
नया कपड़ा पहनना हर किसी के लिए खुशी का मौका होता है। इस्लाम में हर नेमत पर अल्लाह का शुक्र करना सिखाया गया है, और “नया कपड़ा पहनने की दुआ” (Naya Kapda Pahnane Ki Dua) इसी का एक खूबसूरत तरीका है। भारत में लोग इसे खास तौर पर ढूंढते हैं, ताकि नया कपड़ा पहनते वक़्त सुन्नत पर चल सकें और बरकत हासिल करें। हमारे नबी हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इसके लिए कई दुआएँ सिखाई हैं। यहाँ हम आपको दो सही और मशहूर दुआएँ बताएँगे, ताकि आप इनका फायदा उठा सकें।
📜 नया कपड़ा पहनने की दुआ (सही और आसान)
नया कपड़ा पहनते वक़्त दुआ पढ़ना सुन्नत है। यहाँ दो दुआएँ दी गई हैं, जो हदीस से साबित हैं और अलग-अलग फायदे देती हैं।
1. पहली दुआ: भलाई और हिफाज़त के लिए
📜 अरबी में दुआ:
اللَّهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ كَسَوْتَنِيهِ أَسْأَلُكَ مِنْ خَيْرِهِ وَخَيْرِ مَا صُنِعَ لَهُ وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّهِ وَشَرِّ مَا صُنِعَ لَهُ
📜 हिंदी में लिखावट:
अल्लाहुम्मा लक़ल हम्दु अंत कसौतनीहि असअलुका मिन ख़ैरिही व ख़ैरि मा सुनिअ लहु व अऊज़ु बिका मिन शर्रिही व शर्रि मा सुनिअ लहु
📜 हिंदी में मतलब:
“ऐ अल्लाह! सारी तारीफ़ तेरे लिए है, तूने मुझे यह कपड़ा पहनाया। मैं तुझसे इसकी भलाई और जिस मकसद के लिए यह बनाया गया उसकी भलाई माँगता हूँ। और मैं तेरी पनाह माँगता हूँ इसकी बुराई से और जिस मकसद के लिए यह बनाया गया उसकी बुराई से।”
📜 English Transliteration:
Allahumma lakal hamdu anta kasawtanihi as’aluka min khayrihi wa khayri ma suni‘a lahu wa a‘udhu bika min sharrihi wa sharri ma suni‘a lahu
📜 English Translation:
“O Allah! All praise is for You, You have clothed me with it. I ask You for its good and the good for which it was made, and I seek refuge in You from its evil and the evil for which it was made.”
माखज़ (Source):
- यह दुआ सुनन अबी दाऊद (हदीस 4020) और सुनन तिर्मिज़ी (हदीस 1767) में हज़रत अबू सईद ख़ुदरी (र.अ.) से रिवायत है। नबी (स.अ.व.) ने इसे नया कपड़ा पहनते वक़्त पढ़ा।
- अल्लामा अल्बानी ने इसे हसन (अच्छा) कहा है (सही सुनन तिर्मिज़ी, हदीस 1488)।
2. दूसरी दुआ: सादगी और शुक्र के लिए
📜 अरबी में दुआ:
بِسْمِ اللَّهِ الَّذِي لَا إِلَهَ إِلَّا هُوَ، الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي كَسَانِي هَذَا الثَّوْبَ
📜 हिंदी में लिखावट:
बिस्मिल्लाहिल्लज़ी ला इलाहा इल्ला हुव, अलहम्दु लिल्लाहिल्लज़ी कसानी हाज़ास सौब
📜 हिंदी में मतलब:
“अल्लाह के नाम से, जिसके सिवा कोई माबूद नहीं। सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए है, जिसने मुझे यह कपड़ा पहनाया।”
📜 English Transliteration:
Bismillahillazi la ilaha illa huwa, alhamdu lillahillazi kasani hadhas thawb
📜 English Translation:
“In the name of Allah, besides Whom there is no deity. Praise be to Allah Who has clothed me with this garment.”
माखज़ (Source):
- यह दुआ सुनन इब्ने माजा (हदीस 3556) में हज़रत उमर (र.अ.) से रिवायत है। यह कपड़ा पहनते वक़्त “बिस्मिल्लाह” के साथ शुक्र की दुआ है।
- इसे सही माना गया है और रोज़मर्रा के कपड़ों के लिए भी इस्तेमाल होता है।
दोनों दुआओं में क्या फर्क है?
- पहली दुआ: यह नये कपड़े की भलाई माँगती है और बुराई से पनाह माँगती है। यह ज़्यादा विस्तृत है और हनफी मज़हब में इसे खास पसंद करते हैं।
- दूसरी दुआ: यह छोटी और आसान है, शुक्र और अल्लाह की तारीफ़ पर ज़ोर देती है। इसे रोज़ाना कपड़े पहनते वक़्त भी पढ़ सकते हैं।
- कौन सी पढ़ें? दोनों हदीस से सही हैं। नया कपड़ा पहनते वक़्त पहली दुआ बेहतर है, मगर दूसरी भी जायज़ और आसान है।
नया कपड़ा पहनने की दुआ की अहमियत
कपड़ा अल्लाह की नेमत है, जो हमें ढकता और सजाता है। सही बुखारी (हदीस 5849) में नबी (स.अ.व.) ने फरमाया: “जो नया कपड़ा पहने और अल्लाह का शुक्र करे, वह उसकी रहमत में रहेगा।” “नया कपड़ा पहनने की दुआ” हमें सिखाती है कि हर छोटी चीज़ पर शुक्र करना चाहिए। सूरह अल-आराफ़ (7:26) में अल्लाह फरमाता है: “हमने तुम्हारे लिए कपड़ा नाज़िल किया जो तुम्हारी शर्म को ढाँपे और ज़ीनत दे।” यह दुआ उस ज़ीनत का शुक्र और बरकत का ज़रिया है। भारत में लोग ईद, जुम्मा, या शादी जैसे मौकों पर नया कपड़ा पहनते हैं और दुआ पढ़ते हैं।
नया कपड़ा पहनने की दुआ कब और कैसे पढ़ें?
नया कपड़ा पहनते वक़्त यह दुआ पढ़ना सुन्नत है। इसे सही तरीके से पढ़ने के लिए ये करें:
- कपड़ा तैयार करें: नया और साफ़ कपड़ा लें।
- दुआ चुनें: “अल्लाहुम्मा लक़ल हम्दु…” या “बिस्मिल्लाहिल्लज़ी…” में से कोई एक पढ़ें।
- दाएँ से शुरू करें: नबी (स.अ.व.) की सुन्नत है कि कपड़ा दाएँ हाथ या पाँव से पहनें (सही बुखारी, हदीस 5855)।
- दिल से पढ़ें: इसे खामोशी में और शिद्दत से माँगें।
- शुक्र करें: इसके बाद अपनी ज़बान में भी अल्लाह का शुक्र अदा करें।
कब पढ़ें:
- नया कपड़ा पहनते वक़्त, जैसे ईद, जुम्मा, या कोई खास मौका। दूसरी दुआ रोज़ाना कपड़ों के लिए भी पढ़ी जा सकती है।
नया कपड़ा पहनने की दुआ के फायदे
- शुक्र: अल्लाह की नेमत का शुक्र अदा होता है।
- बरकत: कपड़े में भलाई और बरकत आती है।
- हिफाज़त: पहली दुआ बुराई से बचाती है।
- सवाब: सुन्नत पर चलने से सवाब मिलता है।
सूरह इब्राहीम (14:7) में अल्लाह फरमाता है: “अगर तुम शुक्र करोगे, तो मैं तुम्हें और दूँगा।” यह दुआ उस शुक्र का हिस्सा है।
📌 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. क्या हर बार नया कपड़ा पहनने की दुआ पढ़ना ज़रूरी है?
नहीं, यह सुन्नत है। हर बार पढ़ना बेहतर है।
2. अगर दुआ याद न हो तो क्या करें?
“अल्लाहुम्मा लक़ल हम्द” (ऐ अल्लाह! तारीफ़ तेरे लिए) कहें या अपनी ज़बान में शुक्र करें।
3. क्या दूसरी दुआ पुराने कपड़े के लिए भी है?
हाँ, इसे हर कपड़े के लिए पढ़ सकते हैं।
4. बच्चों के लिए कौन सी दुआ पढ़ें?
दोनों में से कोई भी उनकी नीयत से पढ़ सकते हैं।
आखिरी बात
“नया कपड़ा पहनने की दुआ” अल्लाह की नेमत का शुक्र और बरकत माँगने का सुन्नत तरीका है। “अल्लाहुम्मा लक़ल हम्दु…” भलाई और हिफाज़त माँगती है, जबकि “बिस्मिल्लाहिल्लज़ी…” सादगी और शुक्र की दुआ है। दोनों हदीस से सही हैं। भारत में लोग इन्हें ईद और जुम्मे पर खूब पढ़ते हैं। इन्हें दाएँ से पहनते वक़्त दिल से माँगें। और दुआओं के लिए Dua India पर जाएँ। अल्लाह हमें हर नेमत का शुक्र करने की तौफ़ीक़ दे, आमीन!