Ramadan Ki Dua In Hindi | रमज़ान की दुआएं और 30 दिन का दुआ प्लान

By Rokaiya

ramadan ki dua

Quick Summary

Dua Name

Ramadan Ki Dua

Arabic Text

اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي

Hindi Transliteration

अल्लाहुम्मा इन्नका अफ़ुव्वुन तुहिब्बुल अफ़वा फ़फ़ु अन्नी

English Transliteration

Allahumma innaka ‘afuwwun tuhibbul ‘afwa fa’fu ‘anni

Source

सही तिरमिज़ी (#3513), सही इब्न माजा

रमज़ान-उल-मुबारक का चाँद नज़र आते ही फ़िज़ाओं में एक अजीब सा सुकून और रूहानियत घुल जाती है। यह सिर्फ़ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपनी आदतों को सँवारने और अपने रब से दोबारा जुड़ने का एक निहायत क़ीमती मौक़ा है। हमारी रोज़ाना की मसरूफ़ियत (व्यस्त) वाली ज़िंदगी में जो दूरियाँ आ जाती हैं, रमज़ान की रातें और इबादत भरे दिन उन दूरियों को मिटाने का बेहतरीन ज़रिया बनते हैं।

इस पूरे मुक़द्दस महीने में जो चीज़ एक मोमिन के साथ साये की तरह रहती है, वह है Ramadan Ki Dua


रमज़ान का महीना और दुआ का जज़्बा

जैसे-जैसे रमज़ान के दिन गुज़रते हैं, हमारे अंदर एक ठहराव आने लगता है। सहरी का वह सन्नाटा और इफ़्तार की वह पुर-सुकून घड़ी हमें एहसास दिलाती है कि हम अपने रब के कितने मोहताज हैं। दुआ असल में हमारे दिल की वह पुकार है जो अल्फ़ाज़ बनकर ज़बान पर आती है।

रमज़ान में दुआ का जज़्बा इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि हमें पुख़्ता यक़ीन होता है कि यह महीना रहमतों और मग़फ़िरत (माफ़ी) का है। हम अपनी दुनियावी हाजात के साथ-साथ अपने अख़लाक़ और अपनी रूह की पाकीज़गी के लिए भी हाथ उठाते हैं। यह वह वक़्त होता है जब हम दिखावे से दूर, सिर्फ़ अपने परवरदिगार से गुफ़्तगू करते हैं।


रमज़ान में किस क़िस्म की दुआएं पढ़ी जाती हैं?

अक्सर लोग पूछते हैं कि रमज़ान में कौन सी दुआ सबसे बेहतर है। हक़ीक़त तो यह है कि हर वह दुआ जो सच्चे दिल से निकली हो, वह क़ीमती है। फिर भी, इस मुबारक महीने को तीन अशरों (हिस्सों) में तक़्सीम किया गया है:

  • पहला अशरा (रहमत): अल्लाह ताला की रहमत और बरकत तलब करना।
  • दूसरा अशरा (मग़फ़िरत): अपने पिछले तमाम गुनाहों की माफ़ी माँगना।
  • तीसरा अशरा (निजात): जहन्नम की आग से ख़लासी (छुटकारा) और लैलतुल क़द्र की तलाश।

मशहूर मसनून दुआएं (Mashhoor Masnoon Duas)

यहाँ कुछ ऐसी दुआएं दी जा रही हैं जो हमारे नबी-ए-करीम (ﷺ) की सुन्नत से साबित हैं:

1. माफ़ी और मग़फ़िरत की दुआ (ख़ास तौर पर लैलतुल क़द्र के लिए)

Arabic:

اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي

Hindi:

अल्लाहुम्मा इन्नका अफ़ुव्वुन तुहिब्बुल अफ़्वा फ़ाफ़ु अन्नी।

Roman:

Allahumma innaka ‘afuwwun tuhibbul ‘afwa fa’fu ‘anni.

तर्जुमा / मफ़हूम:

“ऐ अल्लाह! बेशक तू माफ़ करने वाला है, और माफ़ करने को पसंद फ़रमाता है, लिहाज़ा मुझे माफ़ फ़रमा दे।”

(हवाला: सहीह तिर्मिज़ी: 3513)

2. इफ़्तार के वक़्त की मसनून दुआ

Arabic:

ذَهَبَ الظَّمَأُ وَابْتَلَّتِ الْعُرُوقُ وَثَبَتَ الأَجْرُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ

Hindi:

ज़हबज़-ज़मउ वब्तल्लतिल उरूक़ु व सबतल अज्रु इन शा अल्लाह।

Roman:

Dhahaba-dh-dhama’u wabtallati-l-‘uruqu wa thabata-l-ajru in sha Allah.

तर्जुमा / मफ़हूम:

“प्यास बुझ गई, रगें तर हो गईं और अल्लाह ने चाहा तो अजर (सवाब) पक्का हो गया।”

(हवाला: सुनन अबू दाऊद: 2357)


30 Days 30 Duas (रमज़ान की तीस दुआएं)

चूंकि रमज़ान का हर दिन इबादत का नया पैग़ाम लाता है, इसलिए हमने क़ुरआन और हदीस की चुनिंदा मसनून दुआओं की एक फ़ेहरिस्त (List) तैयार की है ताकि आप रोज़ाना अपनी इबादत में एक नया मक़सद शामिल कर सकें।

दिन (Day)दुआ का मौज़ू (Topic)अरबी दुआ (Arabic Dua)मस्दर (Source)
Day 1रहमत की तलबرَبِّ اغْفِرْ وَارْحَمْ وَأَنْتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَSurah Al-Mu’minun: 118
Day 2हिदायत पर पाबंदीرَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَاSurah Ali ‘Imran: 8
Day 3वालिदैन (माँ-बाप) के लिएرَّبِّ ارْحَمْهُمَا كَمَا رَبَّيَانِي صَغِيرًاSurah Al-Isra: 24
Day 4दुनिया-आख़िरत की भलाईرَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةًSurah Al-Baqarah: 201
Day 5इल्म में इज़ाफ़ाرَّبِّ زِدْنِي عِلْمًاSurah Taha: 114
Day 6सब्र और इस्तक़ामतرَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَاSurah Al-Baqarah: 250
Day 7गुनाहों की मग़फ़िरतرَبَّنَا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّئَاتِنَاSurah Ali ‘Imran: 193
Day 8तौबा की क़बूलियतرَبَّنَا تَقَبَّلْ مِنَّا ۖ إِنَّكَ أَنتَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُSurah Al-Baqarah: 127
Day 9ज़ालिमों से पनाहرَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلْقَوْمِ الظَّالِمِينَSurah Yunus: 85
Day 10नेक औलाद के लिएرَبِّ هَبْ لِي مِن لَّدُنكَ ذُرِّيَّةً طَيِّبَةًSurah Ali ‘Imran: 38
Day 11दिल का इत्मीनानيَا مُقَلِّبَ الْقُلُوبِ ثَبِّتْ قَلْبِي عَلَى دِينِكَSunan al-Tirmidhi: 2140
Day 12ईमान पर ख़ात्माتَوَفَّنِي مُسْلِمًا وَأَلْحِقْنِي بِالصَّالِحِينَSurah Yusuf: 101
Day 13अज़ाब-ए-क़ब्र से पनाहاللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِSahih Bukhari: 1377
Day 14रिज़्क़-ए-हलाल में बरकतاللَّهُمَّ اكْفِنِي بِحَلَالِكَ عَنْ حَرَامِكَSunan al-Tirmidhi: 3563
Day 15तंगदस्ती और ग़म से पनाहاللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِSahih Bukhari: 2893
Day 16जहन्नम से दूरीرَبَّنَا اصْرِفْ عَنَّا عَذَابَ جَهَنَّمَSurah Al-Furqan: 65
Day 17शुक्र की तौफ़ीक़رَبِّ أَوْزِعْنِي أَنْ أَشْكُرَ نِعْمَتَكَSurah Al-Naml: 19
Day 18बुढ़ापे और काहिली से पनाहاللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْعَجْزِ وَالْكَسَلِSahih Muslim: 2706
Day 19नमाज़ की पाबंदीرَبِّ اجْعَلْنِي مُقِيمَ الصَّلَاةِ وَمِن ذُرِّيَّتِيSurah Ibrahim: 40
Day 20सेहत और आफ़ियतاللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الْعَفْوَ وَالْعَافِيَةَSunan Abi Dawud: 5074
Day 21मुस्तक़िल मिज़ाजीاللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ الثَّبَاتَ فِي الْأَمْرِSunan an-Nasa’i: 1308
Day 22बुरी आदतों से पनाहاللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ مُنْكَرَاتِ الأَخْلاَقِSunan al-Tirmidhi: 3591
Day 23अल्लाह की रज़ाاللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ رِضَاكَ وَالْجَنَّةَTirmidhi
Day 24आसान मौत की दुआاللَّهُمَّ أَعِنِّي عَلَى غَمَرَاتِ الْمَوْتِSunan al-Tirmidhi: 978
Day 25क़र्ज़ से छुटकाराاللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الدَّيْنِAn-Nasa’i: 5475
Day 26लैलतुल क़द्र की दुआاللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّيTirmidhi: 3513
Day 27नफ़्स की पाकीज़गीاللَّهُمَّ آتِ نَفْسِي تَقْوَاهَاSahih Muslim: 2722
Day 28फ़ित्नों से हिफ़ाज़तاللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِBukhari: 1377
Day 29नेक हमसफ़र और औलादرَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍSurah Al-Furqan: 74
Day 30इबादतों की क़बूलियतرَبَّنَا تَقَبَّلْ مِنَّا ۖ إِنَّكَ أَنتَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُSurah Al-Baqarah: 127

दुआ सिर्फ़ अल्फ़ाज़ नहीं

अक्सर हम दुआओं को सिर्फ़ रटा-रटाया जुमला समझ लेते हैं। मगर Ramadan Ki Dua का असर तब होता है जब उसमें नीयत की सच्चाई और ख़ुलूस शामिल हो। अगर हम ज़बान से माफ़ी माँग रहे हैं, लेकिन दिल में दूसरों के लिए कीना (नफ़रत) या गुनाह करने का इरादा है, तो वह दुआ बे-असर रहती है।

दुआ का मक़सद सिर्फ़ माँगना नहीं, बल्कि इस बात का इक़रार करना है कि हम अल्लाह ताला के हुक्म के आगे अपना सर झुकाते हैं।


रमज़ान में दुआ कब ज़्यादा क़बूल होती है?

यूँ तो रमज़ान का हर लम्हा क़ीमती है, लेकिन कुछ औक़ात (समय) ऐसे हैं जिन्हें हाथ से नहीं जाने देना चाहिए:

  1. सहरी का आख़िरी वक़्त (तहज्जुद): जब हर तरफ़ सन्नाटा होता है, वह रब से चुपके से बातें करने का सबसे बेहतरीन वक़्त है।
  2. इफ़्तार से ठीक पहले: उस वक़्त थकावट और प्यास के बावजूद बंदा अपने रब की याद में बैठा होता है, अल्लाह को यह अदा बहुत पसंद है।
  3. तरावीह के बाद का वक़्त: रात की इबादतों में दिल की गहराई से दुआ माँगने के लिए यह वक़्त बहुत मौज़ूं (मुनासिब) है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सवाल 1: क्या एक ही दुआ पूरे रमज़ान में बार-बार पढ़ सकते हैं?

जवाब: बिल्कुल, अगर आपकी कोई ख़ास हाजत (ज़रूरत) है या आपको कोई एक दुआ बहुत अज़ीज़ है, तो आप उसे बार-बार माँग सकते हैं। अल्लाह ताला को बंदे का गिड़गिड़ाकर माँगना बहुत पसंद है।

सवाल 2: क्या रमज़ान की दुआ सिर्फ़ अरबी में ही माँगनी चाहिए?

जवाब: मसनून दुआएं अरबी में पढ़ना अफ़ज़ल है क्योंकि वे नबी (ﷺ) के अल्फ़ाज़ हैं। लेकिन अल्लाह हर ज़बान समझता है। आप अपनी मादरी ज़बान (उर्दू/हिंदी) में भी अपने दिल का हाल बयान कर सकते हैं।


आख़िरी बात: दिल की दुआ

यह मुबारक महीना गुज़र जाएगा, दस्तरख़्वान की रौनक़ें कम हो जाएँगी, लेकिन जो दुआएं आपने इन रातों में माँगी हैं, वे हमेशा आपके साथ रहेंगी।

कोशिश करें कि इस रमज़ान आपकी दुआएं सिर्फ़ दुनियावी चीज़ों तक महदूद न रहें। अपने अख़लाक़ की बेहतरी, अपने घर के सुकून और ईमान की सलामती के लिए भी वक़्त निकालें। अल्लाह ताला हम सबकी इबादतों और दुआओं को क़बूल फ़रमाए। आमीन।