अज़ान की आवाज़ हमारी रूह को एक अजीब सा सुकून देती है। जब मुअज्ज़िन की पुकार ख़त्म होती है और फ़िज़ा में ख़ामोशी छा जाती है, तो वह वक़्त बहुत क़ीमती होता है। यह सिर्फ़ नमाज़ के इंतज़ार का वक़्त नहीं, बल्कि अल्लाह से जुड़ने का एक ख़ास लम्हा है।
इस वक़्त आसमान के दरवाज़े खुलते हैं और बंदे की बात सीधे रब तक पहुँचती है। “Azan Ke Baad Ki Dua” पढ़ना एक छोटी सी कोशिश है अपने रब को राज़ी करने की और नबी (ﷺ) से अपनी मोहब्बत ज़ाहिर करने की।
Azan Ke Baad Dua Kyun Padhi Jati Hai | अज़ान के बाद दुआ क्यों पढ़ी जाती है
हमारे प्यारे नबी (ﷺ) ने हमें सिखाया है कि अज़ान के बाद का वक़्त क़बूलियत का वक़्त है। यह दुआ सिर्फ़ अल्फ़ाज़ नहीं, बल्कि नबी (ﷺ) के लिए ‘वसीला’ (जन्नत का सबसे आला मक़ाम) माँगने का ज़रिया है।
हदीस में आता है कि जो शख्स अज़ान के बाद यह दुआ पढ़ता है, उसके लिए क़यामत के दिन नबी (ﷺ) की शफ़ाअत (सिफ़ारिश) हलाल हो जाती है। इसलिए, दिन में पाँच बार आने वाले इस मौक़े को ज़ाया नहीं करना चाहिए।
Masnoon Azan Ke Baad Ki Dua | मसनून अज़ान के बाद की दुआ
यहाँ वह सही और मसनून दुआ दी गई है जो हदीस से साबित है। इसे आप अज़ान ख़त्म होने के बाद पढ़ें:
अरबी दुआ (Arabic Text)
اللَّهُمَّ رَبَّ هَذِهِ الدَّعْوَةِ التَّامَّةِ وَالصَّلاَةِ الْقَائِمَةِ آتِ مُحَمَّدًا الْوَسِيلَةَ وَالْفَضِيلَةَ وَابْعَثْهُ مَقَامًا مَحْمُودًا الَّذِي وَعَدْتَهُ
तलफ़्फ़ुज़ (Transliteration)
Allahumma Rabba haadhihi-dda‘wat-it-taammah, was-salaat-il-qaa’ima, aati Muhammadan-il-waseelata wal-fadheelah, wab’ath-hu maqaaman mahmoodan-il-ladhi wa‘adtahu.
हिंदी तलफ़्फ़ुज़
अल्लाहुम्मा रब्बा हाज़िहिद दअवतित ताम्मति वस्सलातिल क़ाइमति आति मुहम्मदानिल वसीलता वल फ़ज़ीलता वबअसहु मक़ामम महमूदनिल्लज़ी वअदतहु।
तर्जुमा (Translation)
“ऐ अल्लाह! इस मुकम्मल पुकार (अज़ान) और कायम होने वाली नमाज़ के रब! मोहम्मद (ﷺ) को वसीला और फ़ज़ीलत अता फ़र्मा, और उन्हें उस मक़ामे महमूद (तारीफ़ वाले मक़ाम) पर पहुँचा जिसका तूने उनसे वादा किया है।”
मस्दर (Reference): सही बुख़ारी: 614
Dua Padhne Ka Sahi Tareeqa Aur Adab | दुआ पढ़ने का सही तरीक़ा और आदाब
इस दुआ की बरकत हासिल करने के लिए कुछ आदाब का ख़याल रखना बेहतर है:
- अज़ान का जवाब: दुआ से पहले अज़ान को ग़ौर से सुनें और मुअज्ज़िन के कलिमात को दोहराएं।
- दुरूद शरीफ़: अज़ान ख़त्म होने पर पहले नबी (ﷺ) पर दुरूद (जैसे: अल्लाहुम्मा सल्ली अला मुहम्मद…) पढ़ें।
- दुआ पढ़ें: इसके बाद ऊपर दी गई मसनून दुआ पढ़ें।
- दिल की हाज़िरी: दुआ पढ़ते वक़्त अल्फ़ाज़ पर ग़ौर करें और दिल में आज़िज़ी रखें।
Sawal Jawab (FAQ) | सवाल जवाब
Q1: क्या हर अज़ान के बाद यह दुआ पढ़नी चाहिए?
जी हाँ, फ़ज्र से ईशा तक, हर अज़ान के बाद यह दुआ पढ़ना सुन्नत है और बाइस-ए-सवाब है।
Q2: अगर दुआ पूरी याद न हो तो क्या करें?
शुरुआत में आप इसे देखकर पढ़ सकते हैं। अगर याद न हो, तो सिर्फ़ दुरूद शरीफ़ पढ़ लेना भी अफ़ज़ल है।
Q3: क्या औरतों के लिए भी यह दुआ पढ़ना ज़रूरी है?
बिल्कुल, यह दुआ मर्द और औरत दोनों के लिए है। घर में अज़ान की आवाज़ आते ही ख्वातीन भी अपने काम रोककर जवाब दें और दुआ पढ़ें।
Khamoshi Mein Maangi Gayi Dua | ख़ामोशी में माँगी गई दुआ
दिन भर की भाग-दौड़ में अज़ान के ये चंद मिनट आपको अल्लाह के क़रीब लाते हैं। जब भी अज़ान सुनाई दे, दुनियावी बातें रोक दें और इस “Azan Ke Baad Ki Dua” का एहतमाम करें। यह आदत न सिर्फ़ दिल को सुकून देगी, बल्कि आख़िरत में नबी (ﷺ) का साथ भी नसीब कराएगी। अल्लाह हम सबको इसकी तौफ़ीक़ दे।


