Bure khwabon ki dua | बुरे ख़्वाबों की दुआ

By Rokaiya

bure khwabon ki dua main

Quick Summary

Dua Name

Bure Khwabon Ki Dua

Arabic Text

أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ

Hindi Transliteration

अऊज़ु बिल्लाहि मिनश-शैतानिर-रजीम

English Transliteration

Auzu billahi minash-shaitanir-rajim

Source

सहीह मुस्लिम (हदीस: 2261)

अचानक आँख खुलती है, दिल ज़ोरों से धड़क रहा होता है और पूरे जिस्म पर एक अजीब सी बेचैनी छा जाती है। अंधेरे कमरे में ऐसा महसूस होता है जैसे वो डरावना मंज़र हकीकत था। गले में खुश्की और ज़हन में वही खौफनाक ख्याल बार-बार दस्तक देते हैं। अगर आप भी अभी इसी कैफियत से गुज़र रहे हैं, तो इत्मीनान रखिए। आप अकेले नहीं हैं और इसका हल हमारे दीन ने बहुत खूबसूरती से बताया है।

ख़्वाब की हकीकत: घबराने की ज़रूरत नहीं

इस्लाम में ख़्वाबों की तीन किस्में बताई गई हैं। एक वो जो अल्लाह की तरफ से बशारत (खुशखबरी) होते हैं, दूसरे वो जो इंसान के अपने नफ्स के खयालात होते हैं। और तीसरे वो डरावने ख़्वाब जो शैतान की तरफ से होते हैं ताकि मोमिन को परेशान और गमगीन किया जा सके। याद रखिए, जो चीज़ शैतान की तरफ से है, वो आपको कोई हकीकी नुकसान नहीं पहुँचा सकती।


बुरे ख़्वाब से हिफाज़त की मसनून दुआ

जब भी कोई डरावना या नापसंद ख़्वाब देखें और आपकी आँख खुल जाए, तो रसूलुल्लाह ﷺ ने यह कलमात पढ़ने की तालीम दी है:

أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الشَّيْطَانِ الرَّجِيمِ

तलफ़्फ़ुज़ (Talaaffuz):

अऊज़ु बिल्लाहि मिनश-शैतानिर-रजीम

A’udhu billahi minash-shaitanir-rajim

तर्जुमा:

“मैं अल्लाह की पनाह मांगता हूँ शैतान मर्दूद के शर से।”

मस्दर (Sahih Hadith):

सहीह मुस्लिम (हदीस: 2261) में ज़िक्र है कि नबी करीम ﷺ ने फरमाया: “जब तुम में से कोई बुरा ख़्वाब देखे, तो उसे चाहिए कि अल्लाह की पनाह मांगे (अऊज़ु बिल्लाह पढ़े) और किसी को वह ख़्वाब न बताए, तो वह उसे नुकसान नहीं पहुँचाएगा।”


सुन्नत के मुताबिक 5 ज़रूरी आदाब

अगर आपकी नींद किसी बुरे मंज़र की वजह से उचट गई है, तो इन सुन्नत तरीकों पर अमल करें, इंशाअल्लाह फौरन सुकून मिलेगा:

  • बाईं जानिब थुत्कारें: अपने बाएं (Left) कंधे की तरफ तीन बार हल्के से थुत्कारें (बिना थूक के, सिर्फ हवा का हल्का दबाव)।
  • पनाह मांगें: ऊपर दी गई दुआ (अऊज़ु बिल्लाह…) तीन बार पढ़ें।
  • करवट बदल लें: जिस करवट आप सो रहे थे, उसे बदल लें। यह अमल ज़हन को उस डरावनी सोच से हटा देता है।
  • किसी से ज़िक्र न करें: यह सबसे अहम सुन्नत है। डरावना ख़्वाब किसी को न सुनाएं, यहाँ तक कि अपने करीबी दोस्त को भी नहीं।
  • नमाज़ का सहारा: अगर घबराहट खत्म न हो रही हो, तो उठकर वज़ू करें और अल्लाह के सामने सजदा करें।

इन गलतियों से बचें

अक्सर लोग खौफ में आकर कुछ ऐसी गलतियां करते हैं जो सुन्नत के खिलाफ हैं:

  1. वहम पालना: इसे आने वाली किसी मुसीबत की निशानी न समझें।
  2. सोशल मीडिया पर पूछना: अपने ख़्वाबों को पब्लिक न करें, क्योंकि बुरा ख़्वाब ज़िक्र न करने से बे-असर हो जाता है।

आपके सवालात और उनके जवाब

क्या हर बुरा ख़्वाब शैतान की तरफ से होता है?

जी हाँ, ज़्यादातर डरावने ख़्वाब शैतान की तरफ से होते हैं ताकि इंसान खौफ और मायूसी में मुब्तला हो जाए।

क्या बार-बार बुरे ख़्वाब आना कोई इशारा है?

कभी-कभी ज़हनी तनाव या सोने से पहले बहुत ज़्यादा सोचने की वजह से भी ऐसा होता है। अगर ऐसा बार-बार हो, तो सोने से पहले आयतल कुर्सी पढ़ने की पाबंदी करें।

बच्चों को डरावने ख़्वाब आएं तो क्या करें?

बच्चों को वज़ू के साथ सुलाएं और उन पर ‘कुल’ (सूरह इखलास, फलक, नास) पढ़कर दम करें।


डर के बाद सुकून की बात

रात की ये घबराहट महज़ एक आज़माइश है। जैसे ही आप अल्लाह का ज़िक्र शुरू करते हैं, शैतान के वसवसे कमज़ोर पड़ जाते हैं। यकीन रखिए कि आपकी हिफाज़त करने वाला अल्लाह सबसे ताक़तवर है। अब इत्मीनान से दाईं करवट लेटिए और ‘सुब्हानअल्लाह’ का विर्द करते हुए सो जाइए।