
नींद अल्लाह की खूबसूरत नेमत है, जो हमें थकान दूर करने और ताज़गी देती है। लेकिन कभी-कभी नींद नहीं आती, और हम बेचैन हो जाते हैं। भारत में लोग “नींद आने की दुआ” (Neend Aane Ki Dua) ढूंढते हैं, ताकि रात को सुकून मिले और बुरे सपनों से बचा जा सके। हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने सोने से पहले दुआएँ सिखाईं। यहाँ हम आपको तीन दुआएँ बताएँगे—दो जो हदीस और कुरआन से सही हैं, और एक जो लोगों में मशहूर है। इनके मतलब और फायदे जानकर आप इन्हें अपनी रात में शामिल करना चाहेंगे।
📜 नींद आने की दुआ (सही और आसान)
सोने से पहले दुआ पढ़ना सुन्नत है। यहाँ तीन दुआएँ हैं, जो नींद लाने और हिफाज़त के लिए हैं।
1. हदीस से सही दुआ
📜 अरबी में दुआ:
بِاسْمِكَ رَبِّي وَضَعْتُ جَنْبِي وَبِكَ أَرْفَعُهُ فَإِنْ أَمْسَكْتَ نَفْسِي فَارْحَمْهَا وَإِنْ أَرْسَلْتَهَا فَاحْفَظْهَا بِمَا تَحْفَظُ بِهِ عِبَادَكَ الصَّالِحِينَ
📜 हिंदी में लिखावट:
बिस्मिक रब्बी वज़अतु जंबी व बिका अरफअुहु फ इन अम्सकता नफ्सी फरहमहा व इन अरसाल्तहा फहफ़ज़हा बिमा तहफ़ज़ु बिहि इबादकस सालिहीन
📜 हिंदी में मतलब:
“ऐ मेरे रब! तेरे नाम से मैंने अपनी करवट रखी, और तेरे ही नाम से मैं इसे उठाऊँगा। अगर तू मेरी रूह को रोक ले (यानी मौत दे दे), तो उस पर रहम कर। और अगर तू उसे छोड़ दे (यानी ज़िंदा रखे), तो उसकी हिफाज़त कर, जैसे तू अपने नेक बन्दों की हिफाज़त करता है।”
📜 English Transliteration:
Bismika rabbi wada‘tu janbi wa bika arfa‘uhu, fa in amsakta nafsi farhamha, wa in arsaltaha fahfazha bima tahfazu bihi ‘ibadakas salihin
📜 English Translation:
“In Your name, my Lord, I lay down my side, and by You I raise it. If You take my soul, have mercy on it, and if You release it, protect it as You protect Your righteous servants.”
माखज़ (Source):
- सही बुखारी (हदीस 6320) और सही मुस्लिम (हदीस 2714) में हज़रत हुदैफ़ा (र.अ.) से रिवायत। नबी (स.अ.व.) सोने से पहले इसे पढ़ते थे।
- यह सही (Sahih) है और नींद के लिए मकबूल है।
2. कुरआन से दुआ (आयतुल कुर्सी)
📜 अरबी में दुआ:
اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ ۚ لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ ۚ لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ مَنْ ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِنْدَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ ۚ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۖ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ ۚ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ ۖ وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا ۚ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ
📜 हिंदी में लिखावट:
अल्लाहु ला इलाहा इल्ला हुवल हय्युल क़य्यूम, ला तअखुज़ुहु सिनतुन वला नौम, लहु मा फिस समावाति व मा फिल अर्ज़, मन ज़ल्लज़ी यशफउ इंदहु इल्ला बिइज़्निहि, यअलमु मा बैना अयदीहिम व मा खलफहुम, वला युहीतुना बिशयइम मिन इल्मिहि इल्ला बिमा शाअ, वसिअ कुर्सिय्युहुस समावाति वल अर्ज़, वला यऊदुहु हिफ्ज़ुहुमा, व हुवल अलीयुल अज़ीम
📜 हिंदी में मतलब:
“अल्लाह ऐसा है कि उसके सिवा कोई माबूद नहीं। वह ज़िंदा और कायम रखने वाला है। उसे न झपकी आती है, न नींद। जो कुछ आसमानों और ज़मीन में है, सब उसी का है। कौन है जो उसकी इजाज़त के बिना सिफारिश कर सके? वह जानता है जो उनके सामने और पीछे है। वे उसके इल्म में से कुछ भी नहीं समझ सकते, सिवाय इसके जो वह चाहे। उसकी कुर्सी आसमानों और ज़मीन को घेरे हुए है। उनकी हिफाज़त उसे थकाती नहीं। वह बहुत बुलंद और महान है।”
📜 English Transliteration:
Allahu la ilaha illa huwal hayyul qayyum, la ta’khudhuhu sinatun wala nawm, lahu ma fis samawati wa ma fil ard, man dhalladhi yashfa‘u ‘indahu illa bi-idhnihi, ya‘lamu ma bayna aydihim wa ma khalfahum, wala yuhituna bishay’in min ‘ilmihi illa bima sha’a, wasi‘a kursiyyuhus samawati wal ard, wala ya’uduhu hifzuhuma, wa huwal ‘aliyyul ‘azim
📜 English Translation:
“Allah! There is no god but He, the Ever-Living, the Sustainer. Neither drowsiness nor sleep overtakes Him. To Him belongs whatever is in the heavens and the earth. Who can intercede with Him except by His permission? He knows what is before them and what is behind them. They cannot grasp any of His knowledge except what He wills. His Kursi extends over the heavens and the earth, and their preservation does not tire Him. And He is the Most High, the Most Great.”
माखज़ (Source):
- सूरह अल-बक़रह (2:255), आयतुल कुर्सी। सही बुखारी (हदीस 5010) में हज़रत अबू हुरैरह (र.अ.) से रिवायत कि नबी (स.अ.व.) ने इसे सोने से पहले पढ़ने की सलाह दी।
- नींद के लिए हिफाज़त और सुकून की सबसे बड़ी दुआ।
3. मशहूर दुआ (आपके द्वारा दी गई)
📜 अरबी में दुआ:
اللَّهُمَّ غَارَتِ النُّجُومُ وَهَدَأَتِ الْعُيُونُ وَأَنْتَ حَيٌّ قَيُّومٌ لَا تَأْخُذُكَ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ أَهْدِئْ لَيْلِي وَأَنِمْ عَيْنِي
📜 हिंदी में लिखावट:
अल्लाहुम्मा ग़ारतिन नुजूमु व हदा अतिल उयूनु व अन्त हय्युन क़य्यूमुन ला तअखुज़ुका सिनतुन वला नौमुन या हय्यु या क़य्यूमु अहदिअ लैली व अनिम ऐनी
📜 हिंदी में मतलब:
“ऐ अल्लाह! तारे डूब गए और आँखें शांत हो गईं। तू ज़िंदा और कायम रखने वाला है। तुझे न झपकी आती है, न नींद। ऐ ज़िंदा! ऐ कायम रहने वाले! मेरी रात को शांत कर और मेरी आँखों को नींद दे।”
📜 English Transliteration:
Allahumma gharatin-nujoomu wa hada’atil-‘uyoonu wa anta hayyun qayyumun la ta’khudhuka sinatun wala nawmun ya hayyu ya qayyumu ahdi’ layli wa anim ‘ayni
📜 English Translation:
“O Allah! The stars have set, and the eyes have calmed. You are the Ever-Living, the Sustainer, neither drowsiness nor sleep overtakes You. O Ever-Living, O Sustainer! Calm my night and grant sleep to my eyes.”
माखज़ (Source):
- यह दुआ सही बुखारी, मुस्लिम, या दूसरी मकबूल हदीस किताबों में नहीं मिलती। यह कुछ किताबों या लोगों में मशहूर है, मगर हदीस से साबित नहीं।
- इसमें आयतुल कुर्सी के कुछ लफ्ज़ हैं, और यह अल्लाह से नींद माँगती है, इसलिए इसे पढ़ना जायज़ है, मगर सुन्नत नहीं।
कौन सी सही?
पहली दो दुआएँ (हदीस और कुरआन से) सही और सुन्नत हैं। तीसरी दुआ जायज़ है, मगर हदीस से साबित नहीं। सबसे ज़्यादा सवाब के लिए पहली दो को तरजीह दें।
नींद आने की दुआ की अहमियत
नींद हमें दिन की मेहनत के बाद राहत देती है। सही बुखारी (हदीस 6320) में नबी (स.अ.व.) ने फरमाया: “सोने से पहले वुज़ू करो और दुआ पढ़ो।” “नींद आने की दुआ” हमें बुरे सपनों और शैतान से बचाती है। सही मुस्लिम (हदीस 2710) में है कि आयतुल कुर्सी पढ़ने से रातभर फरिश्ता हिफाज़त करता है, और शैतान पास नहीं आता। सूरह अल-इस्रा (17:79) में अल्लाह फरमाता है: “रात में तहज्जुद पढ़ो, यह तुम्हें बुलंद करेगी।” नींद से पहले दुआ हमें तहज्जुद के लिए भी तैयार करती है। भारत में लोग इन्हें सुकून और हिफाज़त के लिए पढ़ते हैं।
नींद आने की दुआ कब और कैसे पढ़ें?
नींद आने की दुआ पढ़ना आसान है। यहाँ सही तरीका है:
- वुज़ू करें: सोने से पहले वुज़ू करना सुन्नत है (सही बुखारी, हदीस 247)।
- दुआ पढ़ें: “बिस्मिक रब्बी…” को पहले पढ़ें।
- आयतुल कुर्सी: फिर “अल्लाहु ला इलाहा…” पढ़ें।
- तीसरी दुआ (ऐच्छिक): चाहें तो “अल्लाहुम्मा ग़ारतिन नुजूमु…” भी पढ़ें।
- दाएँ करवट लेटें: नबी (स.अ.व.) दाएँ करवट सोते थे (सही बुखारी, हदीस 6316)।
कब पढ़ें:
- रात को सोने से पहले। हनफी मज़हब में आयतुल कुर्सी हर रात पढ़ने की सलाह है।
नींद आने की दुआ के फायदे
- सुकून: नींद गहरी और आरामदायक होती है।
- हिफाज़त: बुरे सपनों और शैतान से बचाव होता है।
- रहमत: फरिश्तों की हिफाज़त और अल्लाह की रहमत मिलती है।
- सवाब: सुन्नत पर चलने से सवाब नसीब होता है।
सूरह अल-बक़रह (2:255) में आयतुल कुर्सी की फज़ीलत है। यह नींद को सुरक्षित बनाती है।
📌 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. क्या हर रात ये दुआएँ पढ़नी चाहिए?
हाँ, यह सुन्नत है और हर रात पढ़ना अच्छा है।
2. अगर दुआ याद न हो तो क्या करें?
“अल्लाहुम्मा बिस्मिक अमुतु व अह्या” (ऐ अल्लाह! तेरे नाम से मरता और जीता हूँ) पढ़ें।
3. क्या तीसरी दुआ पढ़ना गलत है?
नहीं, यह जायज़ है, मगर हदीस से साबित नहीं। पहली दो को तरजीह दें।
4. क्या बच्चे भी ये दुआएँ पढ़ सकते हैं?
हाँ, यह हर मुसलमान के लिए है।
आखिरी बात
“नींद आने की दुआ” हमें सुकून और हिफाज़त देती है। “बिस्मिक रब्बी…” और आयतुल कुर्सी को सोने से पहले पढ़ें—ये सुन्नत हैं। “अल्लाहुम्मा ग़ारतिन नुजूमु…” भी पढ़ सकते हैं, जो नींद की खूबसूरत दुआ है। भारत में लोग इन्हें रात को आराम के लिए पढ़ते हैं। वुज़ू करें, दाएँ करवट लेटें, और दिल से माँगें। यह आपकी नींद को मीठा और सुरक्षित बनाएगा। और दुआओं के लिए duaindia.com पर जाएँ। अल्लाह हमें सुकून भरी नींद दे, आमीन!