Rishte Mein Narazgi Kyun Paida Hoti Hai
निकाह का रिश्ता मोहब्बत और भरोसे की बुनियाद पर कायम होता है, लेकिन इंसानी फितरत के मुताबिक कभी-कभी इस रिश्ते में तल्खी या नाराजगी आ जाती है। यह नाराजगी अक्सर किसी बड़े झगड़े की वजह से नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की छोटी-छोटी ग़लतफ़हमियों की वजह से होती है। जब हम एक-दूसरे के जज़बात को समझने में वक्त नहीं देते या बातचीत की कमी हो जाती है, तो दिलों में दूरियां बढ़ने लगती हैं।
अक्सर देखा गया है कि अपनी बात सही ढंग से न कह पाना या दूसरे के दुख को महसूस न करना जज़बाती बोझ बन जाता है। इस्लाम हमें सिखाता है कि रिश्ते में नरमी और एक-दूसरे के हक का ख्याल रखना ही असल सुकून का रास्ता है। दुआ अल्लाह से मदद मांगने का ज़रिया है, लेकिन इसके साथ अपनी खामियों को पहचानना भी ज़रूरी है।
Islam Mein Shohar Ki Zimmedari
इस्लाम में शौहर को घर का निगहबान बनाया गया है, और इस ज़िम्मेदारी का असल मकसद बीवी के साथ अदब, इंसाफ और रहमत का मामला करना है। सुन्नत का रवैया हमें यह सिखाता है कि सबसे बेहतरीन मर्द वह है जो अपने अहल-ओ-अयाल (घरवालों) के लिए बेहतरीन हो।
रिश्ते में सिर्फ हुक्म चलाना या अपनी बात मनवाना शौहर की ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि बीवी के जज़बात की कद्र करना और उसकी मुश्किलों में उसका साथ देना भी इबादत का हिस्सा है। जब एक शौहर अपनी नीयत साफ़ रखता है और ज़ुबान में नरमी लाता है, तो घर का माहौल अपने आप खुशनुमा होने लगता है। अल्लाह के रसूल ﷺ की ज़िंदगी हमारे लिए बेहतरीन मिसाल है कि कैसे ज़ोर-ज़बरदस्ती के बिना सिर्फ अच्छे अख़्लाक से दिलों को जीता जा सकता है।
Sukoon Aur Mohabbat Ke Liye Masnoon Duas
अल्लाह से अपने रिश्ते की बेहतरी के लिए दुआ करना एक मोमिन का सबसे बड़ा हथियार है। यहाँ दो ऐसी दुआएं दी जा रही हैं जो कुरान और हदीस की रोशनी में घर के सुकून और दिलों की मोहब्बत के लिए निहायत कीमती हैं।
Arabic Dua
رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًا
तलफ़्फ़ुज़
रब्बना हब लना मिन अज़वाजिना व ज़ुर्रिय्यातिना कुर्रता अ’यूनिन वज’अलना लिल मुत्तकीना इमामा।
Roman (Hinglish)
Rabbana hab lana min azwajina wa dhurriyyatina qurrata a’yunin waj’alna lil-muttaqina imama.
तर्जुमा
ऐ हमारे रब! हमें हमारी बीवियों और हमारी औलाद की तरफ से आंखों की ठंडक अता फरमा और हमें परहेज़गारों का इमाम (राह दिखाने वाला) बना।
Masdar
कुरान ए करीम (सूरा अल-फ़ुरक़ान, आयत 74)
Arabic Dua
اللَّهُمَّ أَلِّفْ بَيْنَ قُلُوبِنَا وَأَصْلِحْ ذَاتَ بَيْنِنَا
तलफ़्फ़ुज़
अल्लाहुम्मा अल्लिफ बयना कुलूबिना व अस्लिह ज़ाता बयनिना।
Roman (Hinglish)
Allahumma allif bayna qulubina wa aslih dhata baynina.
तर्जुमा
ऐ अल्लाह! हमारे दिलों के दरमियान मोहब्बत पैदा कर दे और हमारे आपसी ताल्लुकात की इस्लाह (सुधार) फरमा।
Masdar
सुनन अबु दाऊद (सहीह हदीस)
Dua Ke Saath Apni Soch Par Gaur
दुआ का असर तब और गहरा होता है जब हम अपनी नीयत और अमल पर भी गौर करते हैं। बीवी को राजी करने की नीयत सिर्फ अपनी बात मनवाने के लिए नहीं, बल्कि घर में अल्लाह की रहमत और सुकून लाने के लिए होनी चाहिए। अगर आपके रवैये में सख्ती है या आप बीवी की बातों को अनसुना करते हैं, तो सिर्फ दुआ से तब्दीली की उम्मीद रखना अधूरा है।
स्रब एक ऐसी सिफ़त है जो बिगड़ते हुए रिश्तों को संभाल लेती है। जब आप अपनी बीवी की किसी बात पर नाराज़ हों, तो उस वक़्त खामोशी अख्तियार करना और फिर नरमी से अपनी बात कहना ही असल समझदारी है। अपने रवैये की इस्लाह करना और अपनी गलतियों की माफी मांगना इंसान को छोटा नहीं बल्कि अल्लाह की नज़र में मोअज्ज़ज़ (इज़्ज़त वाला) बनाता है।
Rozmarrah Zindagi Mein Sukoon Ka Raasta
ज़िंदगी में सुकून हासिल करने के लिए छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखना बहुत ज़रूरी है। सबसे पहली चीज़ इज़्ज़त है; जब आप अपनी बीवी को इज़्ज़त देते हैं, तो उसके दिल में आपके लिए मोहब्बत खुद-ब-खुद पैदा होती है। अक्सर मर्द अपनी बात तो कहना चाहते हैं लेकिन बीवी की बात सुनने का हौसला नहीं रखते। बीवी की बातों को गौर से सुनना और उसकी राय की कद्र करना उसे यह एहसास दिलाता है कि वह आपके लिए अहम है।
इसके साथ ही शुक्रगुज़ारी का मिज़ाज बनाएं। वह घर के कामों में और आपकी खिदमत में जो मेहनत करती है, उस पर उसका शुक्रिया अदा करें। जब इंसान अल्लाह का शुक्र अदा करता है और बंदों की कद्र करता है, तो अल्लाह उसके रिश्तों में बरकत डाल देता है।
मुख़्तसर सवाल-जवाब
क्या दुआ से किसी का दिल ज़बरदस्ती बदला जा सकता है?
नहीं, दुआ अल्लाह से मांगी जाने वाली एक इल्तिजा है, यह कोई जादू या ज़ोर-ज़बरदस्ती का तरीका नहीं है। अल्लाह दिलों को फेरने वाला है, लेकिन वह हमारे नेक आमाल और सच्ची नीयत को देखता है। दुआ का मकसद आपसी ताल्लुकात में रहमत और समझ पैदा करना है, न कि किसी को गुलाम बनाना।
अगर बीवी नाराज़ हो तो दुआ के साथ क्या सोच होनी चाहिए?
दुआ के साथ यह सोच होनी चाहिए कि मैं अपनी ज़िम्मेदारी कितनी ईमानदारी से निभा रहा हूँ। अपनी अना (ईगो) को किनारे रखकर यह सोचना चाहिए कि क्या मेरे किसी लफ्ज़ या अमल से उसे तकलीफ पहुँची है। सच्ची नीयत से माफी मांगना और अपने रवैये को सुन्नत के मुताबिक ढालना ही दुआ की कुबूलियत का रास्ता है।
आख़िरी बात
निकाह के इस पाक रिश्ते में असल कामयाबी अल्लाह की रहमत और आपस के इंसाफ में छिपी है। दुआ हमें अल्लाह के करीब लाती है और हमारे दिलों को नर्म करती है। जब एक शौहर अल्लाह पर मुकम्मल भरोसा करके अपनी बीवी के साथ खैरख्वाही और मोहब्बत का मामला करता है, तो अल्लाह खुद उसके घर को सुकून का गहवारा बना देता है। रिश्तों को संवारने के लिए दुआ भी करें और अपने अख़्लाक को भी बेहतर बनाएं।


