Khana Khatam Hone Ke Baad Sunnat Ka Andaz
अल्लाह की दी हुई नेमतों में खाना सबसे बड़ी नेमत है। जब हमारा पेट भर जाता है और भूख मिट जाती है, तो यह अल्लाह का बड़ा एहसान होता है। सुन्नत का आसान और प्यारा तरीक़ा यही है कि खाना खत्म करते ही उस रब का शुक्र अदा किया जाए जिसने हमें रिज़्क़ दिया। Khana khane ke baad ki dua पढ़ना सिर्फ एक दुआ नहीं, बल्कि अल्लाह की दी हुई नेमत का एतराफ है।
Khane Ke Baad Dua Kab Padhi Jati Hai
यह दुआ उस वक़्त पढ़ी जाती है जब आप खाना पूरी तरह मुकम्मल कर चुके हों। जब दस्तरख़्वान से उठने का वक़्त हो और आप पानी भी पी चुके हों, तब इस दुआ को पढ़ना बेहतर है। इससे खाने में बरकत होती है और दिल में शुक्र का जज़्बा पैदा होता है।
Dua After Eating (Arabic)
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَطْعَمَنَا وَسَقَانَا وَجَعَلَنَا مُسْلِمِينَ
तलफ़्फ़ुज़ (Talaffuz)
Alhamdu lillahi-lladhi at’amana wa saqana wa ja’alana Muslimeen.
Devanagari (Hindi)
अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अत-अमना व सक़ाना व ज-अलना मुस्लिमीन।
तर्जुमा (Matlab)
तमाम तारीफें अल्लाह के लिए हैं, जिसने हमें खिलाया और पिलाया और हमें मुसलमान बनाया।
Masdar
Sunan Abi Dawud: 3850, Jami` at-Tirmidhi: 3457.
Is Dua Ka Jazba
इस दुआ को पढ़ते वक़्त दिल में यह एहसास होना चाहिए कि जो खाना हमने खाया है, वह सिर्फ हमारी मेहनत नहीं बल्कि अल्लाह की रहमत है। दुनिया में बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्हें एक वक़्त की रोटी नसीब नहीं होती। जब हम शुक्र अदा करते हैं, तो अल्लाह हमारी नेमतों को और बढ़ा देता है। यह एक छोटा सा अमल हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शुक्र-गुज़ारी का मिज़ाज पैदा करता है।
Rozmarrah Zindagi Mein Is Sunnat Ki Aadat
घर में जब सब लोग साथ मिलकर खाना खाएं, तो बड़े लोगों को चाहिए कि वे थोड़ा बुलंद आवाज़ में यह दुआ पढ़ें। इससे घर के बच्चों को भी दुआ याद हो जाती है और उन्हें बचपन से ही सुन्नत पर चलने की आदत पड़ती है। अगर आप किसी के यहाँ मेहमान बन कर गए हैं, तब भी खाना खत्म करके यह दुआ पढ़ना बेहतर है। यह एक ऐसी आदत है जो बहुत कम वक़्त लेती है लेकिन इसका सवाब बहुत ज़्यादा है।
Khana Khane Ke Baad Ki Dua Se Jude Sawal
क्या हर खाने के बाद यह दुआ पढ़ना चाहिए?
जी हाँ, चाहे आपने पेट भर कर खाना खाया हो या थोड़ा सा नाश्ता किया हो, हर बार खाने और पीने के बाद अल्लाह का शुक्र अदा करना और यह दुआ पढ़ना सुन्नत है।
अगर दुआ भूल जाएं तो क्या करें?
अगर आप दस्तरख़्वान से उठते वक़्त दुआ भूल गए और थोड़ी देर बाद याद आया, तो जैसे ही याद आए वैसे ही “अल्हम्दुलिल्लाह” कह दें। सुन्नत पर अमल करने की कोशिश हमेशा बरकत लाती है।
आख़िरी बात
खाना खाने के बाद की दुआ पढ़ना एक छोटी सी सुन्नत है, लेकिन इसका ताल्लुक हमारे ईमान और शुक्र से है। जब हम अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं, तो हमारे खाने में बरकत होती है और अल्लाह की रहमत हमारे साथ रहती है। कोशिश करें कि यह दुआ आपके घर के हर फ़र्द को याद हो ताकि हर निवाला शुक्र के साथ मुकम्मल हो।


