रोज़गार की तलाश और आज का दौर
नौकरी ढूंढना आज के ज़माने में सिर्फ एक ज़रूरत नहीं, बल्कि एक बड़ा इम्तिहान बन चुका है। हफ्तों तक सीवी (CV) भेजना, इंटरव्यू के बाद कॉल का इंतज़ार करना और बार-बार रिजेक्शन का सामना करना इंसान को अंदर से थका देता है। जब घर की ज़िम्मेदारियां कंधों पर हों और मेहनत के बावजूद रास्ते बंद नज़र आ रहे हों, तो मायूसी महसूस होना फितरी है।
लेकिन याद रखें, एक मोमिन के लिए यह वक्त थक कर बैठने का नहीं, बल्कि अल्लाह से अपना रिश्ता मज़बूत करने और सही सिम्ट (दिशा) में कोशिश करने का है।
इस्लाम और मेहनत का रिश्ता
इस्लाम में हाथ पर हाथ रखकर बैठने की इजाज़त नहीं है। रिज़्क़ अल्लाह के हाथ में है, लेकिन उसे तलाश करना हमारी ज़िम्मेदारी है। हदीस का मफ़हूम है कि वह हाथ अल्लाह को बहुत पसंद है जो मेहनत करके कमाता है। हलाल रोज़गार की तलाश भी एक तरह की इबादत है। जब हम अपनी पूरी सलाहियत (हुनर) का इस्तेमाल करते हैं और फिर अल्लाह पर तवक्कुल करते हैं, तो बरकत के रास्ते वहीं से खुलते हैं जहाँ से हमने सोचा भी नहीं होता।
Masnoon Dua for Job & Rizq | रोज़गार के लिए मसनून दुआएं
नौकरी की तलाश के दौरान आप इन दो दुआओं को अपना मामूल बना लें। यह दुआएं न सिर्फ रास्ते खोलती हैं बल्कि रिज़्क़ में बरकत भी लाती हैं।
1. बेबसी और रास्ते खुलने की दुआ
यह दुआ मूसा अलैहिस्सलाम ने उस वक्त की थी जब वह मिस्र से हिजरत करके पहुंचे थे और उनके पास न रहने की जगह थी न काम। इस दुआ के बाद अल्लाह ने उनके लिए रिज़्क़ और घर दोनों का इंतज़ाम फरमाया।
رَبِّ إِنِّي لِمَا أَنزَلْتَ إِلَيَّ مِنْ خَيْرٍ فَقِيرٌ
तलफ़्फ़ुज़
रब्बी इन्नी लिमा अंज़ल्ता इलय्या मिन खैरिन फ़क़ीर।
Roman (Hinglish)
Rabbi inni lima anzalta ilayya min khairin faqir.
तर्जुमा
“ऐ मेरे रब! तू जो भी भलाई (खैर) मेरी तरफ उतारे, मैं उसका ज़रूरतमंद हूँ।”
मस्दर (Reference)
सूरह अल-क़सस, आयत: 24
2. कामयाबी और पाकीज़ा रिज़्क़ की दुआ
नबी करीम ﷺ अक्सर फज्र की नमाज़ के बाद यह दुआ पढ़ते थे। यह दुआ इंटरव्यू में कामयाबी, सही फैसले लेने और बरकत के लिए बहुत मुफीद है।
اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا وَرِزْقًا طَيِّبًا وَعَمَلًا مُتَقَبَّلًا
तलफ़्फ़ुज़
अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुका इल्मन नाफ़िअन, व रिज़्क़न तय्यिबन, व अमलम मुतक़ब्बला।
Roman (Hinglish)
Allahumma inni as-aluka ‘ilman nafi’an, wa rizqan tayyiban, wa ‘amalam mutaqabbalan.
तर्जुमा
“ऐ अल्लाह! मैं तुझसे नफ़ा देने वाले इल्म, पाकीज़ा रिज़्क़ और कुबूल होने वाले अमल का सवाल करता हूँ।”
मस्दर (Reference)
सुनन इब्ने माजह, हदीस: 925
Dua के साथ क्या ज़रूरी है?
सिर्फ दुआ पढ़ लेना काफी नहीं है, उसके साथ कुछ अमली कदम भी ज़रूरी हैं:
- हुनर (Skill) पर काम: जिस काम के लिए आप इंटरव्यू दे रहे हैं, उसकी पूरी तैयारी रखें और अपने हुनर को तराशते रहें।
- नमाज़ की पाबंदी: रिज़्क़ देने वाली ज़ात से राब्ता (contact) करने का सबसे बड़ा ज़रिया नमाज़ है।
- हलाल का इरादा: हमेशा यह नियत रखें कि आप हलाल कमाएंगे और उससे अपने घर वालों की सही तरीके से मदद करेंगे।
- सब्र और इस्तक़ामत: बार-बार रिजेक्शन से घबराएं नहीं, अपनी गलतियों से सीखें और अगली कोशिश बेहतर करें।
देरी का मतलब क्या होता है?
कभी-कभी बहुत दुआओं के बाद भी नौकरी नहीं मिलती। हमें लगता है कि दुआ कुबूल नहीं हुई, लेकिन अल्लाह का फैसला हमारे इल्म से कहीं बड़ा होता है। मुमकिन है कि जिस जगह आप जाना चाह रहे हों, वहां आपके लिए खैर न हो। देरी का मतलब इनकार नहीं होता, बल्कि यह सही वक्त का इंतज़ार होता है। सब्र का मतलब हार मानना नहीं, बल्कि अल्लाह के फैसले पर यकीन रखते हुए अपनी जद्दोजहद जारी रखना है।
Short Job-Focused Q&A
क्या इंटरव्यू से पहले यह दुआ पढ़ सकते हैं?
जी हाँ, इंटरव्यू से पहले इसे पढ़ने से ज़हन साफ रहता है और गुफ़्तगू में आसानी होती है।
रोज़ कितनी बार पढ़ना बेहतर है?
इसकी कोई तादाद मुक़र्रर नहीं है, लेकिन फज्र के बाद और हर नमाज़ के बाद कम से कम 3 या 7 बार पढ़ना बेहतर है।
अगर बार-बार रिजेक्शन हो तो क्या करें?
रिजेक्शन को नाकामी के बजाए अल्लाह की तरफ से कोई और बेहतर दरवाज़ा खुलने का इशारा समझें। अपनी तैयारी जारी रखें और इन दुआओं का विर्द करते रहें।
कोशिश और यक़ीन का साथ
अपनी काबिलियत पर काम करते रहें और दुआ को अपना सहारा बनाए रखें। जब बंदा अपनी तरफ से पूरी कोशिश करता है और फिर अल्लाह के सामने हाथ फैलाता है, तो अल्लाह उसे कभी खाली हाथ नहीं लौटाता। मेहनत आपकी ज़िम्मेदारी है और रिज़्क़ देना अल्लाह का वादा।


