Kisi Ko Shadi Ki Mubarakbad Ki Dua | निकाह पर कहने की मस्नून दुआ

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मुख़्तसर रहनुमाई

किसी को शादी की मुबारक़बाद की दुआ

بَارَكَ اللَّهُ لَكَ وَبَارَكَ عَلَيْكَ وَجَمَعَ بَيْنَكُمَا فِي خَيْرٍ
तलफ़्फ़ुज़:
बारकल्लाहु लका व बारका अलैका व जमाअ बैनकुमा फी खैर।
तर्जुमा:
अल्लाह आपको बरकत अता फरमाए, आप पर अपनी बरकतें नाज़िल फरमाए और आप दोनों (मियां-बीवी) को खैर व भलाई के साथ जोड़ कर रखे।
मसदर: 
जामी अत-तिर्मिज़ी (हदीस नंबर: 1091)

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इस्लाम में निकाह महज़ एक समाजी मुआहिदा (social contract) नहीं है, बल्कि यह एक मुक़द्दस इबादत और सुन्नत-ए-रसूल (ﷺ) है। जब दो मोमिन बंदे निकाह के पाक रिश्ते में जुड़ते हैं, तो उनके लिए दिल से निकली हुई नेक दुआएं उनकी आने वाली ज़िंदगी में सुकून और बरकत का ज़रिया बनती हैं।

अक्सर हम शादियों के मौके पर दुनियावी रस्मों और लफ़्ज़ों में इतने मशगूल हो जाते हैं कि वह खूबसूरत सुन्नत दुआएं भूल जाते हैं जो नबी करीम (ﷺ) ने हमें सिखाई हैं। Kisi ko shadi ki mubarakbad ki dua देने का सबसे बेहतरीन अंदाज़ वही है जो शरीअत और सुन्नत के मुताबिक हो।


Shadi Ke Mauke Par Dua Kyun Ahem Hoti Hai

निकाह का मक़ाम इस्लाम में बहुत बुलंद है। यह एक नए ख़ानदान की बुनियाद होती है। जब हम किसी दूल्हा या दुल्हन को मुबारकबाद देते हैं, तो हमारा मक़सद सिर्फ उन्हें ‘बधाई’ देना नहीं, बल्कि अल्लाह तआला से उनके लिए ‘खैर’ (भलाई) की दरख़्वास्त करना होता है।

  • निकाह की अज़मत: निकाह इंसान के ईमान को मुकम्मल करने में मदद करता है।
  • मुबारकबाद का अदब: इस्लाम हमें सिखाता है कि हम दूसरों की खुशियों में शरीक हों और उनके लिए वही पसंद करें जो अपने लिए करते हैं।
  • दुआ का रोल: इंसानी कोशिशें अपनी जगह हैं, लेकिन एक खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए अल्लाह की रहमत और बरकत सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

Islam Ne Mubarakbad Ka Kaunsa Tareeqa Sikhaya

इस्लाम सादगी और इख्लास (sincerity) का दीन है। शादियों में अक्सर लोग ‘मुबारक हो’ या ‘ढेरों बधाइयां’ जैसे अलफ़ाज़ इस्तेमाल करते हैं, जो गलत नहीं हैं, लेकिन अगर हम सुन्नत के मुताबिक दुआ दें, तो इसमें सवाब भी है और बरकत भी।

सुन्नत का अंदाज़ यह है कि दुआ में सिर्फ़ आज की खुशी नहीं, बल्कि आने वाले कल की मुस्तकिल बरकत शामिल हो। हमारी नियत यह होनी चाहिए कि अल्लाह इस जोड़े के दरमियान हमेशा मुहब्बत और इत्तेफ़ाक़ बनाए रखे।


Kisi Ko Shadi Ki Mubarakbad Dene Ki Masnoon Dua

जब आप किसी को निकाह की मुबारकबाद दें, तो रसूलुल्लाह (ﷺ) की सिखाई हुई यह जामेअ (comprehensive) दुआ ज़रूर पढ़ें। यह दुआ छोटी है लेकिन इसके मायने बहुत गहरे हैं।

Arabic Dua

بَارَكَ اللَّهُ لَكَ وَبَارَكَ عَلَيْكَ وَجَمَعَ بَيْنَكُمَا فِي خَيْرٍ

Hindi

बारकल्लाहु लका व बारका अलैका व जमाअ बैनकुमा फी खैर।

Roman (Hinglish)

Barakallahu laka wa baraka ‘alaika wa jama’a bainakuma fii khair.

तर्जुमा

“अल्लाह आपको बरकत अता फरमाए, आप पर अपनी बरकतें नाज़िल फरमाए और आप दोनों (मियां-बीवी) को खैर व भलाई के साथ जोड़ कर रखे।”

Masdar (Hadith Reference)

यह हदीस सुनन अबी दाऊद (हदीस नंबर: 2130) और जामी अत-तिर्मिज़ी (हदीस नंबर: 1091) में रिवायत की गई है। इमाम तिर्मिज़ी ने इसे ‘हसन सहीह’ करार दिया है।


Mubarakbad Kehte Waqt Lafzon Ka Adab

दुआ सिर्फ़ ज़बान से अदा होने वाले लफ़्ज़ों का नाम नहीं है, बल्कि यह दिल की आवाज़ होनी चाहिए। जब आप ‘kisi ko shadi ki mubarakbad ki dua’ दें, तो इन बातों का ख़्याल रखें:

  1. इख्लास और नियत: आपकी दुआ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सामने वाले की भलाई के लिए होनी चाहिए।
  2. सादा अलफ़ाज़: अगर आपको अरबी दुआ याद न हो, तो आप अपनी ज़बान में भी दुआ दे सकते हैं, लेकिन सुन्नत दुआ के अलफ़ाज़ों में एक अलग तासीर होती है।
  3. तल्फ़्फ़ुज़ का ख़्याल: अरबी के लफ़्ज़ों को सही तरीके से अदा करने की कोशिश करें ताकि मानी (meaning) न बदलें।
  4. सबके लिए दुआ: यह दुआ दूल्हा और दुल्हन दोनों के लिए यकसां (equal) तौर पर मुफीद है।

मुख़्तसर सवाल-जवाब

सवाल: क्या सिर्फ “शादी मुबारक हो” कहना काफी है?
जवाब: जी हां, “मुबारक हो” कहना भी जायज़ है और यह एक अच्छा समाजी अदब है। लेकिन अगर आप सुन्नत के मुताबिक अज्र (सवाब) पाना चाहते हैं और जोड़े के लिए मुकम्मल बरकत चाहते हैं, तो ऊपर दी गई मसनून दुआ पढ़ना ज़्यादा अफज़ल है।

सवाल: क्या यह दुआ लड़का और लड़की दोनों के लिए है?
जवाब: जी बिल्कुल। इस दुआ के अलफ़ाज़ “जमाअ बैनकुमा” (तुम दोनों को जमा रखे) दूल्हा और दुल्हन दोनों को शामिल करते हैं। यह दोनों की मुश्तरका (joint) खुशहाली के लिए है।


आख़िरी बात

निकाह अल्लाह की एक बहुत बड़ी नेमत है। जब हम किसी को सुन्नत के मुताबिक दुआ देते हैं, तो गोया हम उनके घर में रहमत के दरवाज़े खुलने की गुज़ारिश करते हैं। हमेशा याद रखें कि हमारी दुआएं रिश्तों को मज़बूत बनाती हैं और समाज में खैर व बरकत फैलाती हैं। अल्लाह हर निकाह करने वाले जोड़े की ज़िंदगी में बरकत अता फरमाए और उन्हें खैर के साथ जोड़ कर रखे। आमीन।