घर में नन्हे क़दमों की आहट महज़ एक वाक़िया नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ़ से भेजा गया एक ख़ूबसूरत तोहफ़ा है। नये पैदा होने वाले बच्चे के लिए दुआ करना सुन्नत-ए-नबवी भी है और वालिदैन के दिल का सुकून भी। जब एक छोटा सा बच्चा पहली बार अपनी आँखें खोलता है, तो पूरे घर का माहौल बदल जाता है। हर तरफ़ ख़ुशी, उम्मीद और एक नयी ज़िंदगी की महक होती है।
इस ख़ास मौक़े पर वालिदैन, दादा-दादी और सभी अज़ीज़ों के दिल में अपने नन्हे मेहमान के लिए बेशुमार दुआएँ उमड़ती हैं। इस्लाम हमें सिखाता है कि हम इस ख़ुशी के लम्हे में अल्लाह का शुक्र अदा करें और अपने बच्चे की हिफ़ाज़त और बरकत के लिए उसी रब्ब से दरख्वास्त करें जिसने हमें इस नेमत से नवाज़ा है।
Naye Bachche Ki Aamad Aur Dil Ka Jazba
बच्चे की पैदाइश के साथ ही घर में एक अजीब सा नूर और रहमत का एहसास होने लगता है। माँ-बाप के लिए यह एक भावुक पल होता है, जहाँ उनके लबों पर शुक्र के अलफ़ाज़ होते हैं और आँखों में आने वाले कल के लिए नेक तमन्नाएँ। नये पैदा होने वाले बच्चे के लिए की जाने वाली दुआएँ असल में उस बच्चे के लिए एक रूहानी साया होती हैं, जो उसे अल्लाह की पनाह में ले आती हैं।
यह वह वक़्त होता है जब हम दुनिया की हर सुख-सुविधा से बढ़कर उस मासूम के लिए अल्लाह की रज़ा और उसकी हिफ़ाज़त चाहते हैं। इस्लाम में बच्चे की पैदाइश को महज़ एक जिस्मानी वाक़िया नहीं माना गया, बल्कि इसे रूहानी तौर पर एक बड़ी नेमत और ज़िम्मेदारी समझा गया है।
Islam Mein Aulad Ko Kaise Neemat Samjha Gaya Hai
इस्लाम की तालीमात के मुताबिक़, औलाद अल्लाह की तरफ़ से दी गई एक अमानत है। यह वह रहमत है जो घर को खुशियों से भर देती है और माँ-बाप के लिए सदक़ा-ए-जारिया का ज़रिया बनती है।
- अल्लाह का फ़ज़्ल: बच्चा होना अल्लाह की मर्जी और उसका बड़ा फ़ज़्ल है।
- ज़िम्मेदारी का एहसास: औलाद के आने के बाद वालिदैन के कंधों पर उसे नेक और सालेह इंसान बनाने की ज़िम्मेदारी आती है।
- दुआ का मक़ाम: दुआ वह मज़बूत ज़रिया है जिससे हम अपने बच्चे के नसीब, उसकी सेहत और उसकी हिफ़ाज़त के लिए अल्लाह से सीधा राब्ता क़ायम करते हैं।
यह यकीन रखना कि हर बच्चा अपनी क़िस्मत और रिज़्क लेकर आता है, वालिदैन के दिल को इत्मीनान बख्शता है।
Naye Paida Hone Wale Bachche Ke Liye Padhi Jane Wali Masnoon Duas
जब घर में नया बच्चा पैदा हो, तो सुन्नत के मुताबिक़ उसके लिए बरकत और हिफ़ाज़त की दुआ माँगना बहुत मुबारक़ अमल है। यहाँ कुछ ऐसी दुआएँ दी जा रही हैं जो सहीह अहादीस और ज़िक्र से साबित हैं।
1. बच्चे की हिफ़ाज़त के लिए दुआ
यह दुआ प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) अपने नवासे हज़रत हसन और हज़रत हुसैन (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) के लिए पढ़ा करते थे ताकि वे हर तरह की बुरी नज़र और बुराई से महफ़ूज़ रहें।
Arabic Dua:
أُعِيذُكَ بِكَلِمَاتِ اللهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لَامَّةٍ
तलफ़्फ़ुज़:
उईज़ुका बि-कलिमातिल्लाहित-ताम्माति मिन कुल्लि शैतानिंव-व-हाम्मातिंव-व-मिन कुल्लि ऐनिल-लाम्माह।
Roman (Hinglish):
U’eedhuka bi kalimaatillaahit-taammah min kulli shaytaanin wa haammah, wa min kulli ‘aynin laammah.
तर्जुमा:
मैं तुझे अल्लाह के पूरे और मुकम्मल कलिमों की पनाह में देता हूँ, हर शैतान से, हर ज़हरीले जानवर से और हर लगने वाली (बुरी) नज़र से।
Masdar: सहीह बुखारी: 3371
2. बरकत और मुबारकबाद की दुआ
जब आप किसी को नये बच्चे की मुबारकबाद दें, तो इन अलफ़ाज़ के साथ दुआ देना बहुत अफ़ज़ल है:
Arabic Dua:
بَارَكَ اللهُ لَكَ فِي المَوْهُوبِ لَكَ، وَشَكَرْتَ الوَاهِبَ، وَبَلَغَ أَشُدَّهُ، وَرُزِقْتَ بِرَّهُ
तलफ़्फ़ुज़:
बारकल्लाहु लका फ़िल-मौहूबि लका, व-शकर्तल-वाहिबा, व-बलगा अशुद्दहू, व-रुज़िक़्ता बिर्रहू।
Roman (Hinglish):
Barakallahu laka fil mawhubi laka, wa shakartal waahiba, wa balagha ashuddahu, wa ruziqta birrahu.
तर्जुमा:
अल्लाह तुझे इस तोहफ़े (बच्चे) में बरकत दे, और तू अता करने वाले (अल्लाह) का शुक्र अदा करे, और यह अपनी जवानी को पहुँचे और तुझे इसकी नेक-बख़्ती (फ़रमाँबरदारी) नसीब हो।
Masdar: हिसनुल मुस्लिम
Walidain Ke Liye Dua Aur Tawazu
नये पैदा होने वाले बच्चे के लिए दुआ करने के साथ-साथ, वालिदैन के लिए भी यह वक़्त आज़िज़ी और तवाज़ु अपनाने का होता है। एक बच्चे की परवरिश सिर्फ़ अच्छी ग़िज़ा या कपड़ों से नहीं होती, बल्कि उन दुआओं से होती है जो माँ-बाप हर पल अपने बच्चे के लिए माँगते हैं।
- अल्लाह पर मुकम्मल भरोसा: वालिदैन को चाहिए कि वे अपने बच्चे के मुस्तक़बिल (future) की फ़िक्र में परेशान होने के बजाय अल्लाह की ज़ात पर भरोसा रखें।
- दुआ का सिलसिला: दुआ कोई एक दिन का अमल नहीं है। अपने बच्चे के लिए हमेशा नेक हिदायत और खैर की दुआ माँगते रहना चाहिए।
- शुक्र का जज़्बा: जब दिल शुक्र से भरा होता है, तो अल्लाह अपनी नेमतों में और इज़ाफ़ा फरमाता है। हर रोज़ इस बात का शुक्र अदा करें कि अल्लाह ने आपको औलाद जैसी अज़ीम नेमत से नवाज़ा।
Short Q&A
1. क्या नये पैदा होने वाले बच्चे के लिए दुआ करना ज़रूरी है?
जी हाँ, दुआ करना सुन्नत है और यह बच्चे के लिए रूहानी हिफ़ाज़त का ज़रिया बनती है। दुआ के ज़रिए हम बच्चे को अल्लाह की पनाह में देते हैं, जो सबसे बेहतरीन निगहबान है।
2. अगर कोई ख़ास दुआ याद न हो, तो क्या अपने लफ़्ज़ों में दुआ की जा सकती है?
बेशक। अल्लाह दिलों के हाल जानता है। अगर आपको अरबी दुआ याद नहीं है, तो आप अपनी ज़बान में अल्लाह से बच्चे की सेहत, लंबी उम्र, नेक ज़िंदगी और हिफ़ाज़त की दुआ माँग सकते हैं। रब्ब-ए-करीम नेक नीयत से मांगी गई हर दुआ सुनता है।
आख़िरी बात
नये पैदा होने वाले बच्चे के लिए दुआ करना उस नये सफ़र की इब्तिदा है जो एक नन्ही सी रूह इस दुनिया में शुरू करती है। बच्चे घर की रौनक़ होते हैं और उनकी मौजूदगी अल्लाह की रहमत का साया होती है। हमें चाहिए कि हम इन मासूमों के लिए हमेशा खैर, बरकत और सलामती की दुआ करें।
अल्लाह तआला तमाम बच्चों को अपने हिफ़्ज़-ओ-अमान में रखे, उन्हें वालिदैन की आँखों की ठंडक बनाए और एक नेक व बा-अमल इंसान बनने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।


