Mayyat Ko Ghusl Dene Ka Sunnat Tarika: Step-by-Step Guide in Hindi

Quick Guide
मुख़्तसर रहनुमाई

Mayyat Ko Ghusl Dene Ka Sunnat Tarika

بِسْمِ اللَّهِ وَعَلَى مِلَّةِ رَسُولِ اللَّهِ
तलफ़्फ़ुज़:
बिस्मिल्लाहि व अला मिल्लति रसूलल्लाहि
English:
Bismillahi wa ala millati Rasulillah (In the name of Allah and upon the religion of the Messenger of Allah)
मसदर: 
सुनन अबू दाऊद (3221)
Mayyat Ko Ghusl Dene Ka Tarika Dua Main

Table of Content

मौत एक ऐसी हक़ीक़त है जिसका सामना हर इंसान को करना है। जब हमारे किसी अज़ीज़ या जानने वाले का इंतिक़ाल हो जाता है, तो उस मुश्किल और ग़मगीन वक़्त में ज़िंदों पर कुछ अहम ज़िम्मेदारियाँ आयद होती हैं। इन्हीं में से एक सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी मरने वाले को पूरे एहतराम (इज़्ज़त) के साथ नहलाना है।

अक्सर देखा गया है कि जब किसी घर में मय्यत हो जाती है, तो लोग नहलाने के लिए किसी आलिम या मस्जिद के इमाम को ही तलाश करते हैं क्योंकि आम लोगों को सही तरीक़ा मालूम नहीं होता। जबकि शरीयत का हुक्म है कि मय्यत के सबसे क़रीबी रिश्तेदार उसे अपने हाथों से ग़ुस्ल दें। अगर आप mayyat ko ghusl dene ka tarika और इसके ज़रूरी अहकाम जानना चाहते हैं, तो यह मुकम्मल गाइड आपके लिए है।


1. मय्यत को ग़ुस्ल देना किस पर फ़र्ज़ है?

मरने वाले को ग़ुस्ल देना ‘फ़र्ज़-ए-किफ़ाया’ है। इसका मतलब है कि अगर बस्ती या मोहल्ले के कुछ लोग मय्यत को नहला दें, तो सब की तरफ़ से ज़िम्मेदारी पूरी हो जाएगी। लेकिन अगर कोई भी न नहलाए, तो जिन्हें ख़बर थी, वे सब गुनाहगार होंगे।

कौन किसे नहला सकता है?

  • मर्द मय्यत: एक मर्द को सिर्फ़ मर्द ही नहला सकते हैं (चाहे वे बेटे, भाई या दोस्त हों)।
  • औरत मय्यत: एक औरत को सिर्फ़ औरतें ही ग़ुस्ल दे सकती हैं।
  • शौहर और बीवी: बीवी अपने इंतिक़ाल कर चुके शौहर को नहला सकती है। इसी तरह अगर कोई छोटा बच्चा (नाबालिग़) है, तो उसे मर्द या औरत कोई भी नहला सकता है।

2. मय्यत को ग़ुस्ल देने के लिए ज़रूरी सामान

ग़ुस्ल की तैयारी करने से पहले इन चीज़ों का इंतज़ाम कर लेना चाहिए:

  1. साफ़ पानी: पानी को हल्का गर्म कर लें (ताकि मय्यत के जिस्म को सख़्ती महसूस न हो)।
  2. बेरी के पत्ते (Beri leaves): पानी में बेरी के पत्ते डालकर उबालना सुन्नत है। अगर बेरी के पत्ते न मिलें तो आम साबुन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  3. काफ़ूर (Camphor): आख़िर में बहाने वाले पानी में काफ़ूर मिलाना ज़रूरी है, इससे जिस्म में ख़ुशबू आती है और कीड़े-मकोड़े क़रीब नहीं आते।
  4. दस्ताने (Gloves): नहलाने वाले के हाथों में पहनने के लिए दस्ताने या कपड़े के मोटे टुकड़े।
  5. रुई (Cotton): मय्यत के नाक, कान और मुँह में रखने के लिए।

3. Mayyat Ko Ghusl Dene Ka Tarika (Step-by-Step)

मय्यत को नहलाने का तरीक़ा ज़िंदा इंसान के नहाने के तरीक़े से काफ़ी मिलता-जुलता है। इसे निहायत नरमी और एहतराम के साथ इन स्टेप्स में मुकम्मल करें:

स्टेप 1: पर्दा और तैयारी मय्यत को एक तख़्त या चारपाई पर लिटाएं। उस जगह मुकम्मल पर्दा होना चाहिए (सिर्फ़ नहलाने वाले और मदद करने वाले वहाँ मौजूद हों)। मय्यत के बदन पर नाफ़ (नाभि) से लेकर घुटनों तक एक मोटा कपड़ा डाल दें, ताकि सतर (शर्मगाह) न दिखे। नहलाते वक़्त मय्यत के सतर को देखना हराम है।

स्टेप 2: इस्तिंजा कराना (सफ़ाई) नहलाने वाला अपने हाथों में दस्ताने (Gloves) पहन ले या कोई कपड़ा लपेट ले। अब उस मोटे कपड़े के अंदर से ही (बिना देखे) मय्यत के प्राइवेट पार्ट्स को हल्के हाथ से धोकर साफ़ करे। साथ ही मय्यत के पेट को ऊपर से नीचे की तरफ़ हल्का सा दबाएं, ताकि अगर पेट में कोई गंदगी हो तो निकल जाए, और फिर उसे साफ़ कर दें।

स्टेप 3: मय्यत का वुज़ू अब मय्यत को वुज़ू कराएं।

  • अहम बात: मय्यत के मुँह और नाक के अंदर पानी नहीं डाला जाता। इसके बजाय, एक गीली रुई (Cotton) या कपड़े को उंगली में लपेट कर मय्यत के दांतों, मसूड़ों और नाक के अंदर अच्छी तरह फेर दें।
  • फिर मय्यत का चेहरा धोएं, दोनों हाथ कोहनियों तक धोएं, सर का मसह करें और आख़िर में दोनों पैर धोएं।

स्टेप 4: सर और दाढ़ी को धोना अब मय्यत के सर के बालों और दाढ़ी (अगर मर्द है) या औरतों के बालों को साबुन या शैम्पू से अच्छी तरह धोकर साफ़ करें।

स्टेप 5: दाएँ और बाएँ तरफ़ पानी बहाना

  • मय्यत को हल्की करवट दिलाकर बाएँ (Left) पहलू पर करें और दाएँ (Right) हिस्से पर गले से लेकर पैर तक पानी बहाएं।
  • फिर दाएँ पहलू पर करवट दिलाकर बाएँ (Left) हिस्से पर पानी बहाएं।
  • पूरे जिस्म को हल्के हाथों से मलें ताकि कोई जगह सूखी न रहे।

स्टेप 6: काफ़ूर वाला पानी आख़िर में जो पानी मय्यत के पूरे जिस्म पर बहाया जाए, उसमें काफ़ूर (Camphor) मिला लें। यह पानी सर से लेकर पाँव तक बहा दें।

स्टेप 7: बदन पोछना और कफ़न पहनाना ग़ुस्ल मुकम्मल होने के बाद, मय्यत के जिस्म को किसी साफ़ और सूखे तौलिये से हल्के हाथों से पोछ लें, ताकि कफ़न गीला न हो। इसके बाद मय्यत कफ़न पहनाने के लिए तैयार है।


4. मय्यत की दुआ और मग़फ़िरत (Mayyat Ki Dua)

जब किसी की मौत की ख़बर सुनें, तो फ़ौरन “इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन” (बेशक हम अल्लाह ही के लिए हैं और हमें उसी की तरफ़ लौटकर जाना है) पढ़ें।

मय्यत को ग़ुस्ल देने के दौरान कोई ख़ास लंबी अरबी दुआ मुक़र्रर नहीं है, आप दिल ही दिल में मय्यत की बख़्शिश और मग़फ़िरत के लिए दुआ कर सकते हैं। अलबत्ता, जनाज़े की नमाज़ के दौरान यह मशहूर mayyat ki dua पढ़ी जाती है:

اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِحَيِّنَا وَمَيِّتِنَا وَشَاهِدِنَا وَغَائِبِنَا وَصَغِيرِنَا وَكَبِيرِنَا وَذَكَرِنَا وَأُنْثَانَا (अल्लाहुम्मग़-फ़िर लि-हय्यिना व मय्यितिना व शाहिदिना व ग़ाइबिना व सग़ीरिना व कबीरिना व ज़करिना व उन्साना) तर्जुमा: ऐ अल्लाह! हमारे ज़िंदों को और हमारे मुर्दों को, जो हम में मौजूद हैं और जो ग़ायब हैं, हमारे छोटों को और हमारे बड़ों को, हमारे मर्दों को और हमारी औरतों को बख़्श दे।


अक्सर पूछे जाने वाले सवालात (FAQs)

सवाल: क्या ग़ुस्ल देने वाले के लिए नहाना ज़रूरी है?
जवाब: जिसने मय्यत को ग़ुस्ल दिया हो, उसके लिए मुस्तहब (बेहतर) है कि वह भी नमाज़-ए-जनाज़ा से पहले नहा ले, लेकिन यह फ़र्ज़ नहीं है। अगर वह सिर्फ़ वुज़ू कर ले तब भी काफ़ी है।

सवाल: अगर एक्सीडेंट या जलने की वजह से मय्यत का जिस्म ख़राब हो तो क्या करें?
जवाब: अगर पानी बहाने से जिस्म की खाल (Skin) उखड़ने का डर हो या डॉक्टर ने पानी डालने से मना किया हो, तो ऐसी सूरत में मय्यत को सिर्फ़ ‘तयम्मुम’ कराया जाएगा।

सवाल: क्या औरतों की चोटी (Braids) को ग़ुस्ल के वक़्त खोलना ज़रूरी है?
जवाब: जी हाँ, औरत मय्यत को नहलाते वक़्त उसके बालों की चोटी खोलकर अच्छी तरह धोना चाहिए। फिर सूखने के बाद बालों को दो या तीन हिस्सों में बांटकर कफ़न के ऊपर (सीने की तरफ़) रख दिया जाता है।


अल्लाह हम सबको इस आख़िरी सफ़र की तैयारी करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए और हमारे तमाम गुज़रे हुए अज़ीज़ों की मग़फ़िरत फरमाए। आमीन।

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