Ayatul Kursi Ki Fazilat | आयतुल कुर्सी की फ़ज़ीलत और बरकत

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मुख़्तसर रहनुमाई

आयतुल कुर्सी

ٱللَّهُ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ٱلۡحَيُّ ٱلۡقَيُّومُۚ لَا تَأۡخُذُهُۥ سِنَةٞ وَلَا نَوۡمٞۚ لَّهُۥ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۗ مَن ذَا ٱلَّذِي يَشۡفَعُ عِندَهُۥٓ إِلَّا بِإِذۡنِهِۦۚ يَعۡلَمُ مَا بَيۡنَ أَيۡدِيهِمۡ وَمَا خَلۡفَهُمۡۖ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيۡءٖ مِّنۡ عِلۡمِهِۦٓ إِلَّا بِمَا شَآءَۚ وَسِعَ كُرۡسِيُّهُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَۖ وَلَا يَـُٔودُهُۥ حِفۡظُهُمَاۚ وَهُوَ ٱلۡعَلِيُّ ٱلۡعَظِيمُ
तलफ़्फ़ुज़:
अल्लाहु ला इलाह इल्ला हुव, अल-हय्युल क़य्यूम। ला ताखुज़ुहू सिनतुंव-वला नौम। लहू मा फ़िस-समावाति व मा फ़िल-अज़। मन ज़ल्लज़ी यश-फ़अु इन्दहू इल्ला बि-इज़्निह। यअलमु मा बैना ऐदीहिम व मा ख़ल्फहुम। व ला युहीतूना बि-शैइम-मिन इल्मिही इल्ला बिमा शाअ। वसिअ कुर्सिय्युहुस-समावाति वल-अर्ज़। व ला यऊदुहू हिफ़्ज़ुहुमा, व हुवल अलिय्युल अज़ीम।
तर्जुमा:
अल्लाह, जिसके सिवा कोई इबादत के लायक नहीं है, वह हमेशा ज़िंदा रहने वाला और (सारे जहान को) थामने वाला है। उसे न ऊंघ आती है और न नींद। जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है, सब उसी का है। कौन है जो उसकी इजाज़त के बिना उसके पास सिफ़ारिश कर सके? वह जानता है जो उनके सामने है और जो उनके पीछे है। और वे उसके इल्म में से किसी चीज़ का अहाता (घेराव) नहीं कर सकते, सिवाय उतना जितना वह चाहे। उसकी कुर्सी (बादशाही) ने आसमानों और ज़मीन को घेर रखा है, और उन दोनों की हिफ़ाज़त उसे (अल्लाह को) नहीं थकाती। और वह बहुत बुलंद और बहुत बड़ा है।
मसदर: 
सहीह मुस्लिम, हदीस: 810
ayatul kursi ki fazilat main

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मुसलमानों के दिलों में क़ुरआन मजीद की हर आयत का मक़ाम ऊँचा है, लेकिन Ayatul Kursi ki fazilat हदीस की किताबों में बहुत नुमाया (prominent) तौर पर बयान की गई है। यह आयत अल्लाह की तौहीद, उसकी कुदरत और उसकी बादशाही का बेहतरीन बयान है।

अक्सर लोग सुनी- सुनाई बातों पर यकीन कर लेते हैं, लेकिन दीन की समझ रखने वालों के लिए ज़रूरी है कि वे आयतुल कुर्सी की असल फ़ज़ीलत को सहीह हदीस और क़ुरआन की रोशनी में समझें।


Ayatul Kursi Kya Hai

आयतुल कुर्सी क़ुरआन मजीद के दूसरे पारे में मौजूद सूरह अल-बक़रह (Surah Al-Baqarah) की आयत नंबर 255 है। इसे ‘आयतुल कुर्सी’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें अल्लाह की ‘कुर्सी’ (जिसका इल्म सिर्फ अल्लाह को है) का ज़िक्र आया है, जो ज़मीन और आसमान को घेरे हुए है।

यह सिर्फ हिफ़ाज़त की दुआ नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की सिफ़ात (Attributes) का एक मुकम्मल खज़ाना है। इसमें अल्लाह तआला ने अपना तारुफ़ कराया है कि वह ‘अल-हय्यु’ (हमेशा ज़िंदा रहने वाला) और ‘अल-कय्यूम’ (सृष्टि को थामने वाला) है।


Ayatul Kursi: Arabic, Talaffuz aur Tarjuma

नीचे आयतुल कुर्सी अरबी टेक्स्ट, हिंदी तलफ़्फ़ुज़ और आसान तर्जुमे के साथ दी गई है। इसे सही मख़रज (Pronunciation) के साथ पढ़ने की कोशिश करें।

आयतुल कुर्सी (अरबी):

ٱللَّهُ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ٱلۡحَيُّ ٱلۡقَيُّومُۚ لَا تَأۡخُذُهُۥ سِنَةٞ وَلَا نَوۡمٞۚ لَّهُۥ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۗ مَن ذَا ٱلَّذِي يَشۡفَعُ عِندَهُۥٓ إِلَّا بِإِذۡنِهِۦۚ يَعۡلَمُ مَا بَيۡنَ أَيۡدِيهِمۡ وَمَا خَلۡفَهُمۡۖ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيۡءٖ مِّنۡ عِلۡمِهِۦٓ إِلَّا بِمَا شَآءَۚ وَسِعَ كُرۡسِيُّهُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَۖ وَلَا يَـُٔودُهُۥ حِفۡظُهُمَاۚ وَهُوَ ٱلۡعَلِيُّ ٱلۡعَظِيمُ

हिंदी तलफ़्फ़ुज़ (Hindi Transliteration):

“अल्लाहु ला इलाह इल्ला हुव, अल-हय्युल क़य्यूम। ला ताखुज़ुहू सिनतुंव-वला नौम। लहू मा फ़िस-समावाति व मा फ़िल-अज़। मन ज़ल्लज़ी यश-फ़अु इन्दहू इल्ला बि-इज़्निह। यअलमु मा बैना ऐदीहिम व मा ख़ल्फहुम। व ला युहीतूना बि-शैइम-मिन इल्मिही इल्ला बिमा शाअ। वसिअ कुर्सिय्युहुस-समावाति वल-अर्ज़। व ला यऊदुहू हिफ़्ज़ुहुमा, व हुवल अलिय्युल अज़ीम।”

आसान तर्जुमा (Meaning): अल्लाह, जिसके सिवा कोई इबादत के लायक नहीं है, वह हमेशा ज़िंदा रहने वाला और (सारे जहान को) थामने वाला है। उसे न ऊंघ आती है और न नींद। जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है, सब उसी का है। कौन है जो उसकी इजाज़त के बिना उसके पास सिफ़ारिश कर सके? वह जानता है जो उनके सामने है और जो उनके पीछे है। और वे उसके इल्म में से किसी चीज़ का अहाता (घेराव) नहीं कर सकते, सिवाय उतना जितना वह चाहे। उसकी कुर्सी (बादशाही) ने आसमानों और ज़मीन को घेर रखा है, और उन दोनों की हिफ़ाज़त उसे (अल्लाह को) नहीं थकाती। और वह बहुत बुलंद और बहुत बड़ा है।


Islam Mein Ayatul Kursi Ka Rutba

इस्लाम में इस आयत का मक़ाम बहुत बुलंद है। नबी-ए- करीम ﷺ ने इसे क़ुरआन की सबसे अज़ीम (महान) आयत करार दिया है।

एक मर्तबा नबी ﷺ ने हज़रत उबय बिन काब (रज़ि.) से सवाल किया कि अल्लाह की किताब में सबसे बड़ी आयत कौन सी है? जब उन्होंने जवाब दिया कि वह आयतुल कुर्सी है, तो आप ﷺ ने खुशी का इज़हार किया और उन्हें इल्म की मुबारकबाद दी।

हवाला (Reference): सहीह मुस्लिम, हदीस: 810

इससे साबित होता है कि आयतुल कुर्सी का मर्तबा तमाम आयतों में सबसे ज़्यादा है क्योंकि इसमें ख़ालिस तौहीद का बयान है।


Ayatul Kursi Ki Masnoon Fazilat

यहाँ हम सिर्फ वही फ़ज़ाइल बयान करेंगे जो सहीह हदीसों से साबित हैं, ताकि आपका अक़ीदा मज़बूत हो और अमल में पुख्तगी आए।

1. शैतान और जिन्नात से हिफ़ाज़त

सोने से पहले आयतुल कुर्सी पढ़ने की बहुत बड़ी फ़ज़ीलत है। हज़रत अबू हुरैरा (रज़ि.) से रिवायत है कि एक बार शैतान इंसानी शक्ल में आया और पकड़े जाने पर उसने कहा कि अगर तुम रात को बिस्तर पर जाते वक़्त आयतुल कुर्सी पढ़ोगे, तो अल्लाह की तरफ से तुम पर एक निगराँ (Guardian) मुकर्रर हो जाएगा और सुबह तक शैतान तुम्हारे करीब नहीं आएगा। नबी करीम ﷺ ने इस वाकये की तस्दीक की और फरमाया: “उसने सच कहा, हालाँकि वह बहुत बड़ा झूठा है।”

हवाला (Reference): सहीह बुखारी, हदीस: 2311

2. फ़र्ज़ नमाज़ के बाद जन्नत की बशारत

हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ने का मामूल बनाना बहुत अज्र का बाइस है। हदीस शरीफ में आता है कि जो शख्स हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ता है, उसे जन्नत में दाखिल होने से सिर्फ ‘मौत’ ने रोक रखा है। यानी इंतकाल के बाद उसके और जन्नत के दरमियान कोई रुकावट नहीं होगी।

हवाला (Reference): सुनन अन-नसाई (अल-कुबरा: 9928), सहीह अल-जामी: 6464


Ayatul Kursi Kab Aur Kaise Padhi Jaati Hai

आयतुल कुर्सी पढ़ने के लिए कोई मुश्किल तरीका या तादाद मुकर्रर नहीं है। इसे आप अपनी रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में आसानी से शामिल कर सकते हैं:

  • फ़र्ज़ नमाज़ के बाद: सलाम फेरने के बाद मसनून अज़कार के साथ एक बार पढ़ें।
  • रात को सोने से पहले: बिस्तर पर लेटते वक़्त पढ़ें ताकि रात भर अल्लाह की हिफ़ाज़त में रहें।
  • सुबह और शाम के अज़कार में: अपनी सुबह और शाम की दुआओं में इसे शामिल करें।

पढ़ने का तरीका:

इसे पढ़ते वक़्त तलफ़्फ़ुज़ (Pronunciation) का खास ख्याल रखें। जल्दी-जल्दी पढ़ने के बजाय ठहर-ठहर कर और मायने पर गौर करते हुए पढ़ें। जब आप अल्लाह की बड़ाई बयान करते हैं, तो दिल में यह यकीन होना चाहिए कि हिफ़ाज़त करने वाली ज़ात सिर्फ अल्लाह की है।


Fazilat Aur Amal Ka Taluq

अक्सर लोग यह समझते हैं कि सिर्फ आयत के अल्फाज़ दोहराने से हर मुश्किल हल हो जाएगी। यह समझना ज़रूरी है कि Ayatul Kursi ki fazilat का गहरा ताल्लुक आपके ‘यक़ीन’ और ‘ईमान’ से है।

जब आप इसे पढ़ते हैं, तो आप अल्लाह को अपना ‘हामि-ओ-नासिर’ (मददगार) मानते हैं। यह कोई जादू की छड़ी नहीं है, बल्कि अल्लाह से जुड़ने का ज़रिया है। इसका असल फायदा तब मिलता है जब इंसान गुनाहों से बचे, फ़र्ज़ इबादतों की पाबंदी करे और अल्लाह पर मुकम्मल भरोसा रखे। अल्लाह की रहमत और हिफ़ाज़त उन लोगों के साथ होती है जो उसके कलाम की इज़्ज़त करते हैं और उस पर अमल करते हैं।


मुख़्तसर सवाल-जवाब

सवाल: क्या आयतुल कुर्सी को रोज़ाना पढ़ना ज़रूरी है?

जवाब: जी हाँ, इसे रोज़ाना पढ़ना सुन्नत है। ख़ासकर नमाज़ के बाद और सोने से पहले इसे पढ़ने की ताकीद हदीस में आई है। यह रूहानी हिफ़ाज़त का बेहतरीन ज़रिया है।

सवाल: क्या आयतुल कुर्सी सिर्फ हिफ़ाज़त के लिए पढ़ी जाती है?

जवाब: नहीं, सिर्फ हिफ़ाज़त ही नहीं, बल्कि यह अल्लाह की हम्द-ओ-सना (तारीफ़) का भी बेहतरीन ज़रिया है। इसे पढ़ने से ईमान ताज़ा होता है और पढ़ने वाले को हर हर्फ़ पर नेकियां मिलती हैं।


Aakhiri Baat

आयतुल कुर्सी अल्लाह का एक बहुत बड़ा तोहफ़ा है। हमें चाहिए कि हम इसे खुद भी याद करें और अपने बच्चों को भी सिखाएं। मकसद सिर्फ रटना नहीं, बल्कि इसके मायने को दिल में उतारना है। जब दिल में अल्लाह की बड़ाई होगी, तो दुनिया का हर डर खत्म हो जाएगा।

अल्लाह तआला हमें क़ुरआन मजीद को सही तरीके से पढ़ने, समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक अता फरमाए। आमीन।

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