रात का वक्त है, घर में सब तरफ खामोशी है, लेकिन आपके ज़हन (mind) में शोर है। अक्सर ऐसा होता है कि दिन भर की थकान के बावजूद, जब हम बिस्तर पर लेटते हैं, तो नींद कोसों दूर महसूस होती है। कभी कल की फिक्र, कभी पुरानी बातें, तो कभी बस एक अजीब सी बेचैनी दिल और दिमाग को जकड़ लेती है।
आप अकेले नहीं हैं। बहुत से लोग हर रात करवटें बदलते हैं, सिर्फ थोड़े से सुकून की तलाश में। ऐसे वक्त में, जब दुनिया सो रही हो और आप जाग रहे हों, तो सबसे बेहतरीन सहारा अल्लाह का ज़िक्र है। यह neend aane ki dua आपके दिल को वो तसल्ली देगी जिसकी उसे सख्त ज़रूरत है।
इस्लाम और रात का सुकून
इस्लाम में रात को सिर्फ ‘सोने का वक्त’ नहीं, बल्कि अल्लाह की एक नेमत माना गया है। दिन भर की भागदौड़ के बाद, यह वो वक्त है जब बंदा अपने रब के करीब होता है।
जब इन्सान अपनी सारी परेशानियां अल्लाह के हवाले कर देता है, तो दिल को वो सुकून मिलता है जो किसी दुनियावी चीज़ में नहीं। दुआ पढ़ना सिर्फ चंद अल्फाज़ बोलना नहीं है, बल्कि यह अपने रब से यह कहने का एक तरीका है कि “या अल्लाह, मेरी जान और मेरा सुकून अब तेरे हाथ में है।”
नींद आने की मसनून दुआएं (Masnoon Duain)
हदीस शरीफ़ में सोने से पहले पढ़ने की दो बहुत प्यारी दुआएं बताई गई हैं। एक दुआ ख़ास तौर पर उनके लिए है जो बेचैनी महसूस करते हैं, और दूसरी आम तौर पर सोने के लिए है। आप अपनी ज़रूरत और सहूलियत के हिसाब से इन्हें पढ़ सकते हैं।
1. बेचैनी और हिफ़ाज़त के लिए दुआ (Recommended)
यह दुआ थोड़ी बड़ी है लेकिन बहुत असरदार है। इसमें हम अल्लाह से अपनी रूह (Soul) की हिफ़ाज़त और रहमत मांगते हैं। जब दिल घबरा रहा हो, तो इसे ज़रूर पढ़ें।
अरबी (Arabic Text):
بِاسْمِكَ رَبِّي وَضَعْتُ جَنْبِي، وَبِكَ أَرْفَعُهُ، فَإِنْ أَمْسَكْتَ نَفْسِي فَارْحَمْهَا، وَإِنْ أَرْسَلْتَهَا فَاحْفَظْهَا بِمَا تَحْفَظُ بِهِ عِبَادَكَ الصَّالِحِينَ
तलफ़्फ़ुज़ (Hindi Pronunciation):
बिस्मिका रब्बी व-ज़अतु जम्बी, व बिका अर-फउहू, फ़-इन अम-सक्ता नफ़सी फर-हमहा, व इन अर-सलतहा फह-फ़ज़हा बिमा तह-फ़ज़ु बिही इबादकस्-सालिहीन।
तर्जुमा (Meaning):
“तेरे नाम से ऐ मेरे रब! मैंने अपना पहलू (side) रखा है, और तेरी ही कुदरत से मैं इसे उठाऊंगा। अगर तू मेरी जान (सोते में) रोक ले, तो उस पर रहम फरमाना, और अगर तू उसे छोड़ दे (यानी ज़िंदा रखे), तो उसकी हिफ़ाज़त फरमाना, जैसे तू अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त फरमाता है।”
मस्दर (Reference): सहीह बुखारी: 6320
2. सोने की छोटी दुआ (Common Dua)
यह दुआ बहुत मुख़्तसर (short) और आसान है। हमारे प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) अक्सर सोने से पहले इसे पढ़ते थे।
अरबी (Arabic Text):
بِاسْمِكَ اللَّهُمَّ أَمُوتُ وَأَحْيَا
तलफ़्फ़ुज़ (Hindi Pronunciation):
बिस्मिका अल्लाहुम्मा अमूतु व-अह्या।
तर्जुमा (Meaning):
“ऐ अल्लाह! तेरे ही नाम से मैं मरता हूँ (सोता हूँ) और जीता हूँ (जागता हूँ)।”
मस्दर (Reference): सहीह बुखारी: 6324
सोने से पहले पढ़ने के आदाब
दुआ की बरकत तब और बढ़ जाती है जब हम उसे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के बताए हुए तरीके से पढ़ें।
- बिस्तर साफ़ करना: लेटने से पहले अपने बिस्तर को तीन बार झाड़ लेना सुन्नत है।
- दाहिनी करवट (Right Side): कोशिश करें कि दाहिनी करवट लेटें और अपना दाहिना हाथ गाल के नीचे रखें। यह सुन्नत तरीका है।
- माफ़ी और साफ़ दिल: सोने से पहले उन लोगों को माफ़ कर दें जिनसे आपको तकलीफ़ पहुँची हो। साफ़ दिल में सुकून जल्दी आता है।
अगर फिर भी नींद न आए (Restlessness)?
कभी-कभी दुआ पढ़ने के फौरन बाद भी नींद नहीं आती। ऐसे में घबराएं नहीं और न ही खुद को कोसें। यह वक्त अल्लाह ने शायद इसलिए दिया है कि आप उससे थोड़ी और बातें कर सकें।
ज़बरदस्ती सोने की कोशिश न करें। बस अपनी आँखों को बंद रखें और दुरुद शरीफ़ या अस्तग़फ़ार का विर्द करते रहें। अपनी साँसों को नार्मल रखें। बेचैनी खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगी और आपको पता भी नहीं चलेगा कि कब आपकी आँख लग गई।
आपके सवाल (Common Questions)
क्या यह दुआ रोज़ाना पढ़नी चाहिए?
जी हाँ, इसे अपनी हर रात की आदत बना लें। जिस तरह हम जिस्म के आराम के लिए बिस्तर पर जाते हैं, उसी तरह रूह के सुकून के लिए यह दुआ ज़रूरी है।
अगर बड़ी दुआ याद न हो तो?
कोई बात नहीं। अल्लाह दिलों का हाल जानता है। जब तक याद न हो, आप इसे देखकर पढ़ सकते हैं या सिर्फ छोटी दुआ (बिस्मिका अल्लाहुम्मा…) पढ़ लें। नीयत साफ़ होनी चाहिए।
क्या बच्चों को भी यह दुआ सिखा सकते हैं?
बिल्कुल। बच्चों को बचपन से ही छोटी दुआ सिखाना शुरू करें। इससे वो रात के डर से बचे रहते हैं और उन्हें सुकून की नींद आती है।
सुकून के साथ सोने की आदत
रात की तन्हाई को अपना दुश्मन न समझें। जब आप अल्लाह का नाम लेकर लेटते हैं, तो फ़रिश्ते आपकी हिफ़ाज़त करते हैं। अपनी सारी फिक्र, सारी थकान और कल की चिंता अल्लाह को सौंप दें।
सुकून बाज़ार में नहीं मिलता, यह अल्लाह की याद में मिलता है। आज रात, बस इस यकीन के साथ सो जाएं कि आपका रब जाग रहा है और वो आपकी हिफ़ाज़त कर रहा है।


