Quick Summary
Dua Name
Dua For Success In Exams And Job
Arabic Text
اللَّهُمَّ رَحْمَتَكَ أَرْجُو فَلَا تَكِلْنِي إِلَى نَفْسِي طَرْفَةَ عَيْنٍ وَأَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُلَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ
Hindi Transliteration
अल्लाहुम्मा रहमतका अरजू फ़ला तकिलनी इला नफ़्सी तरफ़ता ऐनिन व अस्लिह ली शअनी कुल्लहू ला इलाहा इल्ला अन्ता।
English Transliteration
Allahumma rahamataka araju fla takilani ila nafsi tarafta ainin w aslih li shani kullahu la ilaha illa anta.
Source
सुनन अबू दाऊद: 5090 (सहीह हदीस)
हर तालिब-ए-इल्म (Student) और नौकरी की तलाश करने वाले इंसान की ज़िंदगी में एक ऐसा वक़्त आता है जब मेहनत के बावजूद दिल में एक अनजाना डर लगा रहता है कि “नतीजा क्या होगा?”
किताबों का बोझ, इम्तिहान की फ़िक्र, और अच्छी जॉब (Job) हासिल करने की जद्दोजहद इंसान को थका देती है। लेकिन अगर आप भी इंटरनेट पर Dua for success in exams/job तलाश कर रहे हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं। यहाँ हम आपको अहादीस और क़ुरआन-ए-पाक से साबित सबसे बेहतरीन दुआएं बता रहे हैं, जो आपकी मेहनत में अल्लाह ताला की मदद और बरकत शामिल कर देंगी।
कामयाबी का इस्लामी नज़रिया और तवक्कुल
हमें समझना होगा कि कामयाबी सिर्फ़ हमारी भाग-दौड़ का नाम नहीं है। अल्लाह ताला ने क़ुरआन में फ़रमाया है कि इंसान को वही मिलता है, जिसकी वह कोशिश करता है। इसलिए, सिर्फ़ दुआ मांगना और पढ़ाई या तैयारी न करना—यह सुन्नत के ख़िलाफ़ है।
सही रास्ता “तवक्कुल” (भरोसा) का है। यानी आप अपनी पूरी ताक़त लगाकर पढ़ाई या इंटरव्यू की तैयारी करें, अपना 100% दें, और फिर नतीजे (Result) के लिए अल्लाह पर मुकम्मल भरोसा रखें। जब आप अपनी मेहनत को दुआ का सहारा देते हैं, तो दिल को सुकून मिलता है और अल्लाह ताला बंद दरवाज़े भी खोल देता है।
1. पढ़ाई में ज़हन खोलने और घबराहट दूर करने की दुआ
यह हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की दुआ है, जो उन्होंने अल्लाह से तब मांगी थी जब उन्हें एक बड़ी ज़िम्मेदारी निभानी थी। यह दुआ उन तुलबा (Students) के लिए बहुत मुफ़ीद है जो क्लास में घबराते हैं, जिन्हें पढ़ा हुआ याद रखने में मुश्किल होती है, या जिन्हें इंटरव्यू में बोलने से डर लगता है:
Arabic:
رَبِّ اشْرَحْ لِي صَدْرِي وَيَسِّرْ لِي أَمْرِي وَاحْلُلْ عُقْدَةً مِّن لِّسَانِي يَفْقَهُوا قَوْلِي
Hindi:
रब्बिश्-रह ली सदरी, व यस्सिर ली अमरी, वह-लुल उक़्दतम-मिल-लिसानी, यफ़-क़हू क़ावली।
Roman:
Rabbish-rah li sadri, wa yassir li amri, wahlul uqdatam mil-lisaani, yafqahu qauli.
तर्जुमा / मफ़हूम:
“ऐ मेरे रब! मेरा सीना मेरे लिए खोल दे, और मेरे काम को मेरे लिए आसान कर दे, और मेरी ज़बान की गिरह खोल दे ताकि लोग मेरी बात समझ सकें।” (हवाला: सूरह ताहा: 25-28)
2. इल्म में इज़ाफ़े (बढ़ोत्तरी) की दुआ
यह क़ुरआन की सबसे छोटी लेकिन सबसे ताक़तवर दुआओं में से एक है। अल्लाह ताला ने प्यारे आक़ा (ﷺ) को यह दुआ मांगने का हुक्म दिया था:
Arabic:
رَّبِّ زِدْنِي عِلْمًا
Hindi:
रब्बि ज़िदनी इल्मा।
Roman:
Rabbi zidni ilma.
तर्जुमा / मफ़हूम:
“ऐ मेरे रब! मेरे इल्म (ज्ञान) में इज़ाफ़ा (बढ़ोत्तरी) फ़रमा।” (हवाला: सूरह ताहा: 114)
3. इम्तिहान और जॉब में कामयाबी की मसनून दुआ (Dua For Success)
जब आप अपनी मेहनत और तैयारी मुकम्मल कर लें, तो एग्ज़ाम हॉल या इंटरव्यू रूम में जाने से पहले अल्लाह ताला के सामने अपनी आज़िज़ी का इज़हार करें। यह दुआ बिगड़े हुए हालात को संवारने के लिए बहुत बेहतरीन है:
Arabic:
اللَّهُمَّ رَحْمَتَكَ أَرْجُو فَلَا تَكِلْنِي إِلَى نَفْسِي طَرْفَةَ عَيْنٍ وَأَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُلَّهُ لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ
Hindi:
अल्लाहुम्मा रहमतका अरजू फ़ला तकिलनी इला नफ़्सी तरफ़ता ऐनिन व अस्लिह ली शअनी कुल्लहू ला इलाहा इल्ला अन्ता।
Roman:
Allahumma rahmataka arju fala takilni ila nafsi tarfata ‘aynin wa aslih li sha’ni kullahu la ilaha illa Anta.
तर्जुमा / मफ़हूम:
“ऐ अल्लाह! मैं तेरी ही रहमत की उम्मीद रखता हूँ, इसलिए मुझे एक पल के लिए भी मेरे अपने नफ़्स (सहारे) पर न छोड़ और मेरे तमाम हालात संवार दे, तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं।” (हवाला: सुनन अबू दाऊद: 5090)
दुआ के साथ कामयाबी के आदाब
कामयाबी का सफ़र एक हाथ में जद्दोजहद और दूसरे हाथ में दुआ रखने का नाम है।
- मेहनत में ईमानदारी: अल्लाह उन लोगों की मदद फ़रमाता है जो ख़ुद अपनी मदद करते हैं। दुआ को मेहनत का बदल (Substitute) न समझें।
- नीयत की पाकीज़गी: काम या पढ़ाई शुरू करने से पहले नीयत साफ़ रखें। इल्म इसलिए हासिल न करें कि दूसरों को नीचा दिखाना है, और जॉब के लिए हमेशा हराम रोज़ी से बचें।
- वक़्त की पाबंदी: अपनी पढ़ाई या जॉब की तलाश में वक़्त को ज़ाया न करें। अल्लाह वक़्त की कद्र करने वालों को नवाज़ता है।
जब बार-बार नाकामी मिले तो क्या करें?
अक्सर वालिदैन (Parents) की उम्मीदें और दोस्तों से आगे निकलने की दौड़ ज़हन पर गहरा दबाव डालती है। अगर बार-बार कोशिश के बावजूद भी जॉब नहीं मिल रही या इम्तिहान में रुकावटें आ रही हैं, तो मायूस न हों।
हो सकता है अल्लाह ताला ने आपको किसी और मैदान में कामयाबी देने का फ़ैसला किया हो। कभी-कभी एक जगह नाकाम होना किसी बहुत बड़ी कामयाबी का आग़ाज़ होता है। दूसरों की तरक़्क़ी देखकर ख़ुद को कमतर न समझें; आपकी मेहनत का एक-एक पल अल्लाह के पास दर्ज है और उसका बेहतरीन सिला (अजर) आपको सही वक़्त पर ज़रूर मिलेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
सवाल 1: क्या सिर्फ़ दुआ मांगने से इम्तिहान या इंटरव्यू में कामयाबी मिल जाती है?
जवाब: नहीं, इस्लाम सिर्फ़ दुआ पर मुन्हसिर (निर्भर) रहने की तालीम नहीं देता। आपको अपनी तरफ़ से मुकम्मल पढ़ाई और तैयारी करनी होगी, फिर अल्लाह से आसानी और बरकत की दुआ मांगनी होगी।
सवाल 2: क्या एग्ज़ाम शुरू होने या इंटरव्यू से ठीक पहले यह दुआ पढ़ सकते हैं?
जवाब: जी हाँ, जब आप क्वेश्चन पेपर (Question Paper) हाथ में लें या इंटरव्यू रूम में दाख़िल हों, तो ‘बिस्मिल्लाह’ पढ़कर यह दुआ दिल में पढ़ लें।
सवाल 3: क्या अपनी मादरी ज़बान (उर्दू/हिंदी) में दुआ मांग सकते हैं?
जवाब: बिल्कुल। अल्लाह ताला हर ज़बान समझता है। आप अरबी दुआओं के साथ-साथ अपनी मादरी ज़बान में भी अपने डर और परेशानी को अल्लाह के सामने रख सकते हैं।
आख़िरी बात: मुकम्मल यक़ीन
अज़ीज़ तुलबा और नौकरी की तलाश करने वालो! यह मुश्किल वक़्त गुज़र जाएगा। आप अकेले नहीं हैं; अल्लाह आपके साथ है, आपकी मेहनत को देख रहा है और आपके दिल की घबराहट को जानता है।
नतीजा जो भी हो, उसमें ख़ैर ही होगी। गहरी सांस लें, ‘बिस्मिल्लाह’ पढ़ें और अपनी तैयारी शुरू करें। अल्लाह ताला तमाम तुलबा को इम्तिहान में और नौकरी तलाश करने वालों को हलाल रिज़्क़ में अज़ीम कामयाबी अता फ़रमाए। आमीन۔



