Quick Summary
Dua Name
Garaj Ki Dua
Arabic Text
سُبْحَانَ الَّذِي يُسَبِّحُ الرَّعْدُ بِحَمْدِهِ وَالْمَلَائِكَةُ مِنْ خِيفَتِهِ
Hindi Transliteration
सुब्हानल्लज़ी युसब्बिहुर-रा'दु बि-हम्दिही वल-मलाइकतु मिन ख़ीफ़तिही
English Transliteration
Subhanallazi yusabbihur-ra'du bi-hamdihi wal-malaikatu min khiftihi
Source
अल-मुवत्ता इमाम मालिक: 1801, सहीह मौकूफ़
बारिश का मौसम जहाँ एक तरफ़ अल्लाह की रहमत लेकर आता है (देखें: Baarish Ki Dua), वहीं अचानक आसमान से आने वाली बादलों की तेज़ गरज (Thunder) कई बार दिलों में ख़ौफ़ पैदा कर देती है। यह आवाज़ इतनी भारी होती है कि घर के छोटे बच्चे और बुज़ुर्ग अक्सर सहम जाते हैं।
ज़्यादातर लोग इस तेज़ कड़क को सुनकर घबरा जाते हैं (डर और सुकून के लिए), लेकिन इस्लाम हमें घबराने के बजाय अल्लाह की तरफ़ रुजू करने की तालीम देता है। अगर आप Garaj ki dua तलाश कर रहे हैं, तो इस मुकम्मल गाइड में आप जानेंगे कि बादलों के गरजने पर नबी-ए-करीम (ﷺ) और सहाबा-ए-कराम का क्या अमल था, और इस वक़्त कौन सी मसनून दुआ पढ़नी चाहिए।
1. इस्लाम में बादलों की गरज (Thunder) की हक़ीक़त
अक्सर लोग तेज़ गरज या बिजली के कड़कने को कोई बुरा शगुन (Bad Omen) या अज़ाब समझ लेते हैं। लेकिन क़ुरआन और हदीस की रौशनी में यह अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की ताक़त और क़ुदरत की एक बहुत बड़ी निशानी है।
क़ुरआन मजीद हमें बताता है कि क़ायनात की हर चीज़ अल्लाह के हुक्म की पाबंद है। यह तेज़ आवाज़ जो हमें डराती है, दरअसल गरज अपनी ज़बान में अल्लाह की तस्बीह (पाकी) बयान कर रही होती है। इसलिए एक मोमिन को जब यह आवाज़ सुनाई दे, तो उसे खौफ़ज़दा होने के बजाय अल्लाह की बड़ाई बयान करनी चाहिए।
2. Garaj Ki Dua (बादल गरजने के वक़्त की मसनून दुआ)
जब भी आप आसमान से बादलों के गरजने की तेज़ आवाज़ सुनें, तो दुनियावी बातें करना छोड़ दें और यह मसनून दुआ पढ़ें। हदीस की किताबों में आता है कि मशहूर सहाबी हज़रत अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर (रज़ियल्लाहु अन्हु) जब भी गरज सुनते, तो बातें करना रोक देते और यह ख़ूबसूरत दुआ पढ़ते थे:
अरबी (Arabic):
سُبْحَانَ الَّذِي يُسَبِّحُ الرَّعْدُ بِحَمْدِهِ وَالْمَلَائِكَةُ مِنْ خِيفَتِهِ
रोमन इंग्लिश (Transliteration):
Subhanallazi yusabbihur-ra’du bi-hamdihi wal-malaikatu min khifatihi.
हिंदी तलफ़्फ़ुज़:
सुब्हानल्लज़ी युसब्बिहुर-रा’दु बि-हम्दिही वल-मलाइकतु मिन ख़ीफ़तिही।
तर्जुमा (Hindi Translation):
“पाक है वह ज़ात जिसकी तारीफ़ के साथ गरज उसकी तस्बीह (पाकी) बयान करती है, और फ़रिश्ते भी उसके डर से (उसकी तस्बीह करते हैं)।”
(हवाला: मुवत्ता इमाम मालिक: 1801, सहीह मौक़ूफ़)
3. गरज की दुआ पढ़ने के रूहानी फ़ायदे (हिफ़ाज़त के लिए)
जब तेज़ आवाज़ से दिल घबराता है और आप फ़ौरन यह दुआ पढ़ लेते हैं, तो आपका ज़हन डर से हटकर अल्लाह की याद में लग जाता है।
- सुकून का अहसास: यह दुआ पढ़ने के बाद दिल का ख़ौफ़ अल्लाह के ज़िक्र से सुकून में तब्दील हो जाता है।
- अल्लाह की पनाह: जब इंसान यह पुकारता है कि “पूरी क़ायनात अल्लाह की इबादत में मशगूल है”, तो उसे यह अहसास होता है कि वह अल्लाह की पनाह में महफ़ूज़ है।
- डर का ख़ात्मा: गरज की वह तेज़ आवाज़ फिर डरावनी नहीं लगती, बल्कि अल्लाह की क़ुदरत और जलाल का एक ख़ूबसूरत नज़ारा मालूम होने लगती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवालात (FAQs)
सवाल: क्या तेज़ गरज किसी अज़ाब की निशानी होती है?
जवाब: जी नहीं, इस्लाम में गरज को कोई बुरी निशानी नहीं माना जाता। यह मौसम का एक कुदरती निज़ाम है और अल्लाह की ताक़त की गवाही है कि उसी के हुक्म से बारिश होती है और बादल गरजते हैं।
सवाल: क्या यह दुआ छोटे बच्चों को सिखाई जा सकती है?
जवाब: बिल्कुल! बच्चों को यह Garaj ki dua ज़रूर सिखानी चाहिए। जब उन्हें यह मालूम होगा कि यह डरावनी आवाज़ दरअसल अल्लाह की तारीफ़ (तस्बीह) कर रही है, तो उनका डर हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा और वे निडर बनेंगे।
सवाल: क्या बिजली चमकने पर भी यही दुआ पढ़नी है?
जवाब: यह दुआ ख़ास तौर पर बादलों के गरजने (Thunder) की आवाज़ सुनने पर पढ़ी जाती है।
अल्लाह ताला हम सबको अपनी हिफ़ाज़त और अमान में रखे, और हर मौसम को हमारे लिए रहमत का ज़रिया बनाए। आमीन।
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