आज के दौर में बहुत से लोग रिज़्क़ की तंगी और बे-बरकती से परेशान हैं। सुबह से शाम तक मेहनत करने के बावजूद हाथ तंग रहता है, या पैसा आता तो है लेकिन पानी की तरह बह जाता है। ऐसे में एक मोमिन का दिल घबराता है।
इस्लाम हमें सिखाता है कि dua e rizq (दुआ-ए-रिज़्क़) सिर्फ़ लफ़्ज़ नहीं हैं, बल्कि यह अल्लाह पर भरोसे का सबूत है। अल्लाह ‘अर-रज़्ज़ाक़’ है—यानी रिज़्क़ देने वाला। जब हम हलाल कोशिश के साथ सुन्नत तरीक़े से उससे मांगते हैं, तो वह ऐसे रास्तों से अता करता है जिसकी हमें उम्मीद भी नहीं होती।
Islam Mein Rizq Ki Haqeeqat | इस्लाम में रिज़्क़ की हक़ीक़त
अक्सर हम समझते हैं कि रिज़्क़ का मतलब सिर्फ़ ‘बैंक बैलेंस’ या ‘कैश’ है। लेकिन इस्लाम में रिज़्क़ का मफ़हूम (concept) बहुत गहरा है:
- सेहत और तंदुरुस्ती: अगर आपके पास करोड़ों हैं लेकिन सेहत नहीं, तो वह पैसा किस काम का?
- दिल का सुकून: थोड़ी कमाई में भी चैन की नींद आना बहुत बड़ा रिज़्क़ है।
- नेक औलाद: वह औलाद जो बुढ़ापे का सहारा बने, वह बेहतरीन रिज़्क़ है।
रिज़्क़ की दुआ मांगते वक़्त अपने ज़हन को बड़ा रखें। अल्लाह से सिर्फ़ पैसा नहीं, बल्कि ‘खैर और बरकत’ मांगें।
Masnoon Dua e Rizq (Quran-o-Sunnah Se) | मसनून दुआ-ए-रिज़्क़
यहाँ रिज़्क़ में इज़ाफ़े, हलाल कमाई और बरकत के लिए दो सबसे मुस्तनद (authentic) दुआएं दी गई हैं। पहली दुआ ख़ास तौर पर फ़ज्र के वक़्त के लिए है, जिसे आपने कई बार उलमा से सुना होगा।
1. Fajar Ke Baad Ki Masnoon Dua | फ़ज्र के बाद की मसनून दुआ
यह दुआ हदीस की किताबों (इब्ने माजा) में आती है। नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) अक्सर फ़ज्र की नमाज़ का सलाम फेरने के बाद यह दुआ पढ़ते थे। यह बहुत जामे (comprehensive) दुआ है।
Arabic Text:
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا، وَرِزْقًا طَيِّبًا، وَعَمَلًا مُتَقَبَّلًا
Talaffuz (Devanagari):
अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अल्का इल्मन नाफ़ि-अन, व रिज़्क़न तय्यिबन, व अमलन मुतक़ब्-बलन।
Talaffuz (Roman):
Allahumma inni as’aluka ‘ilman nafi’an, wa rizqan tayyiban, wa ‘amalan mutaqabbalan.
Tarjuma (Hindi):
“ऐ अल्लाह! मैं तुझसे नफ़ा (फ़ायदा) देने वाले इल्म, पाकीज़ा (हलाल) रिज़्क़ और क़बूल होने वाले अमल का सवाल करता हूँ।”
Huwala (Reference): Sunan Ibn Majah 925
2. Qarz aur Tangi Se Hifazat Ki Dua | क़र्ज़ और तंगी से हिफ़ाज़त की दुआ
अगर आप क़र्ज़ के बोझ तले दबे हैं या चाहते हैं कि अल्लाह आपको अपने सिवा किसी का मोहताज न करे, तो यह दुआ कसरत से पढ़ें। हज़रत अली (र.अ.) ने यह दुआ एक ज़रूरतमंद को सिखाई थी।
Arabic Text:
اللَّهُمَّ اكْفِنِي بِحَلاَلِكَ عَنْ حَرَامِكَ وَأَغْنِنِي بِفَضْلِكَ عَمَّنْ سِوَاكَ
Talaffuz (Devanagari):
अल्लाहुम्मक-फ़िनी बि-हलालिका अन हरामिका, व-अगनिनी बि-फ़ज़लिका अम्मन सिवाक।
Talaffuz (Roman):
Allahummak-fini bi-halalika ‘an haramika, wa-aghnini bi-fadlika ‘amman siwak.
Tarjuma (Hindi):
“ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपना हलाल रिज़्क़ काफ़ी कर दे (ताकि मैं) हराम से बच सकूँ, और मुझे अपने फ़ज़ल (करम) से अपने सिवा हर किसी से बे-नियाज़ (गनी) कर दे।”
Huwala (Reference): Jami At-Tirmidhi 3563
Quran Se Rizq Ka Nuskha: Istighfar | क़ुरान से रिज़्क़ का नुस्खा: इस्तिग़फ़ार
रिज़्क़ बढ़ाने का सबसे मज़बूत तरीक़ा क़ुरान मजीद में ‘इस्तिग़फ़ार’ (माफ़ी मांगना) बताया गया है।
सूरह नूह (Surah Nuh) में अल्लाह तआला साफ़ फ़रमाता है कि जब बंदा अपने गुनाहों की माफ़ी मांगता है, तो अल्लाह:
- आसमान से बारिश बरसाता है।
- माल और औलाद में इज़ाफ़ा (बरकत) करता है।
- उसके लिए बाग़ और नहरें पैदा करता है।
Tareeqa (तरीक़ा):
चलते-फिरते, काम करते हुए कसरत से ‘अस्तग़फ़िरुल्लाह’ (Astaghfirullah) पढ़ें। यह रिज़्क़ की चाबी है।
Dua Ke Saath Kya Zaroori Hai | दुआ के साथ क्या ज़रूरी है?
अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि “हमने दुआ तो बहुत मांगी, मगर अस़र नहीं हुआ।” याद रखें, दुआ के साथ इन बातों का ख़याल रखना लाज़मी है:
- Haram se Parhez (हराम से परहेज़): अगर पेट में हराम लुक़्मा होगा, तो दुआ अर्श तक नहीं पहुँचती। कमाई कम हो, मगर हलाल हो।
- Sila-Rahmi (रिश्तेदारी निभाना): बुखारी और मुस्लिम की हदीस है कि जो चाहता है उसके रिज़्क़ में कुशादगी (इज़ाफ़ा) हो, वह अपने रिश्तेदारों के साथ अच्छा सुलूक करे।
- Mehnat (मेहनत): दुआ का मतलब हाथ पर हाथ रखकर बैठना नहीं है। चिड़िया को भी रिज़्क़ तब मिलता है जब वह घोंसले से निकलती है।
Sawal-Jawab (Common Doubts) | सवाल-जवाब
Q: क्या वज़ीफ़ा पढ़ने से नौकरी लग जाएगी?
Jawab: वज़ीफ़ा या dua e rizq अल्लाह से मदद मांगने का ज़रिया है। आप पूरी मेहनत करें, स्किल सीखें और फिर दुआ पढ़ें। अल्लाह आपकी कोशिश में बरकत डालेगा।
Q: क्या गुनाहों की वजह से रिज़्क़ रुकता है?
Jawab: जी हाँ, बाज़ औक़ात हमारे गुनाह रिज़्क़ में रुकावट बनते हैं। इसलिए दुआ से पहले तौबा और इस्तिग़फ़ार बहुत ज़रूरी है।
Mehnat aur Bharose Ka Talmel | मेहनत और भरोसे का तालमेल
आख़िरी बात यह कि अपनी तंगी से मायूस न हों। अल्लाह अपने बंदों को आज़माता है, कभी देकर और कभी रोक कर। आप फ़ज्र के बाद वाली दुआ को अपना मामूल (routine) बना लें और बाक़ी मामला अल्लाह पर छोड़ दें।
जब आपकी नियत साफ़ होगी और मेहनत सच्ची होगी, तो dua e rizq अपना असर ज़रूर दिखाएगी, इंशाअल्लाह।


