ज़िन्दगी में कभी-कभी इंसान को ऐसी मुश्किलात या घबराहट का सामना करना पड़ता है, जिसकी कोई ज़ाहिरी वजह समझ नहीं आती। ऐसे में अक्सर हमारा ख़याल जादू या बुरी नज़र की तरफ जाता है। इस्लाम हमें सिखाता है कि दुनिया की हर चीज़, चाहे वो नफ़ा हो या नुकसान, सिर्फ़ अल्लाह के हुक्म के ताबे (under control) है।
एक मोमिन के तौर पर, हमारा सबसे बड़ा हथियार ‘दुआ’ और अल्लाह पर ‘यक़ीन’ है। अगर आप किसी अनजाने डर या वसवसों (negative thoughts) से परेशान हैं, तो Jadu se hifazat ki dua और अल्लाह के कलाम के ज़रिए अपने दिल को इत्मिनान (peace) दिला सकते हैं। याद रखें, हिफ़ाज़त का असल मक़सद डरना नहीं, बल्कि अल्लाह की पनाह में सुकून पाना है।
Jadu Ka Tasawwur Aur Islam
क़ुरआन मजीद में जादू (सहर) का ज़िक्र ज़रूर आया है, और यह एक हक़ीक़त है कि शर (evil) मौजूद है। लेकिन आज कल जिस तरह हर छोटी-बड़ी परेशानी को जादू का नाम दे दिया जाता है, वह दुरुस्त नहीं है।
अक्सर डिप्रेशन, एन्ज़ाइटी (Anxiety), सेहत की ख़राबी या कारोबारी नुकसान को लोग बिना सोचे-समझे जादू समझ लेते हैं। इस्लाम हमें वहम और शक से रोकता है। हर मुश्किल जादू की वजह से नहीं होती। अल्लाह तआला ने इंसान की ज़िन्दगी में आज़माइशें भी रखी हैं।
इस्लाम घबराहट को कंट्रोल करने की तालीम देता है। अगर कोई चीज़ हक़ीक़त में जादू है भी, तो उसकी हैसियत अल्लाह की कुदरत के आगे कुछ भी नहीं है। यह सोच रखना कि “जादू मुझे बर्बाद कर देगा” ईमान को कमज़ोर करता है। इसके बजाय यह सोचें कि “अल्लाह मेरा मुहाफ़िज़ (Protector) है, और उसकी मर्ज़ी के बिना कोई चीज़ मुझे नुकसान नहीं पहुँचा सकती।”
Islam Hifazat Ka Rasta Kya Batata Hai
इस्लाम में हिफ़ाज़त का रास्ता बहुत सादा और सुलझा हुआ है। इसके लिए आपको किसी जाली आमिल, बाबा या संदिग्द रास्तों पर जाने की ज़रूरत नहीं है।
- अल्लाह की पनाह (Refuge in Allah): हिफ़ाज़त का सबसे बेहतरीन तरीक़ा यह है कि आप ख़ुद को अल्लाह के हवाले कर दें। जब बंदा अल्लाह की पनाह मांगता है, तो वह सबसे मज़बूत किले में आ जाता है।
- रुक़्या (Ruqyah): क़ुरआन की आयतों और हदीस से साबित दुआओं को पढ़कर अपने ऊपर दम करना ‘रुक़्या’ कहलाता है। यह अल्लाह से मदद मांगने का एक जायज़ और मसनून तरीक़ा है।
- यक़ीन और सब्र: दुआ के असर के लिए यह यक़ीन होना ज़रूरी है कि शिफा और हिफ़ाज़त सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है।
यह रास्ता डर का नहीं, बल्कि हिम्मत का है।
Jadu Se Hifazat Ke Liye Padhi Ja Sakti Hai Yeh Duas
नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपनी उम्मत को शर, जादू और हर क़िस्म की बुराई से बचने के लिए ‘मुअव्विज़तैन’ (Mu‘awwidhatayn) यानी क़ुरआन की आख़िरी दो सूरतों (सूरह फलक और सूरह नास) की तालीम दी है। यह सबसे मज़बूत और बेहतरीन Jadu se hifazat ki dua मानी जाती हैं।
यहाँ हम इन सूरतों को सही तलफ़्फ़ुज़ और तर्जुमे के साथ पेश कर रहे हैं।
1. सूरह अल-फलक़ (Surah Al-Falaq)
यह सूरह तमाम मख़लूक़ के शर और जादू के असरात से अल्लाह की पनाह मांगने के लिए बेहतरीन है।
Arabic Dua
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ مِن شَرِّ مَا خَلَقَ وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ وَمِن شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ
तलफ़्फ़ुज़
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम।
- क़ुल अऊज़ु बि-रब्बिल फलक़।
- मिन शर्रि मा ख़लक़।
- व मिन शर्रि ग़ासिक़िन इज़ा वक़ब।
- व मिन शर्रि नफ्फ़ासाति फ़िल उक़द।
- व मिन शर्रि हासिदिन इज़ा हसद।
Roman (Hinglish)
Qul a’uzu bi-rabbil falaq. Min sharri ma khalaq. Wa min sharri ghasiqin iza waqab. Wa min sharri naffathati fil ‘uqad. Wa min sharri hasidin iza hasad.
तर्जुमा
(अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है)
- कह दीजिए! कि मैं सुबह के रब की पनाह मांगता हूँ।
- हर उस चीज़ के शर (बुराई) से जो उसने पैदा की है।
- और अंधेरी रात के शर से, जब वह छा जाए।
- और गिरहों (knots) में फूंकने वालों (जादूगरों) के शर से।
- और हसद (ईर्ष्या/जलन) करने वाले के शर से, जब वह हसद करे।
Masdar
(Al-Qur’an, Surah 113)
2. सूरह अन-नास (Surah An-Nas)
यह सूरह दिलों में वसवसे (बुरे ख़याल) डालने वाली चीज़ों और अंदरूनी डर से हिफ़ाज़त के लिए है।
Arabic Dua
بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ مَلِكِ النَّاسِ إِلَهِ النَّاسِ مِن شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ
तलफ़्फ़ुज़
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम।
- क़ुल अऊज़ु बि-रब्बिन-नास।
- मलिकिन-नास।
- इलाहिन-नास।
- मिन शर्रिल वस्वासिल ख़न्नास।
- अल्लज़ी युवस्विसु फ़ी सुदूरिन-नास।
- मिनल जिन्नति वन-नास।
Roman (Hinglish)
Qul a’uzu bi-rabbin-naas. Malikin-naas. Ilahin-naas. Min sharril waswasil khannas. Allazi yuwaswisu fi sudurin-naas. Minal jinnati wan-naas.
तर्जुमा
(अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है)
- कह दीजिए! कि मैं लोगों के रब की पनाह मांगता हूँ।
- लोगों के बादशाह की।
- लोगों के माबूद (इलाह) की।
- वसवसा डालने वाले के शर से, जो (अल्लाह का नाम सुनकर) पीछे हट जाता है।
- जो लोगों के सीनों में वसवसे डालता है।
- चाहे वह जिन्नात में से हो या इंसानों में से।
Masdar
(Al-Qur’an, Surah 114)
Dua Ke Saath Dil Ko Kaise Mehfooz Rakhein
सिर्फ़ ज़बान से दुआ पढ़ना काफ़ी नहीं होता, दिल की हालत भी मायने रखती है। जादू या किसी भी शर से हिफ़ाज़त के लिए आपका अंदरूनी इत्मिनान (Inner Peace) बहुत ज़रूरी है।
- अल्लाह पर पूरा भरोसा: यह यक़ीन रखें कि दुनिया का कोई भी जादूगर या कोई भी ताक़त अल्लाह के इरादे के ख़िलाफ़ आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकती।
- डर को निकालें: जब आप डरते हैं, तो शैतानी ताक़तें आपको ज़हनी तौर पर कमज़ोर करती हैं। ख़ुद को याद दिलाएं कि मेरा मुहाफ़िज़ (रक्षक) अल्लाह है।
- सुकून: दुआ पढ़ने के बाद बेचैन न हों। अल्लाह ने आपकी दुआ सुन ली है, इस बात पर मुतमइन रहें।
Rozmarrah Zindagi Mein Hifazat Ka Ehsaas
अक्सर लोग घर में अजीब साया महसूस होने या बच्चों के डरने की शिकायत करते हैं। इसके लिए घर का माहौल बदलना ज़रूरी है, न कि डर का माहौल बनाना।
- घर में तिलावत: अपने घर में क़ुरआन की तिलावत का एहतमाम करें, ख़ास तौर पर सूरह बक़रह की तिलावत शैतान को घर से दूर रखती है।
- साफ़-सफ़ाई: जिस्मानी और रूहानी पाकीज़गी (Wuzu) हिफ़ाज़त का अहम ज़रिया है।
- बिस्मिल्लाह: हर काम शुरू करने से पहले, घर में दाख़िल होते वक़्त और खाना खाते वक़्त ‘बिस्मिल्लाह’ पढ़ने की आदत डालें। यह बहुत छोटी लेकिन मज़बूत हिफ़ाज़त है।
- रात का सुकून: सोने से पहले आयत-उल-कुर्सी और ऊपर बताई गई दोनों सूरतें (फलक़ और नास) पढ़कर अपने हाथों पर फूंकें और पूरे जिस्म पर फेर लें (जैसा कि हदीस में आता है)। इससे रात भर अल्लाह की हिफ़ाज़त रहती है।
Sawal Jawab
सवाल: क्या हर मुश्किल या बीमारी जादू की वजह से होती है?
जवाब: जी नहीं। ज़्यादातर परेशानियां ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव, मेडिकल मसाइल या नफ़्सियाती (psychological) तनाव की वजह से होती हैं। हर बात को जादू से जोड़ना वहम है, जो इस्लाम में पसंद नहीं किया गया है।
सवाल: क्या रुक़्या (दुआ) के साथ डॉक्टर से इलाज कराना ग़लत है?
जवाब: बिल्कुल नहीं। इस्लाम इलाज कराने की पुरज़ोर ताकीद करता है। अगर आप बीमार हैं या ज़हनी तनाव में हैं, तो दुआ के साथ-साथ माहिर डॉक्टर से इलाज कराना सुन्नत और अक़्लमंदी है।
अख़री बात
अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है। Jadu se hifazat ki dua पढ़ने का मक़सद सिर्फ़ लफ़्ज़ दोहराना नहीं, बल्कि अपने दिल को यह यक़ीन दिलाना है कि “मेरा रब मेरे साथ है।”
जादू या नज़र-ए-बद का खौफ़ अपने दिल से निकाल दें। जब आप अल्लाह की पनाह में आ गए, तो फिर घबराने की कोई बात नहीं। अपनी इबादत दुरुस्त रखें, नेकी के रास्ते पर चलें और किसी भी वहम को अपनी खुशहाल ज़िंदगी पर हावी न होने दें।


