Cheenk Aane Ki Dua | छींक आने पर पढ़ी जाने वाली दुआ

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मुख़्तसर रहनुमाई

छींक आने पर पढ़ी जाने वाली दुआ

الْحَمْدُ لِلَّهِ
तलफ़्फ़ुज़:
अल-हम्दु लिल्लाह
तर्जुमा:
सब तारीफें अल्लाह ही के लिए हैं।
मसदर: 
सहीह बुखारी: 6224
cheenk aane ki dua main

Table of Content

Cheenk Ke Sharayi Aadaab

छींक एक कुदरती अमल है जो जिस्म के लिए मुफीद है। इस्लाम ने इसे सादगी और अल्लाह की तारीफ़ के साथ जोड़ा है। जब किसी को छींक आती है, तो यह सुन्नत का तरीका है कि बंदा घबराने या बे-तवज्जो रहने के बजाय अपने रब का शुक्र अदा करे। यह अमल मोमिन के वकार (Dignity) और अल्लाह की तरफ रुजू करने का एक खूबसूरत अंदाज़ है।

Cheenk Aane Par Kya Padhna Chahiye

जब किसी शख्स को छींक आए, तो उस पर सुन्नत है कि वह फौरन अल्लाह की हम्द-ओ-सना (तारीफ़) बयान करे। यह दुआ उस वक्त पढ़ी जाती है जब छींक मुकम्मल हो जाए। यह एक छोटा सा कलिमा है जो बंदे के दिल में अल्लाह की अज़मत को ताज़ा करता है।

Arabic Dua (Sneezing Person)

الْحَمْدُ لِلَّهِ

तलफ़्फ़ुज़

अल-हम्दु लिल्लाह

Hindi

अल्हम्दुलिल्लाह

Roman (Hinglish)

Alhamdulillah

तर्जुमा

सब तारीफें अल्लाह ही के लिए हैं।

Masdar

सहीह बुखारी: 6224


Sunne Wale Ka Jawab

इस्लाम में एक मुसलमान का दूसरे पर यह हक है कि जब वह छींकने वाले को “अल्हम्दुलिल्लाह” कहते हुए सुने, तो उसका जवाब दे। यह आपसी भाईचारे और खैर-ख्वाहि का इज़हार है। याद रहे कि जवाब सिर्फ उसी सूरत में दिया जाएगा जब छींकने वाला शख्स अल्लाह की तारीफ़ (अल्हम्दुलिल्लाह) ज़बान से अदा करे।

Arabic Reply

يَرْحَمُكَ اللَّهُ

तलफ़्फ़ुज़

यर-हमु-कल्लाह

तर्जुमा

अल्लाह तुम पर रहम फरमाए।

Masdar

सहीह बुखारी: 6224


Rozmarrah Zindagi Mein Is Sunnat Ki Ahmiyat

छींक आने पर दुआ पढ़ना और उसका जवाब देना हमारे रोज़ाना के आदाब का हिस्सा है। यह सुन्नत हमें सिखाती है कि हम छोटी-छोटी बातों में भी अल्लाह को याद रखें और दूसरों के लिए रहमत की दुआ करें। जब हम एक-दूसरे को दुआ देते हैं, तो इससे आपसी अखलाक और मोहब्बत में इजाफा होता है। यह एक ऐसा अमल है जो इंसान को तकब्बुर से दूर रखता है और उसे अल्लाह की रहमत का मोहताज बनाता है।


Short Q&A

Agar cheenk par Alhamdulillah na kaha jaye to?
अगर छींकने वाला शख्स “अल्हम्दुलिल्लाह” नहीं कहता, तो सुनने वाले पर उसका जवाब देना सुन्नत नहीं है। सुन्नत के मुताबिक जवाब सिर्फ हम्द सुनने पर ही वाजिब होता है।

Kya yeh dua zor se kehni zaroori hai?
जी हां, छींकने वाले को “अल्हम्दुलिल्लाह” इतनी आवाज़ में कहना चाहिए कि पास बैठा शख्स उसे सुन सके और सुन्नत के मुताबिक उसका जवाब दे सके।


Aakhiri Baat

इस्लाम की तालीमात बेहद सादा और फितरत के करीब हैं। छींक जैसी आम चीज़ पर भी एक मखसूस दुआ का होना अल्लाह की तरफ से हमारे लिए एक तोहफा है। सुन्नत का हुस्न यही है कि हम हर छोटे अमल को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक ढाल लें। यह छोटी सी आदत हमारे लिए दुनिया और आखिरत में बड़ी रहमत का ज़रिया बनती है।