत (बरबादी) की तरफ ले जाता है।

Rozmarrah Zindagi Mein Aakhirat Ki Tayari

दुआ के साथ-साथ हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का रहन-सहन भी हमारी क़ब्र को रोशन करता है। इस्लाम बहुत मुश्किल नहीं है; छोटी-छोटी नेकिया भी बहुत मायने रखती हैं।

  • पाकीज़गी और नमाज़: नमाज़ वह नूर है जो अंधेरी क़ब्र में रोशनी का काम करेगी। इसकी पाबंदी सुकून का ज़रिया है।
  • हुक़ूक़-उल-इबाद: लोगों के साथ नरमी और अच्छे अख़लाक़ से पेश आएं। किसी का दिल न दुखाएं, क्योंकि बंदों की माफ़ी के बिना अल्लाह का मामला सख़्त हो सकता है।
  • सदक़ा और खैरात: अपनी हैसियत के मुताबिक सदक़ा करें। यह बलाओं को टालता है और अल्लाह के गुस्से को ठंडा करता है।
  • कुरआन की तिलावत: खास तौर पर सूरह मुल्क (Surah Mulk) के बारे में हदीस में आता है कि यह क़ब्र के अज़ाब से हिफ़ाज़त करती है। इसे रात को सोने से पहले पढ़ने का मामूल (आदत) बनाएं।

मुख़्तसर सवाल-जवाब

सवाल: क्या अज़ाब-ए-क़ब्र का खौफ़ रखना ग़लत है?
जवाब: नहीं, एक हद तक खौफ़ होना ईमान की निशानी है। यह इंसान को गुनाहों से रोकता है। लेकिन खौफ़ इतना ज़्यादा नहीं होना चाहिए कि आप अल्लाह की रहमत से मायूस हो जाएं। खौफ़ और उम्मीद का संतुलन ज़रूरी है।

सवाल: क्या अल्लाह की रहमत अज़ाब से ज़्यादा वसी (बड़ी) है?
जवाब: बिला शुबा! अल्लाह ने खुद फ़रमाया है कि “मेरी रहमत मेरे ग़ज़ब पर हावी है।” अगर बंदा सच्चे दिल से माफ़ी मांगे, तो अल्लाह के लिए कोई गुनाह माफ़ करना मुश्किल नहीं। उसकी रहमत हर चीज़ को घेरे हुए है।


अख़री बात

अज़ाब-ए-क़ब्र का ज़िक्र हमें डराने के लिए नहीं, बल्कि हमें अल्लाह के करीब करने के लिए है। जब हम Azaab e qabr se bachne ki dua मांगते हैं, तो हम अपनी बेबसी और अल्लाह की कुदरत का इक़रार करते हैं।

अपने दिल को सुकून में रखें। अल्लाह अपने बंदों से सत्तर माओं से ज़्यादा मोहब्बत करता है। आप अपनी कोशिश जारी रखें, नमाज़ों की पाबंदी करें और बाकी मामला अपने मेहरबान रब पर छोड़ दें।

अल्लाह हम सबको क़ब्र के फ़ितने से महफ़ूज़ रखे और हमारी आख़िरत को आसान बनाए। आमीन।