Mayyat Ke Liye Maghfirat Ki Dua | मरहूम के लिए बख़्शिश की दुआ

Quick Guide
मुख़्तसर रहनुमाई

मय्यत के लिए मग़फ़िरत की दुआ

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ, وَعَافِهِ وَاعْفُ عَنْهُ, وَأَكْرِمْ نُزُلَهُ, وَوَسِّعْ مُدْخَلَهُ
तलफ़्फ़ुज़:
अल्लाहुम्मग़-फ़िर लहू वर-हमहू, व 'आफ़िही वअ'-फु 'अन्हु, व अकरिम नुज़ुलहू, व वस्सि'अ मुद-ख़लहू
तर्जुमा:
ऐ अल्लाह! इसकी (मरहूम की) मग़फिरत फरमा, और इस पर रहमत नाजिल फरमा, और इसे आफियत (सुकून) दे, और इसे माफ़ फरमा। इसकी मेज़बानी की इज़्ज़त फरमा और इसके दाखिल होने की जगह (कब्र) को कुशादा (चौड़ा) कर दे।
मसदर: 
Sahih Muslim: 963
mayyat ke liye maghfirat ki dua

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Inteqal Ke Baad Dil Ki Kaifiyat

जब कोई अपना इस दुनिया से चला जाता है, तो पीछे सिर्फ खामोशी और यादें रह जाती हैं। यह एक ऐसा गम है जिसे लफ्ज़ों में बयान करना मुमकिन नहीं। दिल में एक अजीब सा खालीपन महसूस होता है और कई सवाल उमड़ते हैं। बिछड़ने का दर्द इंसान को तोड़ देता है, लेकिन यही वह वक्त है जब हमारे सबर और ईमान का इम्तिहान होता है।

गम करना और आँखों से आंसू बहना इंसानी फितरत है। हमारे प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने भी अपनों के जुदाई पर आंसू बहाए हैं। इसलिए, अगर आपका दिल भारी है, तो इसे गलत न समझें। यह मोहब्बत की निशानी है जो जाने वाले के साथ थी और हमेशा रहेगी।

Islam Mayyat Ke Haq Mein Kya Sikhata Hai

इस्लाम हमें मायूसी के अंधेरे में अकेला नहीं छोड़ता। हमारा दीन सिखाता है कि मौत खात्मा नहीं, बल्कि एक सफर का नया पड़ाव है। मरहूम (गुज़रे हुए शख्स) के साथ हमारा ताल्लुक दुनिया से जाने के बाद भी खत्म नहीं होता।

अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने हमें “दुआ” का एक ऐसा बेहतरीन जरिया दिया है, जिससे हम अपने प्यारों को तोहफा भेज सकते हैं। मय्यत के लिए मग़फिरत की दुआ करना, उनके लिए रहमत मांगना और उनके दर्जात की बुलंदी की उम्मीद रखना—यह सब उन तक पहुँचता है। अल्लाह का करम बेहिसाब है और वह अपने बंदों की टूटे दिल से निकली हुई दुआएं जरूर सुनता है। हमें उम्मीद रखनी चाहिए कि हमारी दुआएं मरहूम के लिए राहत का सबब बनेंगी।

Mayyat Ke Liye Padhi Jane Wali Masnoon Duas

यहाँ एक बहुत ही जामे और मसनून दुआ दी जा रही है जो नमाज़-ए-जनाज़ा में और उसके बाद भी मय्यत के लिए पढ़ी जा सकती है।

Arabic Dua

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ, وَعَافِهِ وَاعْفُ عَنْهُ, وَأَكْرِمْ نُزُلَهُ, وَوَسِّعْ مُدْخَلَهُ

तलफ़्फ़ुज़

इस दुआ को पढ़ते वक्त अल्फाज़ की अदायगी (pronunciation) पर खास ध्यान दें। दुआ का असर उसके मायने और पढ़ने वाले के खुलूस में होता है।

Hindi

“अल्लाहुम्मग़-फ़िर लहू वर-हमहू, व ‘आफ़िही वअ’-फु ‘अन्हु, व अकरिम नुज़ुलहू, व वस्सि’अ मुद-ख़लहू”

(नोट: अगर मय्यत औरत है, तो ‘लहू’ की जगह ‘लहा’ और ‘अन्हु’ की जगह ‘अन्हा’ पढ़ें)

Roman (Hinglish)

“Allahummaghfir lahu warhamhu, wa ‘aafihi wa’fu ‘anhu, wa akrim nuzulahu, wa wassi’ mudkhalahu.”

तर्जुमा

“ऐ अल्लाह! इसकी (मरहूम की) मग़फिरत फरमा, और इस पर रहमत नाजिल फरमा, और इसे आफियत (सुकून) दे, और इसे माफ़ फरमा। इसकी मेज़बानी की इज़्ज़त फरमा और इसके दाखिल होने की जगह (कब्र) को कुशादा (चौड़ा) कर दे।”

Masdar

(Sahih Muslim: 963)


Arabic Dua (Short Qur’anic Dua)

رَبَّنَا اغْفِرْ لَنَا وَلِإِخْوَانِنَا الَّذِينَ سَبَقُونَا بِالْإِيمَانِ

तलफ़्फ़ुज़

यह कुरान मजीद की आयत है जिसे दुआ के तौर पर पढ़ा जाता है।

Hindi

“रब्बनग़-फ़िर लना व लि-इख़्वाहिनल्लज़ीना सबकूना बिल-ईमान”

Roman (Hinglish)

“Rabbanagh-fir lana wa li-ikhwaninal-lazeena sabaquna bil-iman.”

तर्जुमा

“ऐ हमारे रब! हमें बख़्श दे और हमारे उन भाइयों को भी जो हमसे पहले ईमान ला चुके हैं।”

Masdar

(Surah Al-Hashr: 59:10)

Dua Karte Waqt Dil Ka Rawaiya

मय्यत के लिए मग़फिरत की दुआ करते वक्त यह अहसास होना जरूरी है कि हम किससे मांग रहे हैं। अल्फाज़ से ज्यादा दिल की कैफियत मायने रखती है।

  • खुलूस (Sincerity): दुआ सिर्फ रस्म पूरी करने के लिए न करें, बल्कि दिल की गहराई से मरहूम के लिए तड़प कर मांगें।
  • सबर: अल्लाह के फैसले पर राज़ी रहें। सबर का मतलब पत्थर दिल होना नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा में सुकून तलाशना है।
  • भरोसा: पूरा यकीन रखें कि अल्लाह गफूर-उर-रहीम है। वह आपकी दुआ सुन रहा है और वह आपके अज़ीज़ के साथ रहम का मामला फरमाएगा।

Zinda Logon Ke Liye Bhi Paighaam

मौत की खबर हमें भी एक खामोश पैगाम देती है। यह याद दिलाती है कि दुनिया की ज़िंदगी आरज़ी (temporary) है। आज हम मय्यत के लिए मग़फिरत की दुआ कर रहे हैं, कल कोई हमारे लिए करेगा।

इसलिए, अपनी ज़िंदगी में नेकियों को शामिल करना और दूसरों के साथ अच्छा सुलूक करना जरूरी है। दुआ का यह सिलसिला पीढ़ियों को जोड़ कर रखता है। अपने बुज़ुर्गों और प्यारों की यादों को ज़िंदा रखने का सबसे बेहतरीन तरीका यही है कि हम उनकी तरफ से सदका-ए-जारिया करें और उनके हक़ में हाथ उठाते रहें।

मुख़्तसर सवाल-जवाब

क्या हर मुसलमान के लिए मग़फिरत की दुआ की जा सकती है?
जी हाँ, हर वो शख्स जो ईमान की हालत में दुनिया से गया हो, उसके लिए मग़फिरत और रहमत की दुआ करना हमारा हक़ भी है और फ़र्ज़ भी। चाहे वो रिश्तेदार हो, दोस्त हो या कोई भी आम मुसलमान।

क्या मय्यत के लिए अपनी जुबान में दुआ मांगना ठीक है?
बिल्कुल। अरबी दुआएं मसनून और अफ़ज़ल हैं, लेकिन अगर आपको अरबी नहीं आती, तो आप अपनी मादरी जुबान (Hindi, Urdu, English) में भी अल्लाह से दुआ कर सकते हैं। अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त दिलों का हाल जानता है और वह हर जुबान समझता है।

Aakhiri Baat

जाने वाले चले जाते हैं, लेकिन दुआ का दरवाजा हमेशा खुला रहता है। अपने गम को दुआ में बदल दें। अल्लाह की रहमत से कभी मायूस न हों। मय्यत के लिए मग़फिरत की दुआ करना उनके लिए सबसे बड़ा तोहफा है जो आप उन्हें अभी भेज सकते हैं। अल्लाह हम सबको सबर-ए-जमील अता फरमाए और हमारे तमाम मरहूमीन की पूरी-पूरी बख़्शिश फरमाए। आमीन।