ज़िंदगी के सफ़र में कभी-कभी ऐसा मोड़ आता है जब इंसान खुद को बहुत थका हुआ और कमज़ोर महसूस करता है। दुनिया की ज़िम्मेदारियाँ, दिल की बेचैनी और अपनी कमियाँ इंसान के कंधे पर एक बोझ की तरह महसूस होने लगती हैं। ऐसे में रूह (soul) जिस चीज़ की सबसे ज़्यादा प्यासी होती है, वो है अल्लाह की रहमत।
अल्लाह की रहमत वह साया है जो इंसान को तपती धूप जैसी मुश्किलों में सुकून देता है। इस लेख में हम अल्लाह की रहमत के तसव्वुर और उस पाक दुआ के बारे में बात करेंगे जो हमारे दिल को उम्मीद और सुकून की रोशनी से भर देती है।
इंसान की कमज़ोरी और रहमत की ज़रूरत
इंसान अपनी फ़ितरत (nature) में बहुत मासूम और कमज़ोर है। हम अक्सर दुनिया की भागदौड़ में उलझ जाते हैं और कभी-कभी अपनी ही गलतियों या हालात के हाथों बेबस महसूस करते हैं। यह बेबसी हमें यह एहसास दिलाती है कि हम अपने दम पर सब कुछ ठीक नहीं कर सकते।
जब दिल उदास हो या ज़हन (mind) किसी अनजाने डर से परेशान हो, तो यह समझ लेना चाहिए कि यह वक्त अल्लाह की रहमत को पुकारने का है। रहमत की तलाश करना कोई कमज़ोरी नहीं, बल्कि अपने ख़ालिक़ (Creator) से जुड़ने का सबसे ख़ूबसूरत ज़रिया है। अल्लाह की रहमत की दुआ दरअसल एक पुकार है कि “ऐ मेरे रब, मैं कमज़ोर हूँ और मुझे तेरी मेहरबानी की ज़रूरत है।”
इस्लाम में अल्लाह की रहमत का तसव्वुर
इस्लाम में अल्लाह की पहचान ही ‘अर-रहमान’ और ‘अर-रहीम’ से है। यानी वह जो बहुत मेहरबान और बार-बार रहम करने वाला है। अल्लाह की रहमत इतनी वसी (vast) है कि वह हर चीज़ को अपने घेरे में लिए हुए है।
अल्लाह और बंदे का रिश्ता खौफ़ का नहीं, बल्कि मोहब्बत और उम्मीद का रिश्ता है। जब हम अल्लाह की तरफ एक कदम बढ़ाते हैं, तो उसकी रहमत हमें गले लगाने के लिए कहीं ज़्यादा तेज़ी से आगे बढ़ती है। रहमत का दरवाज़ा कभी बंद नहीं होता; यह वह आसरा है जहाँ हर इंसान को पनाह मिलती है, चाहे वह कितना ही परेशान क्यों न हो।
अल्लाह की रहमत के लिए पढ़ी जाने वाली मसनून दुआ
जब इंसान के पास लफ़्ज़ कम पड़ जाएं, तो क़ुरआन और हदीस की दुआएं सबसे बड़ा सहारा बनती हैं। यहाँ हम एक ऐसी मुकद्दस (holy) दुआ का ज़िक्र कर रहे हैं जो अल्लाह की रहमत और मामलात में नरमी मांगने के लिए बेहतरीन है।
Arabic Dua
رَبَّنَا آتِنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً وَهَيِّئْ لَنَا مِنْ أَمْرِنَا رَشَدًا
तलफ़्फ़ुज़
रब्बना आतिना मिल-लदुन्का रहमतंव-व हय्यिअ् लना मिन अम्रिना रशदा।
Roman (Hinglish)
Rabbana atina mil-ladunka rahmatan wa hayyi’ lana min amrina rashada.
तर्जुमा
“ऐ हमारे परवरदिगार! हमें अपने पास से खास रहमत अता फरमा और हमारे इस काम में हमारे लिए सीधा रास्ता (भलाई) मुहैय्या कर दे।”
Masdar (Reference)
क़ुरआन करीम: सूरह अल-कहफ़ (Surah Al-Kahf), आयत नंबर 10
यह दुआ उन नौजवानों (अहले कहफ़) ने मांगी थी जो मुश्किल हालात में अल्लाह की पनाह और रहमत के तलबगार थे। यह दुआ हमें सिखाती है कि जब रास्ते धुंधले नज़र आएं, तो अल्लाह की रहमत ही हमारा हाथ थामती है।
दुआ और उम्मीद का रिश्ता
दुआ सिर्फ लफ़्ज़ों को दोहराने का नाम नहीं है, बल्कि यह दिल का एक सुकून भरा संवाद (conversation) है। जब हम Allah ki rehmat ki dua मांगते हैं, तो हमारे अंदर एक खामोश यकीन पैदा होता है कि हम अकेले नहीं हैं।
दुआ करने से इंसान का बोझ हल्का हो जाता है। यह यकीन कि मेरा रब मेरी पुकार सुन रहा है और वह मेरे लिए बेहतरी का फैसला करेगा, मानसिक सुकून (mental peace) के लिए बहुत ज़रूरी है। दुआ हमें सब्र (patience) करना सिखाती है और हमारे दिल में अल्लाह पर भरोसे (Tawakkul) को मज़बूत करती है।
याद रखें, अल्लाह की रहमत मांगने का मतलब यह नहीं है कि हम अपनी मेहनत छोड़ दें, बल्कि इसका मतलब यह है कि हम अपनी कोशिशों के बाद उसका नतीजा अल्लाह की मेहरबानी पर छोड़ दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या अल्लाह की रहमत सिर्फ नेक लोगों के लिए है?
जी नहीं, अल्लाह की रहमत पूरी कायनात और हर इंसान के लिए है। अल्लाह अपने हर बंदे से मोहब्बत करता है। जब भी कोई इंसान सच्चे दिल से उसे पुकारता है, अल्लाह की रहमत उसके लिए हाज़िर होती है। रहमत मांगने के लिए किसी खास दर्जे का होना ज़रूरी नहीं, बस दिल में तड़प और अल्लाह पर यकीन होना चाहिए।
क्या रहमत की दुआ हर वक़्त की जा सकती है?
बिल्कुल। अल्लाह की रहमत मांगने के लिए कोई खास वक़्त मुकर्रर नहीं है। आप उठते-बैठते, चलते-फिरते या रात की तन्हाई में कभी भी अल्लाह से दुआ कर सकते हैं। अल्लाह हर वक़्त अपने बंदों की सुनने वाला है।
आख़िरी बात
अल्लाह की रहमत एक समंदर की तरह है जिसकी कोई गहराई या किनारा नहीं है। ज़िंदगी में कितनी ही मुश्किलें क्यों न आएं, हमें कभी भी मायूस नहीं होना चाहिए। अल्लाह की रहमत की दुआ हमारे लिए उम्मीद का वह दीया है जो अंधेरे रास्तों में हमें सही रास्ता दिखाता है।
अपने दिल को अल्लाह की याद से आबाद रखें और हमेशा उसकी मेहरबानी पर यकीन रखें। वह अपने बंदों के लिए बहुत मेहरबान है और उसकी रहमत हर चीज़ पर ग़ालिब है।


