Naya kapda aur shukr ka jazba | नया कपड़ा और शुक्र का जज़्बा
हम सब को नए कपड़े पहनना पसंद है। चाहे वो ईद का मौक़ा हो, जुम्मा का दिन हो, या आम ज़िंदगी में कोई ख़ुशी का पल। नया लिबास सिर्फ़ फ़ैशन नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ़ से दी गई एक ख़ूबसूरत नेमत है।
जब भी हम कोई नई चीज़ इस्तेमाल करते हैं, तो दिल में ख़ुशी होती है। इस ख़ुशी के साथ-साथ शुक्र का जज़्बा होना भी बहुत ज़रूरी है। इस्लाम हमें सिखाता है कि हर छोटी-बड़ी नेमत मिलने पर अपने रब का शुक्रिया अदा करें, ताकि उस चीज़ में बरकत हो।
Naya Kapda Pahnana Aur Sunnat | नया कपड़ा पहनना और सुन्नत
अक्सर हम कपड़े पहनते वक़्त जल्दी में होते हैं और दुआ पढ़ना भूल जाते हैं। लेकिन अगर हम थोड़ी सी तवज्जो दें, तो यह मामूली सा काम भी ‘इबादत’ बन सकता है।
हमारे प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) जब भी कोई नया कपड़ा पहनते—चाहे वो कुर्ता हो, अमामा (पगड़ी) हो या चादर—तो अल्लाह का नाम लेते और एक ख़ास दुआ पढ़ते थे। इसका मक़सद यह होता था कि अल्लाह उस कपड़े को हमारे लिए बाइस-ए-खैर (भलाई का ज़रिया) बनाए और हर क़िस्म की बुराई या नज़र से हमारी हिफ़ाज़त फरमाए।
Masnoon Dua for New Clothes | मसनून दुआ
यह वो दुआ है जो हदीस में आयी है। इसे याद कर लें और जब भी नया कपड़ा पहनें, तो ज़रूर पढ़ें।
Arabic Dua
اللَّهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ كَسَوْتَنِيهِ، أَسْأَلُكَ مِنْ خَيْرِهِ وَخَيْرِ مَا صُنِعَ لَهُ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّهِ وَشَرِّ مَا صُنِعَ لَهُ
Talaffuz (Devanagari)
अल्लाहुम्मा लकल हम्दु, अन्ता कसौतनीहि, अस-अलुका मिन खैरिही व खैरि मा सुनि-अ लहू, व अऊजु बिका मिन शर्रिही व शर्रि मा सुनि-अ लहू.
Talaffuz (Roman)
Allahumma lakal hamdu, anta kasautanihi, as’aluka min khairihi wa khairi ma suni’a lahu, wa a’uzu bika min sharrihi wa sharri ma suni’a lahu.
Tarjuma (Translation)
“ऐ अल्लाह! तेरे ही लिए तमाम तारीफ़ें हैं। तूने ही मुझे यह (कपड़ा) पहनाया है। मैं तुझसे इसकी भलाई और जिसके लिए यह बना है, उसकी भलाई मांगता हूँ। और मैं तेरी पनाह चाहता हूँ इसकी बुराई से और जिसके लिए यह बना है, उसकी बुराई से।”
Masdar (Reference): Sunan Abu Dawood: 4020, Jami At-Tirmidhi: 1767
Dua Padhne Ka Adab | दुआ पढ़ने का अदब
इस दुआ की फ़ज़ीलत हासिल करने के लिए कुछ बातों का ख़याल रखना बेहतर है:
- दाहिनी तरफ़ से शुरुआत: सुन्नत तरीक़ा यह है कि शर्ट या कुर्ता पहनते वक़्त दाहिनी (Right) आस्तीन पहले डालें और पजामा या पैंट पहनते वक़्त दाहिना पैर पहले डालें।
- शुक्र की नियत: कपड़े पहनते वक़्त दिल में यह अहसास हो कि यह अल्लाह का तोहफ़ा है। घमंड या तकब्बुर (Show off) की नियत बिल्कुल न हो।
- पुराने कपड़ों का सदक़ा: हदीस के मफ़हूम के मुताबिक, जब कोई नया कपड़ा पहने और अपना पुराना कपड़ा किसी ग़रीब को दे दे, तो वह अल्लाह की ख़ास हिफ़ाज़त में आ जाता है।
Sawal Jawab | सवाल जवाब (Q&A)
क्या हर नया कपड़ा पहनते वक़्त यह दुआ पढ़ी जाती है?
जी हाँ, जब भी आप कोई बिल्कुल नया कपड़ा पहली बार पहनें, तो यह दुआ पढ़ना मसनून है। रोज़ाना जो धुले हुए कपड़े पहनते हैं, उनके लिए सिर्फ़ ‘बिस्मिल्लाह’ कह लेना और दाहिनी तरफ़ से पहनना काफ़ी है।
अगर दुआ याद न हो तो क्या करें?
अगर अरबी दुआ याद नहीं है, तो आप अपनी ज़ुबान में अल्लाह का शुक्र अदा करें (जैसे ‘अल्हम्दुलिल्लाह’) और बिस्मिल्लाह पढ़कर कपड़ा पहनें। लेकिन कोशिश करें कि धीरे-धीरे सुन्नत दुआ याद कर लें।
क्या औरतें और बच्चे भी यह दुआ पढ़ सकते हैं?
बिल्कुल। यह दुआ मर्दों, औरतों और बच्चों सबके लिए है। घर के बड़ों को चाहिए कि जब बच्चों को नए कपड़े पहनाएं, तो उन्हें भी यह दुआ ऊँची आवाज़ में सुनाएं ताकि वे भी सीख सकें।
Shukr aur saadgi ka ehsaas | शुक्र और सादगी का एहसास
कपड़े हमारी ज़रूरत भी हैं और हमारी ज़ीनत (सजावट) भी। दुआ पढ़ने से हमारे लिबास में नूर और बरकत आती है। अल्लाह हमें तौफ़ीक़ दे कि हम सादगी के साथ रहें, नए कपड़े पहनकर इतराने से बचें और हमेशा अपने रब का शुक्र अदा करते रहें।



