
लैलतुल क़द्र दुआ: रमज़ान की सबसे बड़ी रात की खास दुआ
March 8, 2025 | By Rokaiya
रमज़ान का महीना अल्लाह की रहमत और बरकत से भरा होता है, लेकिन इसकी एक रात ऐसी है जो सबसे खास है—लैलतुल क़द्र। भारत में लोग “लैलतुल क़द्र दुआ” (Laylatul Qadr Dua) को खूब ढूंढते हैं, ताकि इस मुबारक रात में अल्लाह से माफी और रहमत माँग सकें। यह दुआ हमारे नबी हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हज़रत आयशा (र.अ.) को सिखाई थी। यहाँ हम आपको सही दुआ पेश करेंगे, बताएँगे कि यह कहाँ से आई, इसका मतलब क्या है, और इसे कैसे पढ़ें।
लैलतुल क़द्र दुआ (सही और आसान)
लैलतुल क़द्र की रात में एक खास दुआ पढ़ना सुन्नत है। यह दुआ छोटी है, लेकिन बहुत असरदार है। नबी (स.अ.व.) ने इसे खास तौर पर इस रात के लिए बताया।
अरबी में दुआ:
اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي
हिंदी में लिखावट:
अल्लाहुम्मा इन्नका अफुव्वुन तुहिब्बुल अफ्वा फअफु अन्नी
हिंदी में मतलब:
“ऐ अल्लाह! तू बहुत माफ़ करने वाला है, तुझे माफ़ करना पसंद है, तो मुझे माफ़ कर दे।”
English Transliteration:
Allahumma innaka ‘afuwwun tuhibbul ‘afwa fa‘fu ‘anni
English Translation:
“O Allah! You are the Most Forgiving, You love to forgive, so forgive me.”
माखज़ (Source):
- यह दुआ सुनन तिर्मिज़ी (हदीस 3513) और सुनन इब्ने माजा (हदीस 3850) में हज़रत आयशा (र.अ.) से रिवायत है। उन्होंने नबी (स.अ.व.) से पूछा, “लैलतुल क़द्र में क्या दुआ माँगूँ?” नबी (स.अ.व.) ने यही दुआ सिखाई।
- अल्लामा अल्बानी ने इसे सही कहा है (सही सुनन तिर्मिज़ी, हदीस 2805)।
लैलतुल क़द्र दुआ की अहमियत
लैलतुल क़द्र रमज़ान की सबसे बड़ी रात है। सूरह अल-क़द्र (97:1-5) में अल्लाह फरमाता है: “हमने इसे लैलतुल क़द्र में नाज़िल किया… यह रात हज़ार महीनों से बेहतर है।” सही बुखारी (हदीस 2017) में नबी (स.अ.व.) ने फरमाया: “जो इस रात में ईमान और सवाब की उम्मीद से इबादत करे, उसके पिछले गुनाह माफ़ हो जाते हैं।” “लैलतुल क़द्र दुआ” इस रात का सबसे अहम हिस्सा है। यह छोटी दुआ माफी की पूरी उम्मीद लेकर आती है। भारत में लोग इसे रमज़ान के आखिरी दस दिनों में, खासकर 21, 23, 25, 27, और 29 की रातों को खूब पढ़ते हैं। हनफी मज़हब में इसे 27वीं रात को खास अहमियत दी जाती है।
लैलतुल क़द्र दुआ कब और कैसे पढ़ें?
लैलतुल क़द्र रमज़ान के आखिरी दस दिनों की किसी एक रात में होती है, और इसे अजीब (odd) रातों—21, 23, 25, 27, या 29—में तलाश करते हैं। इस दुआ को पढ़ने का सही तरीका यहाँ है:
- नमाज़ पढ़ें: रात में दो-दो रकअत नफ्ल नमाज़ पढ़ें, जितना हो सके। तहज्जुद खास तौर पर पढ़ें।
- कुरआन पढ़ें: सूरह अल-क़द्र (सूरह 97) और दूसरी सूरतों की तिलावत करें।
- दुआ माँगें: “अल्लाहुम्मा इन्नका अफुव्वुन…” को बार-बार पढ़ें।
- शिद्दत से: इसे दिल से, खामोशी में, और सजदे में माँगें।
- अपनी ज़बान में: इसके साथ अपनी ज़रूरतें—like माफी, सेहत, या जन्नत—भी माँगें।
माखज़: सही बुखारी (हदीस 1901) में नबी (स.अ.व.) ने आखिरी दस दिनों में इबादत बढ़ाने की सलाह दी। सुनन तिर्मिज़ी (हदीस 3513) में यह दुआ लैलतुल क़द्र के लिए खास बताई गई है।
कब पढ़ें:
- रमज़ान की 21वीं से 29वीं रात तक। भारत में 27वीं रात को सबसे ज़्यादा पढ़ा जाता है, क्योंकि हनफी मज़हब में इसे खास माना जाता है।
लैलतुल क़द्र दुआ के फायदे
- माफी: यह दुआ पिछले गुनाहों को माफ़ करवाती है।
- रहमत: लैलतुल क़द्र में दुआ कबूल होने का वादा है।
- सवाब: इस रात की इबादत हज़ार महीनों से ज़्यादा का सवाब देती है।
- सुकून: अल्लाह की याद से दिल को राहत मिलती है।
सूरह अल-क़द्र (97:3) में फरमाया गया: “लैलतुल क़द्र हज़ार महीनों से बेहतर है।” यह दुआ उस बेहतरी को पाने का रास्ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. लैलतुल क़द्र दुआ कब पढ़ें?
रमज़ान की 21, 23, 25, 27, या 29 की रात को, खासकर 27वीं रात।
2. क्या यह दुआ सिर्फ़ लैलतुल क़द्र के लिए है?
नहीं, इसे कभी भी माँग सकते हैं, मगर इस रात में खास अहमियत है।
3. अगर दुआ याद न हो तो क्या करें?
“अल्लाहुम्मा इगफिरली” (ऐ अल्लाह! मुझे माफ़ कर) पढ़ें या अपनी ज़बान में माफी माँगें।
4. लैलतुल क़द्र कैसे पहचानें?
यह रात शांत और मुबारक होती है। नमाज़, दुआ, और कुरआन से इसे तलाश करें।
आखिरी बात
“लैलतुल क़द्र दुआ” अल्लाह से माफी और रहमत माँगने की सुन्नत दुआ है। यह छोटी है, लेकिन हज़ार महीनों से ज़्यादा की इबादत का सवाब दे सकती है। रमज़ान की आखिरी दस रातों में, खासकर 27वीं रात को, इसे बार-बार पढ़ें। नमाज़, कुरआन, और सजदे में इसे दिल से माँगें। भारत में लोग इसे खूब अहमियत देते हैं। और दुआओं के लिए Dua India पर जाएँ। अल्लाह हमें लैलतुल क़द्र की बरकत नसीब करे, आमीन!