Dua for Rizq: Powerful Duas for Barakah, Success, and Removing Poverty

By Rokaiya

dua e rizq in hindi

Quick Summary

Dua Name

Dua For Rizq

Arabic Text

اللَّهُمَّ اكْفِنِي بِحَلَالِكَ عَنْ حَرَامِكَ وَأَغْنِنِي بِفَضْلِكَ عَمَّنْ سِوَاكَ

Hindi Transliteration

अल्लाहुम-मक्फिनी बिहलालिका अन हरामिका व अग़्निनी बिफज़्लिका अम्मन सिवाक

English Transliteration

Allahumma-kfini bihalalika ‘an haramika, wa aghnini bifadlika ‘amman siwaka

Source

जामिअ़ तिर्मिज़ी: हदीस 3563

दीन-ए-इस्लाम में हलाल और बाबरकत रोज़ी कमाना न सिर्फ़ ज़रूरत है बल्कि एक इबादत भी है। अपनी ज़िंदगी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए मेहनत करना और साथ ही अल्लाह ताला से रिज़्क़ (Rizq) के लिए दुआ करना एक मोमिन की पहचान है।

अक्सर इंसान अपनी मेहनत के बावजूद माली तंगी (Financial issues) या फ़क़ीरी (Poverty) का सामना करता है। ऐसे वक़्त में अल्लाह की बारगाह में रुजू करना और मसनून दुआएं पढ़ना बरकत का ज़रिया बनता है। इस मुकम्मल गाइड में हम Dua e Rizq, रिज़्क़ में इज़ाफ़ा की दुआ और तंगी दूर करने के सुन्नत तरीक़ों को तफ़सील से जानेंगे।


1. रिज़्क़ में बरकत और हलाल रोज़ी की दुआ (Dua e Rizq)

अगर आप चाहते हैं कि आपकी कमाई में बरकत हो और अल्लाह आपको हराम रास्तों से बचाकर हलाल रिज़्क़ अता करे, तो यह दुआ कसरत से पढ़ें। यह Rizq ki dua दिल को सुकून देती है और दूसरों की मोहताजी से बचाती है।

अरबी (Arabic):

اللَّهُمَّ اكْفِنِي بِحَلَالِكَ عَنْ حَرَامِكَ وَأَغْنِنِي بِفَضْلِكَ عَمَّنْ سِوَاكَ

रोमन इंग्लिश (Transliteration):

Allahummak-fini bi-halalika ‘an haramika, wa agnini bi-fadlika ‘amman siwaka.

हिंदी तर्जुमा (Hindi Translation):

“ऐ अल्लाह! मुझे अपने हलाल (रिज़्क़) के साथ अपने हराम से बचा ले और मुझे अपने फ़ज़ल (मेहरबानी) से अपने सिवा हर किसी से बे-नियाज़ (ग़नी) कर दे।”

हवाला (Reference): यह जामे दुआ जामिअ़ तिर्मिज़ी (हदीस: 3563) से साबित है।


2. रिज़्क़ में इज़ाफ़ा और कामयाबी की दुआ (Dua for Success)

सुब्ह की नमाज़ के बाद अपने दिन की शुरुआत इस दुआ से करना सुन्नत है। यह दुआ न सिर्फ़ रिज़्क़ में इज़ाफ़ा बल्कि इल्म और नेक आमाल में कामयाबी के लिए भी निहायत मुफीद है।

अरबी (Arabic):

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا، وَرِزْقًا طَيِّبًا، وَعَمَلًا مُتَقَبَّلًا

रोमन इंग्लिश (Transliteration):

Allahumma inni as-aluka ilman nafi’an, wa rizqan tayyiban, wa ‘amalam mutaqabbalan.

हिंदी तर्जुमा (Hindi Translation):

“ऐ अल्लाह! मैं तुझसे नफ़ा देने वाले इल्म (Knowledge), पाकीज़ा रिज़्क़ (Provision) और क़बूल होने वाले अमल का सवाल करता हूँ।”

हवाला (Reference): यह दुआ सुनन इब्ने माजह (हदीस: 925) में मौजूद है।


3. फ़क़ीरी और माली तंगी दूर करने की दुआ (Removing Poverty)

जब हालात मुश्किल हो जाएं और फ़क़ीरी (Poverty) का डर सताने लगे, तो अल्लाह की पनाह मांगना ज़रूरी है। यह दुआ इंसान को माली परेशानी और क़ब्र के अज़ाब, दोनों से महफ़ूज़ रखने के लिए पढ़ी जाती है।

अरबी (Arabic):

اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْكُفْرِ وَالْفَقْرِ، وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ، لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ

रोमन इंग्लिश (Transliteration):

Allahumma inni a’uzu bika minal-kufri wal-faqri, wa a’uzu bika min ‘azabil-qabri, la ilaha illa anta.

हिंदी तर्जुमा (Hindi Translation):

“ऐ अल्लाह! मैं कुफ़्र और फ़क़ीरी (ग़रीबी) से तेरी पनाह मांगता हूँ, और मैं क़ब्र के अज़ाब से तेरी पनाह मांगता हूँ। तेरे सिवा कोई माबूद नहीं।”

हवाला (Reference): यह हदीस सुनन अन-नसाई (हदीस: 1347) से साबित है।


4. रिज़्क़ में बरकत के इस्लामी तरीके (Ways to increase Barakah)

दुआओं के साथ-साथ अपनी ज़िंदगी में इन आमाल को शामिल करना Barakah का बाइस बनता है:

  • तक़वा (Taqwa) इख़्तियार करना: अल्लाह से डरना और हराम कामों से बचना रिज़्क़ के दरवाज़े खोल देता है।
  • इस्तिग़फ़ार (Astaghfar) की कसरत: अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी मांगना रिज़्क़ में इज़ाफ़ा का बहुत बड़ा ज़रिया है।
  • शुक्र अदा करना: जो कुछ आपके पास है, उस पर अल्लाह का शुक्र अदा करें। अल्लाह का वादा है कि “अगर तुम शुक्र करोगे, तो मैं तुम्हें और ज़्यादा दूंगा।”
  • रिश्तेदारों से अच्छा सुलूक (Sila-e-Rahmi): अपनों के साथ अच्छा बर्ताव करना और उनकी मदद करना उम्र और रिज़्क़ में बरकत लाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवालात (FAQs)

सवाल: क्या Rizq mein izafa ki dua पढ़ने से अचानक अमीर बन जाते हैं?
जवाब: अल्लाह की तरफ़ से बरकत का मतलब सिर्फ़ ज़्यादा पैसा नहीं, बल्कि पैसों में सुकून और ज़रूरत का पूरा होना है। दुआ के साथ-साथ नेक नियत से मेहनत करना भी ज़रूरी है।

सवाल: रिज़्क़ की तंगी (Financial crisis) दूर करने के लिए कौन सी सूरत पढ़नी चाहिए?
जवाब: हदीस की रौशनी में, हर रात सूरह वाक़िआ (Surah Waqiah) पढ़ने से इंसान कभी भी फ़ाक़ा-कशी (Ghor poverty) का शिकार नहीं होता।

सवाल: दुआ की क़बूलियत का सबसे अच्छा वक़्त कौन सा है?
जवाब: सुब्ह की नमाज़ के बाद, तहज्जुद के वक़्त और जुम्मा के दिन दुआ की क़बूलियत के ख़ास इम्कानात (Possibilities) होते हैं।


अल्लाह ताला हम सबको हलाल रिज़्क़ अता फरमाए, हमारी कमाई में बे-पन्हा बरकत दे और हमें किसी का मोहताज न बनाए। आमीन।