Dukan Kholne Ki Dua | दुकान खोलते वक़्त पढ़ने की दुआ

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मुख़्तसर रहनुमाई

दुकान खोलते वक़्त पढ़ने की दुआ

بِسْمِ اللَّهِ تَوَكَّلْتُ عَلَى اللَّهِ، لاَ حَوْلَ وَلاَ قُوَّةَ إِلاَّ بِاللَّهِ
तलफ़्फ़ुज़:
बिसमिल्लाहि तवक्कलतु अलल्लाहि, ला हौला वला कुव्वता इल्ला बिल्लाह।
तर्जुमा:
अल्लाह के नाम के साथ, मैंने अल्लाह पर भरोसा किया, गुनाहों से बचने और नेक काम करने की ताक़त अल्लाह की तौफ़ीक़ के बग़ैर मुमकिन नहीं।
मसदर: 
सुनन अबू दाऊद: 5095
dukan kholne ki dua main

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Tijarat Aur Rizq Ka Islami Nazariya

इस्लाम में हलाल रिज़्क़ की जुस्तजू को इबादत के बराबर माना गया है। एक मुसलमान जब अपनी दुकान या कारोबार के लिए निकलता है, तो वह सिर्फ पैसे कमाने नहीं, बल्कि अल्लाह के दिए हुए फ़ज़ल को तलाश करने निकलता है। कुरआन और हदीस की रौशनी में हमें यह मिलता है कि रिज़्क़ का मालिक सिर्फ अल्लाह है। मेहनत करना इंसान की ज़िम्मेदारी है, लेकिन उस मेहनत में बरकत और तरक्की अता करना अल्लाह के हाथ में है। तिजारत में कामयाबी के लिए सही नियत और अल्लाह पर मुकम्मल यकीन सबसे बुनियादी चीज़ है।

Dukan Shuru Karte Waqt Dil Ka Andaz

दुकान खोलना सिर्फ एक रोज़ाना का मामूल नहीं है, बल्कि यह एक नई शुरुआत है। जब आप अपनी दुकान का शटर उठाते हैं या चाबी लगाते हैं, तो उस वक़्त आपके दिल में यह ख्याल होना चाहिए कि “ऐ अल्लाह, मैं तेरी दी हुई तौफ़ीक़ से आज का काम शुरू कर रहा हूँ।” एक दुकानदार को चाहिए कि वह अपनी दुकान की शुरुआत पुरसुकून दिल और ज़िक्र-ए-इलाही के साथ करे। इससे न सिर्फ कारोबार में बरकत होती है, बल्कि पूरे दिन के काम-काज में अल्लाह की मदद शामिल रहती है।

Masnoon Duas Jo Tijarat Ke Aagaz Par Padhi Ja Sakti Hain

दुकान खोलने के वक़्त के लिए कोई एक अलग से ईजाद की गई दुआ नहीं है, बल्कि नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने बाज़ार में दाख़िल होते वक़्त और काम की शुरुआत के लिए जो दुआएं सिखाई हैं, वही सबसे मुस्तनद और अफ़ज़ल हैं।

1. Dukan Mein Dakhil Hone Ki Dua

दुकान खोलते वक़्त और उसमें पहला क़दम रखते वक़्त यह दुआ पढ़ना सुन्नत से साबित है:

Arabic Dua

بِسْمِ اللَّهِ تَوَكَّلْتُ عَلَى اللَّهِ، لاَ حَوْلَ وَلاَ قُوَّةَ إِلاَّ بِاللَّهِ

तलफ़्फ़ुज़

बिसमिल्लाहि तवक्कलतु अलल्लाहि, ला हौला वला कुव्वता इल्ला बिल्लाह।

Roman (Hinglish)

Bismillahi tawakkaltu alallahi, la hawla wala quwwata illa billah.

तर्जुमा

अल्लाह के नाम के साथ, मैंने अल्लाह पर भरोसा किया, गुनाहों से बचने और नेक काम करने की ताक़त अल्लाह की तौफ़ीक़ के बग़ैर मुमकिन नहीं।

Masdar

सुनन अबू दाऊद: 5095 (घर या दुकान में दाख़िल होते वक़्त की मसनून दुआ)।


2. Bazar Aur Tijarat Mein Barkat Ki Dua

जब आप बाज़ार में अपनी दुकान पर पहुंचे, तो यह अज़ीम दुआ ज़रूर पढ़ें। हदीस में इसके पढ़ने वाले के लिए बहुत बड़े अज़्र की बशारत दी गई है:

Arabic Dua

لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، يُحْيِي وَيُمِيتُ، وَهُوَ حَيٌّ لَا يَمُوتُ، بِيَدِهِ الْخَيْرُ، وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ

तलफ़्फ़ुज़

ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीका लहू, लहुल मुल्कु वलहुल हम्दु, युहयी व युमीतु वहुवा हय्युन ला यमूतु, बियदिहिल खैरु वहुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर।

Roman (Hinglish)

La ilaha illallahu wahdahu la sharika lahu, lahul mulku wa lahul hamdu, yuhyi wa yumitu wa huwa hayyun la yamutu, biyadihil khairu wa huwa ala kulli shayin qadir.

तर्जुमा

अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। उसी की बादशाही है और उसी के लिए तमाम तारीफें हैं। वही ज़िन्दगी देता है और वही मौत देता है। वह हमेशा ज़िन्दा रहने वाला है, उसे मौत नहीं आएगी। तमाम भलाई उसी के हाथ में है और वह हर चीज़ पर क़ादिर है।

Masdar

सुनन अत्-तिर्मिज़ी: 3428 (बाज़ार में दाख़िल होते वक़्त की मसनून दुआ)।

Dua Ke Saath Amal Kyun Zaroori Hai

दुआ अल्लाह से मांगने का नाम है, लेकिन इस्लाम हमें हाथ पर हाथ रखकर बैठने की इजाज़त नहीं देता। तिजारत में बरकत के लिए ईमानदारी, वक्त की पाबंदी और सच बोलना लाजमी है। अगर एक दुकानदार दुआ भी पढ़ता है और साथ ही ग्राहकों के साथ नर्म मिज़ाजी और सच्चाई से पेश आता है, तो अल्लाह उसके रिज़्क़ में बेपनाह बरकत अता फरमाता है। खयानत और झूठ से रिज़्क़ की बरकत खत्म हो जाती है, इसलिए अपने कारोबार को पाक रखें।

Rozana Dukan Mein Barkat Ka Mehsoos Karne Ka Andaz

बरकत का मतलब सिर्फ ज़्यादा पैसा नहीं, बल्कि उस पैसे में सुकून और इत्मीनान का होना है। सुबह के वक़्त दुकान जल्दी खोलना सुन्नत है क्योंकि नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपनी उम्मत के लिए सुबह के वक़्त में बरकत की दुआ फरमाई है। दुकान पर ख़ाली वक़्त में मोबाइल या बेकार की बातों में वक़्त ज़ाया करने के बजाय अस्तगफ़ार करते रहें। शाम को जब आप अपनी दुकान बढ़ाएं, तो अल्लाह का शुक्र अदा करें कि उसने आपको इज़्ज़त के साथ रिज़्क़ अता किया।

Short Q&A (High-Intent Searches)

क्या दुकान रोज़ खोलते वक़्त एक ही दुआ पढ़ सकते हैं?

जी हाँ, मसनून दुआओं को अपना मामूल बनाना बहुत फ़ायदेमंद है। आप रोज़ाना दुकान खोलते वक़्त “बिस्मिल्लाह” और “तवक्कलतु अलल्लाह” वाली दुआ पढ़ सकते हैं। इससे आप पूरे दिन अल्लाह की हिफ़ाज़त में रहते हैं।

क्या अपनी ज़ुबान में अल्लाह से बरकत मांगना जाइज़ है?

बिल्कुल जाइज़ है। मसनून दुआएं अरबी में पढ़ना अफ़ज़ल है, लेकिन उसके बाद आप अपनी ज़ुबान में भी अल्लाह से अपने कारोबार की तरक्की और हलाल रिज़्क़ की दुआ मांग सकते हैं। अल्लाह हर दिल की आवाज़ सुनता है।

आख़िरी बात

तिजारत में कामयाबी के लिए दुआ एक मज़बूत सहारा है। जब एक बंदा अल्लाह पर पूरा भरोसा (तवक्कुल) करके अपनी दुकान खोलता है, तो अल्लाह उसके लिए ऐसे रास्तों से रिज़्क़ का इंतज़ाम करता है जहाँ से उसका गुमान भी नहीं होता। अपनी मेहनत जारी रखें, नियत साफ़ रखें और हमेशा अल्लाह का शुक्र अदा करते रहें। अल्लाह हमारे रिज़्क़ में बरकत और हमारे दिलों को सुकून अता फरमाए।

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