नमाज़ हमारे दीन का सुतून है, और वुज़ू नमाज़ की चाबी है। अक्सर हम जल्दी-जल्दी में वुज़ू कर लेते हैं, लेकिन अगर हम इसे थोड़े ध्यान और सुन्नत तरीक़े से करें, तो यह सिर्फ हाथ-मुँह धोना नहीं, बल्कि एक मुकम्मल इबादत बन जाता है।
The Dua Before and After Wudu पढ़ने से हमारे वुज़ू में रूहानी चमक आ जाती है। आइए जानते हैं कि वुज़ू शुरू करने और ख़त्म करने पर नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हमें कौन सी दुआएँ सिखाई हैं।
Wudu Se Pehle Kya Padhna Chahiye | वुज़ू से पहले क्या पढ़ना चाहिए
वुज़ू शुरू करने से पहले सबसे ज़रूरी चीज़ है ‘निय्यत’। निय्यत का मतलब ज़ुबान से बोलना नहीं है, बल्कि दिल में यह इरादा करना है कि “मैं अल्लाह की इबादत और पाकी हासिल करने के लिए वुज़ू कर रहा हूँ।”
इसके बाद, नबी (स.अ.व.) की सुन्नत यह है कि वुज़ू की शुरुआत अल्लाह के नाम से की जाए।
1. Dua Before Wudu (Masnoon) | वुज़ू शुरू करने की मसनून दुआ
Arabic Text (अरबी):
بِسْمِ اللَّهِ
तलफ़्फ़ुज़ (Talaffuz):
बिस्मिल्लाह
Devanagari (हिंदी):
बिस्मिल्लाह
Roman English:
Bismillah
तर्जुमा (Tarjuma):
“अल्लाह के नाम से (शुरू करता हूँ)।”
माखज़ (Reference):
नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “उस शख्स का वुज़ू नहीं (कामिल नहीं) जिसने वुज़ू के शुरू में अल्लाह का नाम न लिया हो।”
(सुनन अबी दाऊद: 101, सहीह)
Wudu Ke Baad Ki Masnoon Dua | वुज़ू के बाद की मसनून दुआ
जब आप वुज़ू मुकम्मल कर लें, तो आसमान की तरफ नज़र उठा कर या क़िब्ला रुख होकर यह दुआ पढ़ें। यह दुआ दो हिस्सों में है: पहले हम अपने ईमान (कलिमा शहादत) का इक़रार करते हैं, और फिर अल्लाह से अपनी ज़ाहिरी और बातिनी सफाई की दुआ करते हैं।
इस दुआ की फ़ज़ीलत बहुत बड़ी है—इसे पढ़ने वाले के लिए जन्नत के आठों दरवाज़े खोल दिए जाते हैं।
2. Dua After Wudu (Full) | वुज़ू के बाद की पूरी दुआ
Arabic Text (अरबी):
أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي مِنَ التَّوَّابِينَ وَاجْعَلْنِي مِنَ الْمُتَطَهِّرِينَ
तलफ़्फ़ुज़ (Talaffuz):
अशहदु अन ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहु ला शरीक लहु, व अशहदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहु व रसूलुहु।
अल्लाहुम्मा ज-अलनी मिनत-तव्वाबीना वज-अलनी मिनल-मुततहिरीन।
Devanagari (हिंदी):
अशहदु अन ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहु ला शरीक लहु, व अशहदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहु व रसूलुहु।
अल्लाहुम्मा ज-अलनी मिनत-तव्वाबीना वज-अलनी मिनल-मुततहिरीन।
Roman English:
Ash-hadu an la ilaha illallahu wahdahu la sharika lahu, wa ash-hadu anna Muhammadan abduhu wa rasuluhu.
Allahummaj-alni minat-tawwabeena waj-alni minal-mutatahhireen.
तर्जुमा (Tarjuma):
“मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद (ﷺ) उसके बंदे और रसूल हैं।
ऐ अल्लाह! मुझे तौबा करने वालों में शामिल फरमा और मुझे खूब पाक रहने वालों में से बना दे।”
माखज़ (Reference):
(जामे तिर्मिज़ी: 55, सहीह)
Wudu Aur Safai Ka Gahra Rishta | वुज़ू और सफाई का गहरा रिश्ता
इस्लाम सिर्फ बदन की सफाई नहीं, बल्कि रूह (Soul) की सफाई भी चाहता है।
- पानी: हमारे चेहरे और हाथों का मेल साफ़ करता है।
- दुआ: हमारे दिल से गुनाहों का बोझ हटाती है।
वुज़ू के बाद वाली दुआ में “तव्वाबीन” (तौबा करने वाले) और “मुततहिरीन” (पाक रहने वाले) के अल्फाज़ आते हैं। इसका मतलब है कि हम अल्लाह से माँग रहे हैं कि वह हमें अंदर और बाहर, दोनों तरह से उम्दा और साफ़-सुथरा इंसान बना दे।
Short Q&A (Wudu-Related Doubts) | वुज़ू से जुड़े कुछ आम सवाल
अक्सर लोगों के ज़हन में वुज़ू की दुआओं को लेकर कुछ सवाल होते हैं। यहाँ उनके आसान जवाब हैं:
- सवाल: अगर वुज़ू से पहले ‘बिस्मिल्लाह’ भूल गए तो क्या वुज़ू दोबारा करना होगा?
- जवाब: नहीं, वुज़ू हो जाएगा। लेकिन जानबूझ कर नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि यह सुन्नत है। अगर बीच में याद आए, तो दिल में अल्लाह का नाम ले लें।
- सवाल: क्या वुज़ू के बाद दुआ पढ़ना ज़रूरी (फर्ज़) है?
- जवाब: यह फर्ज़ नहीं, बल्कि सुन्नत है। इसे पढ़ने से बहुत बड़ा सवाब मिलता है, लेकिन अगर न पढ़ें तो वुज़ू नहीं टूटता।
- सवाल: अगर पूरी दुआ अरबी में याद न हो तो क्या करें?
- जवाब: जब तक अरबी याद न हो, आप इसे मोबाइल में देखकर पढ़ सकते हैं। कोशिश करें कि धीरे-धीरे इसे याद कर लें क्योंकि यह बहुत छोटी और आसान दुआ है।
Sahi Aadab Ke Saath Wudu | सही आदाब के साथ वुज़ू
The Dua Before and After Wudu पढ़ने की आदत डालना बहुत आसान है, बस थोड़ी सी तवज्जो (focus) की ज़रूरत है। अगली बार जब आप वुज़ू के लिए नल (Tap) खोलें, तो “बिस्मिल्लाह” से शुरुआत करें और वुज़ू ख़त्म करते ही शहादत की उंगली उठाकर दुआ पढ़ें।
अल्लाह तआला हमारी छोटी-छोटी कोशिशों को कुबूल फरमाए और हमें नमाज़ की पाबंदी नसीब करे। आमीन।


