दीन-ए-इस्लाम में इंसान की ज़िंदगी और उसकी सेहत को अल्लाह की तरफ़ से एक अज़ीम नेमत माना गया है। हमारी रोज़मर्रा की भागदौड़ में अक्सर हमें या हमारे घर वालों को छोटी-बड़ी बीमारियों और तकलीफ़ों का सामना करना पड़ता है। ऐसे वक़्त में एक मोमिन का शेवा यह है कि वह दवा और इलाज के साथ-साथ अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की बारगाह में हाथ फैलाए और शिफ़ा (Shifa) तलब करे।
चाहे आपको सख़्त दांत दर्द (Daant Dard) हो, पुराना सर दर्द (Headache) हो, या कोई ऐसी बीमारी जिसने आपको कमज़ोर कर दिया हो, हदीस-ए-पाक में हर मर्ज़ (Sickness) का रूहानी इलाज मौजूद है। इस मुकम्मल गाइड में हम Bimari se shifa ki dua और मुक़्तलिफ़ दर्द से निजात के मसनून तरीक़ों को तफ़सील से जानेंगे।
1. दांत दर्द की दुआ (Daant Dard Ki Dua)
दांत या दाढ़ का दर्द इंसान को बेहाल कर देता है और अक्सर रातों की नींद उड़ा देता है। हदीस में दांत दर्द से छुटकारा पाने की दुआ और उसका एक बहुत ही आसान और असरदार सुन्नत तरीक़ा बताया गया है। अगर आप या आपके घर में कोई बच्चा इस तकलीफ़ से गुज़र रहा है, तो इस पर अमल करें:
सुन्नत तरीक़ा: जहाँ दर्द हो रहा है (दांत, मसूड़े या दाढ़ पर), वहाँ अपनी उंगली या दाहिना हाथ रखें। सबसे पहले 3 मर्तबा “बिस्मिल्लाह” कहें, और फिर 7 मर्तबा नीचे दी गई दुआ पूरी तवज्जो के साथ पढ़ें:
अरबी (Arabic):
أَعُوذُ بِاللَّهِ وَقُدْرَتِهِ مِنْ شَرِّ مَا أَجِدُ وَأُحَاذِرُ
रोमन इंग्लिश (Transliteration):
Auzu billahi wa qudaratihi min sharri ma ajidu wa uhaziru.
हिंदी तर्जुमा (Hindi Translation):
“मैं अल्लाह की ज़ात और उसकी क़ुदरत की पनाह मांगता हूँ उस तकलीफ़ (दांत दर्द) की बुराई से, जो मैं महसूस कर रहा हूँ और जिससे मैं खौफ (डर) खाता हूँ।”
हवाला (Reference): यह Daant dard ki dua सहीह मुस्लिम (हदीस नम्बर: 2202) से साबित है।

2. सर दर्द की सुन्नत दुआ (Sar Dard Ki Dua)
आज के दौर की मसरूफ़ ज़िंदगी और तनाव (Stress) की वजह से सर दर्द (Headache) एक आम मसला बन गया है। कुछ लोग आधे सर के दर्द (Migraine) से भी परेशान रहते हैं। हदीस की रौशनी में Sir dard ki dua sunnat वही है जो ऊपर बयान की गई है, क्योंकि नबी-ए-करीम (ﷺ) ने जिस्म के किसी भी हिस्से के दर्द के लिए यही दुआ सिखाई है।
अमल करने का तरीक़ा: अपना दाहिना हाथ सर पर रखें और 3 बार “बिस्मिल्लाह” कहने के बाद 7 मर्तबा यह दुआ दोहराएं:
अरबी (Arabic):
أَعُوذُ بِعِزَّةِ اللَّهِ وَقُدْرَتِهِ مِنْ شَرِّ مَا أَجِدُ وَأُحَاذِرُ
रोमन इंग्लिश (Transliteration):
Auzu bi-izztillahi wa qudaratihi min sharri ma ajidu wa uhaziru.
हिंदी तर्जुमा (Hindi Translation):
“मैं अल्लाह की इज़्ज़त और उसकी क़ुदरत की पनाह मांगता हूँ उस (सिर दर्द) की बुराई से, जिसे मैं महसूस करता हूँ और जिससे मैं डरता हूँ।”
हवाला (Reference): सहीह मुस्लिम।

3. हर बीमारी से शिफ़ा की दुआ (Sehat Yabi Ki Dua)
जब कोई इंसान किसी भी तरह की जिस्मानी बीमारी, बुख़ार या कमज़ोरी में मुब्तला हो, तो उसे अल्लाह से Sehat yabi ki dua मांगनी चाहिए। हदीस में आता है कि जब नबी-ए-करीम (ﷺ) किसी बीमार की इयादत (Visit) के लिए तशरीफ़ ले जाते, तो उसकी सेहत के लिए यह दुआ पढ़ते थे। यह Dua for Sickness बहुत जामे (Complete) दुआ है।
अरबी (Arabic):
اللَّهُمَّ رَبَّ النَّاسِ أَذْهِبِ الْبَاسَ، اشْفِهِ وَأَنْتَ الشَّافِي، لَا شِفَاءَ إِلَّا شِفَاؤُكَ، شِفَاءً لَا يُغَادِرُ سَقَمًا
रोमन इंग्लिश (Transliteration):
Allahumma rabban-nasi azhibil-ba-s ishafihi wa antash-shafi la shifa-a illa shifa-u-ka shifa-an la yugadiru saqma.
हिंदी तर्जुमा (Hindi Translation):
“ऐ अल्लाह! लोगों के रब, इस तकलीफ़ को दूर कर दे। तू ही शिफ़ा देने वाला है, तू शिफ़ा अता फरमा। तेरी शिफ़ा के सिवा कोई शिफ़ा नहीं है, ऐसी शिफ़ा अता कर जो किसी भी बीमारी को बाक़ी न छोड़े।”
हवाला (Reference): सहीह बुख़ारी (5675), सहीह मुस्लिम (2191)।
4. दर्द और तकलीफ़ में राहत के इस्लामी आदाब
इस्लाम सिर्फ दुआ ही नहीं, बल्कि एक मुकम्मल ज़ाबता-ए-हयात (Code of life) है। बीमारी और दर्द के वक़्त हमें इन बातों पर भी अमल करना चाहिए:
- सब्र और शुक्र: बीमारी मोमिन के लिए गुनाहों का कफ़्फ़ारा (धो देना) बनती है। इसलिए सख़्त तकलीफ़ में भी सब्र का दामन न छोड़ें।
- दवा और इलाज: नबी-ए-करीम (ﷺ) ने फ़रमाया कि अल्लाह ने हर बीमारी की दवा उतारी है। लिहाज़ा दुआ के साथ-साथ माहिर डॉक्टर से इलाज करवाना भी सुन्नत है।
- सदक़ा (Sadaqah) देना: हदीस में आता है कि “अपने बीमारों का इलाज सदक़े के ज़रिए करो।” सदक़ा बलाओं और मुसीबतों को टालता है।
- पाकीज़गी: वुज़ू की हालत में रहना और साफ़-सफ़ाई का ख़्याल रखना शिफ़ा के अमल को तेज़ करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवालात (FAQs)
सवाल: क्या Daant dard ki dua को पानी पर दम करके पी सकते हैं?
जवाब: जी हां, कुरानी आयात और मुस्तनद दुआओं को पानी पर दम करके पीना या बीमार पर दम करना (Ruqyah) सुन्नत से साबित है और इसमें बड़ी बरकत है।
सवाल: अगर दुआ के बाद भी दर्द फौरन कम न हो तो क्या करें?
जवाब: दुआ की क़बूलियत के लिए यकीन का होना ज़रूरी है। अल्लाह की हिकमत पर भरोसा रखें, मुसलसल दुआ करते रहें और साथ ही डॉक्टरी इलाज भी जारी रखें। कभी-कभी अल्लाह हमारे सब्र को आज़माता है।
सवाल: क्या यह दुआएं हम किसी और की तरफ़ से पढ़ सकते हैं?
जवाब: जी बिल्कुल, आप अपने बच्चों, वालिदैन या किसी भी अज़ीज़ के लिए उनका हाथ पकड़कर या दर्द वाली जगह पर हाथ रखकर यह दुआएं पढ़ सकते हैं।
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त तमाम उम्मत-ए-मुस्लिमा को हर तरह की जिस्मानी और रूहानी बीमारियों से नजात अता फरमाए और सबको सेहत-ए-कामिना नसीब करे। आमीन।
