Quick Summary
Dua Name
Ghabrahat Aur Pareshani Ki Dua
Arabic Text
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ، وَالْعَجْزِ وَالْكَسَلِ، وَالْبُخْلِ وَالْجُبْنِ، وَضَلَعِ الدَّيْنِ وَغَلَبَةِ الرِّجَالِ
Hindi Transliteration
अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिनल-हम्मि वल-हज़न, वल-अज्ज़ि वल-कसलि, वल-बुख़्लि वल-जुब्नि, व-दलाअ़िद-दैनि व-ग़लबतिर-रिजाल
English Transliteration
Allahumma inni auzu bika minal-hammi wal-hazn, wal-ajzi wal-kasali, wal-bukhli wal-jubni, w-dalaid-daini w-ghlabatir-rijal
Source
सहीह अल-बुखारी: 6369
आज की इस तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में हर दूसरा इंसान किसी न किसी फ़िक्र, मानसिक तनाव (Mental Stress) या घबराहट (Anxiety) का शिकार है। कभी रोज़ी-रोटी की फ़िक्र, कभी घरेलू उलझनें, तो कभी मुस्तक़बिल (Future) का डर इंसान का सुकून छीन लेता है।
लेकिन एक मोमिन के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि उसका रब हर चीज़ पर क़ादिर है। दीन-ए-इस्लाम में ज़हनी और दिली सुकून के लिए बेहतरीन रूहानी इलाज मौजूद हैं। जब भी आप पर कोई मुश्किल वक़्त आए या दिल में बेचैनी महसूस हो, तो अल्लाह की तरफ़ रुजू करें। इस गाइड में हम Pareshani dur karne ki dua, घबराहट से निजात और दिल के सुकून की बेहतरीन दुआएं तफ़सील से जानेंगे।
1. घबराहट और डिप्रेशन दूर करने की दुआ (Dua for Anxiety & Depression)
जब दिल बिना किसी वजह के घबराने लगे, उदासी छा जाए या आप डिप्रेशन (Depression) महसूस कर रहे हों, तो नबी-ए-करीम (ﷺ) की सिखाई हुई यह जामे दुआ कसरत से पढ़ें। यह दुआ इंसान को मायूसी और सुस्ती से बाहर निकालती है।
अरबी (Arabic):
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ، وَالْعَجْزِ وَالْكَسَلِ، وَالْبُخْلِ وَالْجُبْنِ، وَضَلَعِ الدَّيْنِ، وَغَلَبَةِ الرِّجَالِ
रोमन इंग्लिश (Transliteration):
Allahumma inni a’uzu bika minal-hammi wal-hazani, wal-‘ajzi wal-kasali, wal-bukhli wal-jubni, wa dala’id-daini, wa galabatir-rijal.
हिंदी तर्जुमा (Hindi Translation):
“ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह मांगता हूँ फ़िक्र और ग़म से, लाचारी और सुस्ती से, कंजूसी और बुज़दिली से, क़र्ज़ के बोझ से और लोगों के दबदबे (ज़ुल्म) से।”
हवाला (Reference): सहीह बुख़ारी (हदीस नंबर: 2893)।
2. सख़्त परेशानी और मुश्किल वक़्त की दुआ (Dua for Hardships)
जब कोई मुसीबत बहुत बड़ी लगने लगे और इंसान खुद को चारों तरफ़ से घिरा हुआ महसूस करे, तो उस वक़्त हज़रत यूनुस (अलैहिस सलाम) की वह मशहूर दुआ (आयत-ए-करीमा) पढ़ें जो उन्होंने मछली के पेट के अंधेरे में पढ़ी थी। इस दुआ में अल्लाह ने हर परेशानी को टालने की ताक़त रखी है।
अरबी (Arabic):
لَّا إِلَٰهَ إِلَّا أَنتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنتُ مِنَ الظَّالِمِينَ
रोमन इंग्लिश (Transliteration):
La ilaha illa anta subhanaka inni kuntu minaz-zalimin.
हिंदी तर्जुमा (Hindi Translation):
“तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, तू पाक है, बेशक मैं ही ज़्यादती करने वालों में से था।”
हवाला (Reference): सूरह अल-अम्बिया, आयत 87।
3. दिल के सुकून और इत्मीनान की आयत (Dua for Mental Peace)
दुनिया की कोई दौलत या कामयाबी इंसान को सच्चा सुकून नहीं दे सकती। सच्चा सुकून सिर्फ़ अल्लाह के ज़िक्र में है। जब भी दिल बेचैन हो, इस छोटी सी क़ुरआनी आयत को वज़ीफ़े की तरह पढ़ते रहें। यह Sukoon ki dua बेचैन दिल को फ़ौरन इत्मीनान अता करती है।
अरबी (Arabic):
أَلَا بِذِكْرِ اللَّهِ تَطْمَئِنُّ الْقُلُوبُ
रोमन इंग्लिश (Transliteration):
Ala bizikrillahi tatmainnal quloob.
हिंदी तर्जुमा (Hindi Translation):
“सुन लो! अल्लाह की याद ही से दिलों को सुकून (इत्मीनान) मिलता है।”
हवाला (Reference): सूरह अर-राअद, आयत 28।
4. घबराहट और स्ट्रेस दूर करने के इस्लामी तरीक़े (Islamic Tips for Stress Relief)
दुआओं के साथ-साथ इन सुन्नतों पर अमल करने से घबराहट और मानसिक तनाव (Stress) का मुकम्मल इलाज होता है:
- ताज़ा वुज़ू करना: जब भी गुस्सा आए या ज़दीद घबराहट हो, तो फ़ौरन ताज़ा वुज़ू कर लें। पानी की ठंडक जिस्मानी और रूहानी तौर पर सुकून देती है।
- नमाज़ की पाबंदी: नबी-ए-करीम (ﷺ) को जब भी कोई परेशानी या मुश्किल पेश आती, तो आप फ़ौरन नमाज़ की तरफ़ रुजू फरमाते। नमाज़ मोमिन के लिए सबसे बड़ा मेडिटेशन (Meditation) है।
- अस्तग़फ़ार की कसरत: चलते-फिरते “अस्तग़फ़िरुल्लाह” पढ़ते रहने से अल्लाह ताला हर परेशानी से निकलने का रास्ता बना देता है।
- तवक्कुल (अल्लाह पर भरोसा): अपनी पूरी कोशिश करने के बाद नतीजे को अल्लाह पर छोड़ दें। यह यक़ीन रखें कि अल्लाह जो करेगा, उसी में भलाई होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवालात (FAQs)
सवाल: क्या घबराहट और डिप्रेशन के लिए सिर्फ़ दुआ काफ़ी है या डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
जवाब: इस्लाम हमें रूहानी इलाज (दुआ) के साथ-साथ जिस्मानी इलाज (दवा) का भी हुक्म देता है। नबी (ﷺ) ने इलाज कराने की ताकीद की है। इसलिए दुआ के साथ अगर किसी अच्छे डॉक्टर या साइकियाट्रिस्ट (Psychiatrist) की ज़रूरत हो, तो उनसे मशविरा करना सुन्नत के ख़िलाफ़ नहीं है।
सवाल: Ghabrahat dur karne ki dua कितनी बार पढ़नी चाहिए?
जवाब: इन दुआओं की कोई ख़ास तादाद मुक़र्रर नहीं है, लेकिन अफ़ज़ल तरीक़ा यह है कि आप हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद और ख़ास तौर पर सुब्ह और शाम इन्हें पूरे ध्यान और यक़ीन के साथ कम से कम 3 या 7 बार पढ़ें।
सवाल: अचानक कोई बुरी ख़बर सुनकर घबराहट हो तो क्या पढ़ें?
जवाब: ऐसी सूरत में फ़ौरन “इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन” पढ़ें। यह बेचैनी को कम करता है और अल्लाह की रज़ा पर राज़ी रहना सिखाता है।
अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हम सबको हर तरह की ज़हनी और जिस्मानी परेशानी से नजात अता फरमाए, और हमारे दिलों को सच्चा सुकून नसीब करे। आमीन।



