Hajri Ka Matlab Aur Dil Ka Jazba
मुसलमानों के लिए “हाज़िरी” एक लफ़्ज़ नहीं, बल्कि रूहानी सुकून का ज़रिया है। इसका असल मतलब है अल्लाह की बारगाह में हाज़िर होना। जब कोई बंदा हज या उमराह का इरादा करता है, तो उसके दिल की सबसे बड़ी आरज़ू यही होती है कि उसकी इबादत अल्लाह के यहाँ मंज़ूर हो जाए। इसी को हम आम ज़बान में “हाज़िरी की दुआ” कहते हैं। यह दुआ किसी ख़ास अरबी नाम से मंसूब नहीं है, बल्कि यह एक दिली कैफियत है जिसमें बंदा अपनी कोशिशों को अल्लाह के सुपुर्द कर देता है और उससे क़बूलियत की भीख माँगता है। अल्लाह के घर की हाज़िरी नसीब होना महज़ एक सफ़र नहीं, बल्कि खुदा की तरफ़ से एक बुलावा है।
Hajj Aur Umrah Sirf Safar Nahi
हज और उमराह सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह जाने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपने वजूद को अल्लाह की रज़ा के लिए वक़्फ़ कर देने का नाम है। इस पूरे अमल की रूह ‘नियत’ और ‘इखलास’ में छुपी है। जब एक मोमिन मक्का मुअज़्ज़मा के लिए निकलता है, तो उसका मक़सद सिर्फ तवाफ़ या सई करना नहीं होता, बल्कि उसका दिल इस बात की गवाही देता है कि वह अपने गुनाहों की माफ़ी और अल्लाह की रहमत हासिल करने जा रहा है। अल्लाह से रुजू करना और अपनी इबादत में आज़ज़ी पैदा करना ही असल कामयाबी है।
Qabooliyat Ke Liye Masnoon Duas
हज और उमराह की क़बूलियत के लिए वह दुआएं सबसे अफ़ज़ल हैं जो अल्लाह ने अपने कलाम में सिखाई हैं या प्यारे नबी ﷺ की सुन्नत से साबित हैं। यहाँ दो ऐसी दुआएं दी जा रही हैं जो इबादत के क़बूल होने और अल्लाह की रहमत माँगने के लिए सबसे मोतबर हैं।
Arabic Dua
رَبَّنَا تَقَبَّلْ مِنَّا ۖ إِنَّكَ أَنتَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
Hindi
रब्बना तक़ब्बल मिन्ना, इन्नका अन्तस-समीउल अलीम।
तर्जुमा
ऐ हमारे परवरदिगार! हमारी तरफ़ से (इस नेक काम को) क़बूल फ़रमा, बेशक तू ही सब कुछ सुनने वाला और जानने वाला है।
(सूरह अल-बक़रह, आयत 127)
Arabic Dua
اللَّهُمَّ اجْعَلْهُ حَجًّا مَبْرُورًا، وَذَنْبًا مَغْفُورًا، وَسَعْيًا مَشْكُورًا
Hindi
अल्लाहुममज-अल्हु हज्जन मब्रूरन, व ज़म-बन मघ्फूरन, व सय-यन मश्कूरन।
तर्जुमा
ऐ अल्लाह! इस हज को मब्रूर (मक़बूल) बना, मेरे गुनाहों को माफ़ कर दे और मेरी कोशिश को ठिकाने लगा।
(जामी तिर्मिज़ी)
Safar-e-Hajri Ki Tamam Aham Duain
सफ़र के दौरान अलग-अलग मुक़ामात पर ये मख़सूस दुआएं और अज़कार पढ़ने चाहिए। यह टेबल आपकी हाज़िरी को रूहानी तौर पर मज़बूत बनाने में मदद करेगी:
| मुक़ाम | अरबी दुआ | रोमन (तलफ़्फ़ुज़) | तर्जुमा (आसान मतलब) |
| एहराम बाँधते वक़्त | لَبَّيْكَ اللَّهُمَّ عُمْرَةً أَوْ حَجًّا | Labbaik Allahumma umratan (Hajjan) | ऐ अल्लाह! मैं उमराह (या हज) के लिए हाज़िर हूँ। |
| तल्बिया (बार-बार पढ़ें) | لَبَّيْكَ اللَّهُمَّ لَبَّيْكَ… | Labbaik Allahumma labbaik… | मैं हाज़िर हूँ ऐ अल्लाह, तेरा कोई शरीक नहीं। |
| मस्जिद-ए-हरम में दाख़िला | اللَّهُمَّ أَنْتَ السَّلَامُ… | Allahumma antas-Salamu… | ऐ अल्लाह तू सलामती वाला है, हमें सलामती अता कर। |
| काबा पर पहली नज़र | اللَّهُمَّ زِدْ هَذَا الْبَيْتَ تَشْرِيفًا | Allahumma zid hadhal-bayta… | ऐ अल्लाह इस घर की इज़्ज़त और बुज़ुर्ग़ी को और बढ़ा। |
| तवाफ़ के दौरान | رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً… | Rabbana atina fid-dunya… | ऐ हमारे रब हमें दुनिया और आख़िरत में भलाई अता कर। |
| मुल्तज़म पर | اللَّهُمَّ إِنَّكَ قُلْتَ وَقَوْلُكَ الْحَقُّ | Allahumma innaka qulta… | ऐ अल्लाह! तेरा वादा सच्चा है (यहाँ अपनी दुआ मांगें)। |
| मैदान-ए-अरफ़ात | لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ… | La ilaha illallah wahdahu… | अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है। |
| रमी (कंकड़ी मारना) | بِسْمِ اللَّهِ اللَّهُ أَكْبَرُ | Bismillah, Allahu Akbar | अल्लाह के नाम से, अल्लाह सबसे बड़ा है। |
| सई के बाद | إِنَّ الصَّفَا وَالْمَرْوَةَ… | Innass-Safa wal-Marwata… | बेशक सफ़ा और मरवाह अल्लाह की निशानियों में से हैं। |
Dua Ke Saath Dil Ka Andaz
दुआ सिर्फ ज़बान से अदा किए गए अल्फ़ाज़ का नाम नहीं है। जब आप हाज़िरी की दुआ माँगें, तो दिल में आज़ज़ी और इन्किसारी होनी चाहिए। अल्लाह की बारगाह में अपनी कमियों का एतराफ़ करना और इस उम्मीद के साथ हाथ उठाना कि वह अपनी रहमत से हमारी टूटी-फूटी इबादत को क़बूल कर लेगा, यही बंदगी का असल अंदाज़ है। इखलास का मतलब यह है कि आपकी इबादत सिर्फ और सिर्फ अल्लाह के लिए हो।
Hajri Ki Dua Kab Aur Kaise Maangi Jati Hai
हाज़िरी और क़बूलियत की दुआ के लिए कोई एक वक़्त मुक़र्रर नहीं है, लेकिन कुछ मौके बहुत अहम होते हैं:
- सफ़र से पहले: अल्लाह से इल्तिजा करें कि वह आपकी हाज़िरी को आसान बनाए।
- सफ़र के दौरान: तवाफ़ और अरफ़ात के मैदान में क़बूलियत की दुआ मांगना निहायत बाबरकत है।
- वापसी के बाद: दुआ करते रहें कि अल्लाह इस इबादत के असर को हमारी ज़िंदगी में बाक़ी रखे।
Short Q&A
क्या हाज़िरी की दुआ सिर्फ हज पे जाने वाले ही पढ़ सकते हैं?
जी नहीं, जो लोग अभी जा नहीं पाए हैं लेकिन उनके दिल में तड़प है, वे भी अल्लाह से हाज़िरी की दुआ माँग सकते हैं।
क्या घर वाले किसी और के लिए हाज़िरी की दुआ माँग सकते हैं?
बिल्कुल, आप अपने अज़ीज़ों के लिए दुआ कर सकते हैं कि अल्लाह उनकी इबादत और हाज़िरी को क़बूल फ़रमाए।
आख़िरी बात
हज और उमराह की हाज़िरी एक मोमिन की ज़िंदगी का सबसे कीमती असासा है। हमें चाहिए कि हम अपनी इबादत में दिखावे से बचें और अल्लाह की रहमत पर पूरा भरोसा रखें। अल्लाह तआला किसी की मेहनत को ज़ाया नहीं करता। अल्लाह हम सबकी हाज़िरी को अपनी बारगाह में क़बूल ओ मक़बूल फ़रमाए और हमारे दिलों को इत्मीनान अता करे।


