
दुआ ए मसूरा: गुनाहों की माफी और रहमत की दुआ
March 9, 2025 | By Rokaiya
दुआ करना हर मुसलमान की ज़िंदगी का अहम हिस्सा है। यह अल्लाह से बात करने का तरीका है, जिससे हम अपनी गलतियों की माफी माँगते हैं और उसकी रहमत तलब करते हैं। भारत में लोग “दुआ ए मसूरा” (Dua E Masura) को खास तौर पर ढूंढते हैं, क्योंकि यह एक ऐसी दुआ है जो गुनाहों की माफी और सुकून का वादा करती है। हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इसे अपने सहाबी हज़रत अबू बकर (र.अ.) को सिखाया। यह दुआ छोटी मगर बहुत ताकतवर है। यहाँ हम आपको सही दुआ बताएँगे, जो हदीस से साबित है। इसके मतलब और फायदे जानकर आप इसे अपनी नमाज़ में शामिल करना चाहेंगे।
📜 दुआ ए मसूरा (सही और आसान)
“दुआ ए मसूरा” नबी (स.अ.व.) की सुन्नत है। इसे नमाज़ में पढ़ना पसंद किया जाता है, मगर यह ज़रूरी नहीं। यहाँ वह दुआ है जो हदीस से सही है।
📜 अरबी में दुआ:
اللَّهُمَّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي ظُلْمًا كَثِيرًا وَلَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ فَاغْفِرْ لِي مَغْفِرَةً مِنْ عِنْدِكَ وَارْحَمْنِي إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
📜 हिंदी में लिखावट:
अल्लाहुम्मा इन्नी ज़लमतु नफ्सी ज़ुल्मन कसीरन वला यग़्फिरुज़ ज़ुनूबा इल्ला अन्त फग़्फिरली मग़्फिरतम मिन इंदिक वरहमनी इन्नका अन्तल ग़फूरुर रहीम
📜 हिंदी में मतलब:
“ऐ अल्लाह! मैंने अपने आप पर बहुत ज़ुल्म किया, और गुनाहों को माफ करने वाला तुझ सिवा कोई नहीं। तो मुझे अपनी तरफ से माफी दे और मुझ पर रहम कर। बेशक तू बहुत माफ करने वाला और रहम करने वाला है।”
📜 English Transliteration:
Allahumma inni zalamtu nafsi zulman kathiran wala yaghfirudh-dhunuba illa anta, faghfirli maghfiratan min ‘indika warhamni, innaka antal ghafurur rahim
📜 English Translation:
“O Allah! I have wronged myself greatly, and none forgives sins except You. So grant me forgiveness from You and have mercy on me. Indeed, You are the Most Forgiving, the Most Merciful.”
माखज़ (Source):
- यह दुआ सही बुखारी (हदीस 834) और सही मुस्लिम (हदीस 2705) में हज़रत अबू बकर (र.अ.) से रिवायत है। अबू बकर (र.अ.) ने नबी (स.अ.व.) से कहा, “मुझे एक दुआ सिखाइए जो मैं नमाज़ में पढ़ूँ।” नबी (स.अ.व.) ने यह दुआ सिखाई।
- यह सही (Sahih) है और माफी माँगने की सबसे बड़ी दुआ मानी जाती है।
दुआ ए मसूरा की अहमियत
दुआ ए मसूरा दिल से अल्लाह के सामने अपनी गलतियाँ कबूल करने का ज़रिया है। सूरह अश-शूरा (42:25) में अल्लाह फरमाता है: “वह अपने बन्दों की तौबा कुबूल करता है और गुनाहों को माफ करता है।” यह दुआ हमें अपनी कमज़ोरियों का एहसास दिलाती है और अल्लाह की रहमत पर भरोसा बढ़ाती है। नबी (स.अ.व.) ने फरमाया: “हर बन्दा गुनाह करता है, और बेहतरीन गुनाहगार वह है जो तौबा करे” (सुनन तिर्मिज़ी, हदीस 2499)। इस दुआ को पढ़ने से गुनाह माफ होते हैं और दिल को सुकून मिलता है। भारत में लोग इसे नमाज़ में या मुश्किल वक़्त में पढ़ते हैं। यह हमें याद दिलाती है कि अल्लाह के सिवा कोई माफ करने वाला नहीं।
दुआ ए मसूरा कब और कैसे पढ़ें?
दुआ ए मसूरा को पढ़ना आसान है। यहाँ सही तरीका है:
- नमाज़ में: नमाज़ की आखिरी रकअत में, दुरूद-ए-इब्राहीम के बाद और सलाम फेरने से पहले पढ़ें।
- वुज़ू के साथ: वुज़ू करके पढ़ना बेहतर है, मगर बिना वुज़ू के भी जायज़ है।
- दिल से माँगें: इसे शिद्दत और यकीन के साथ पढ़ें।
- किसी भी वक़्त: नमाज़ के अलावा भी, खासकर मुश्किल में, इसे पढ़ सकते हैं।
कब पढ़ें:
- हर नमाज़ के बाद। हनफी मज़हब में इसे नमाज़ में पढ़ना पसंद करते हैं, मगर यह ज़रूरी नहीं।
- मुश्किल वक़्त में या गुनाहों की माफी के लिए।
दुआ ए मसूरा के फायदे
- गुनाहों की माफी: यह दुआ पिछले गुनाहों को माफ करवाती है।
- सुकून: दिल और दिमाग को राहत मिलती है।
- रहमत: अल्लाह की खास रहमत नाज़िल होती है।
- तौबा: यह तौबा का रास्ता खोलती है।
सूरह अल-फुरकान (25:70) में अल्लाह का वादा है: “जो तौबा करे और नेक काम करे, अल्लाह उसके गुनाहों को भलाई से बदल देता है।” यह दुआ उस वादे को पूरा करने में मदद करती है।
📌 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. क्या दुआ ए मसूरा नमाज़ में पढ़ना ज़रूरी है?
नहीं, यह सुन्नत है, मगर नमाज़ के लिए शर्त नहीं।
2. अगर दुआ याद न हो तो क्या करें?
“रब्बिग्फिरली वरहमनी” (ऐ मेरे रब! मुझे माफ कर और रहम कर) पढ़ें।
3. क्या औरतें और बच्चे भी पढ़ सकते हैं?
हाँ, यह दुआ हर मुसलमान के लिए है।
4. इसे कितनी बार पढ़ना चाहिए?
जितनी बार चाहें, मगर हर नमाज़ में पढ़ना बेहतर है।
आखिरी बात
“दुआ ए मसूरा” गुनाहों की माफी और अल्लाह की रहमत का खज़ाना है। “अल्लाहुम्मा इन्नी ज़लमतु नफ्सी…” को नमाज़ में या किसी भी वक़्त दिल से पढ़ें। भारत में लोग इसे मुश्किल हालात में सुकून के लिए पढ़ते हैं। इसे अपनी आदत बनाएँ और अल्लाह से माफी माँगें। यह छोटी दुआ आपकी ज़िंदगी में बड़ी राहत लाएगी। और दुआओं के लिए Dua India पर जाएँ। अल्लाह हमें माफी और सुकून दे, आमीन!