Roohani Beemari Ki Dua | दिल और रूह के सुकून के लिए दुआ

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मुख़्तसर रहनुमाई

दिल और रूह के सुकून के लिए दुआ

اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ، وَالْعَجْزِ وَالْكَسَلِ، وَالْبُخْلِ وَالْجُبْنِ، وَضَلَعِ الدَّيْنِ، وَغَلَبَةِ الرِّجَالِ
तलफ़्फ़ुज़:
अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिनल हम्मि वल हज़नि, वल अज्ज़ि वल कसलि, वल बुख्लि वल जुब्नि, व ज़लइद् दैनि, व ग़लबतिर रिजाल।
तर्जुमा:
ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह चाहता हूँ फिक्र और ग़म से, आज़िजी और सुस्ती से, कंजूसी और बुज़दिली से, कर्ज के बोझ से और लोगों के दबाव से।
मसदर: 
सहीह बुखारी
roohani beemari ki dua main

Table of Content

रूहानी बीमारी का मतलब वह कैफियत है जब इंसान का दिल बोझिल महसूस करने लगता है और उसकी रूह में एक तरह की थकावट या बेचैनी आ जाती है। यह कोई डरावनी चीज़ नहीं है, बल्कि यह ईमान की कमजोरी, वसवसों का घेरा या गुनाहों के बोझ की वजह से पैदा होने वाली एक रूहानी कैफियत है। दुआ इंडिया पर हमारा मकसद आपको डराना नहीं, बल्कि अल्लाह की रहमत के ज़रिए आपके दिल को इत्मिनान और सुकून पहुंचाना है।

Roohani Beemari Se Kya Murad Hai

इस्लाम में रूहानी बीमारी से मुराद दिल का वह अंधेरा है जो इंसान को अल्लाह की याद से दूर करने लगता है। जब इंसान के ज़हन में बुरे खयालात या वसवसे आने लगें, नमाज़ में दिल न लगे, या बेवजह की उदासी और घबराहट महसूस हो, तो इसे रूहानी कमजोरी कहा जाता है।

यह किसी जिन्न या जादू का असर नहीं, बल्कि यह रूह की वह पुकार है जो अल्लाह का कुर्ब चाहती है। जैसे जिस्म को गिज़ा की ज़रूरत होती है, वैसे ही रूह को भी अल्लाह के ज़िक्र और दुआ की ज़रूरत होती है। जब रूह को यह ज़िक्र नहीं मिलता, तो वह कमज़ोर महसूस करने लगती है जिसे हम अक्सर रूहानी बीमारी का नाम देते हैं।

Islam Roohani Takleef Ko Kaise Dekhta Hai

इस्लाम हमें सिखाता है कि रूहानी तकलीफें दरअस्ल इंसान को अल्लाह के करीब लाने का एक जरिया होती हैं। अल्लाह रब्बुल आलमीन अपने बंदों के दिलों का हाल बेहतर जानता है। जब कोई शख्स अपने दिल में बोझ महसूस करता है, तो इस्लाम उसे सब्र और दुआ का रास्ता दिखाता है।

रूहानी शिफ़ा रातों-रात मिलने वाला कोई चमत्कार नहीं है, बल्कि यह अल्लाह पर मुकम्मल भरोसे और धीरे-धीरे अपने आमाल सुधारने का एक सफर है। इस्लाम इस बात पर ज़ोर देता है कि हम अपने दिल की सफाई करें, तौबा करें और अल्लाह की पनाह में आ जाएं। अल्लाह की रहमत इतनी वसी है कि वह हर उस दिल को सुकून अता करता है जो उसकी तरफ रुजू करता है।

Roohani Sukoon Ke Liye Masnoon Duas

कुरान और सहीह हदीस में ऐसी दुआएं मौजूद हैं जो दिल की घबराहट, वसवसों और रूहानी बेचैनी को दूर करने के लिए बेहतरीन ज़रिया हैं। यहाँ हम दो निहायत जामे और असरदार दुआएं पेश कर रहे हैं।

Arabic Dua

اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ، وَالْعَجْزِ وَالْكَسَلِ، وَالْبُخْلِ وَالْجُبْنِ، وَضَلَعِ الدَّيْنِ، وَغَلَبَةِ الرِّجَالِ

तलफ़्फ़ुज़

अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिनल हम्मि वल हज़नि, वल अज्ज़ि वल कसलि, वल बुख्लि वल जुब्नि, व ज़लइद् दैनि, व ग़लबतिर रिजाल।

Roman (Hinglish)

Allahumma inni a’udhu bika minal-hammi wal-hazani, wal-‘ajzi wal-kasali, wal-bukhli wal-jubni, wa dala’id-daini, wa ghalabatir-rijal.

तर्जुमा

ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह चाहता हूँ फिक्र और ग़म से, आज़िजी और सुस्ती से, कंजूसी और बुज़दिली से, कर्ज के बोझ से और लोगों के दबाव से।

Masdar

सहीह बुखारी


Arabic Dua

يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ بِرَحْمَتِكَ أَسْتَغِيثُ

तलफ़्फ़ुज़

या हय्यु या कय्यूम बि-रहमति-का अस्तगीस।

Roman (Hinglish)

Ya Hayyu Ya Qayyum bi-rahmatika astagheeth.

तर्जुमा

ऐ हमेशा ज़िंदा रहने वाले और सबको थामने वाले! मैं तेरी रहमत के ज़रिए तुझसे मदद माँगता हूँ।

Masdar

सुनन तिरमिज़ी

Dua Ke Saath Apna Andar Sambhalna

दुआ अल्लाह से बातचीत का नाम है, लेकिन इस दुआ के साथ अपने अंदर की कैफियत को संभालना भी ज़रूरी है। रूहानी सुकून के लिए सब्र का दामन थामना पहली शर्त है। कभी-कभी हमें लगता है कि हमारी दुआ फौरन कबूल नहीं हो रही, लेकिन अल्लाह हमारे सब्र को आज़माता है ताकि वह हमें और निखार सके।

उम्मीद को कभी हाथ से न जाने दें। अल्लाह पर मुकम्मल भरोसा रखें कि वह आपके दिल के बोझ को हल्का कर देगा। जब आप अल्लाह की तरफ एक कदम बढ़ाते हैं, तो वह आपकी तरफ दौड़ कर आता है। अपने अंदर की बेचैनी को डरावना समझने के बजाए उसे अल्लाह से जुड़ने का एक मौका समझें।

Rozmarrah Zindagi Mein Roohani Shifa Ka Ehsaas

रूहानी शिफा का रास्ता आपके रोज़ाना के छोटे-छोटे आमाल से होकर गुज़रता है। पाँच वक्त की नमाज़ दिल के ज़ंग को साफ करने का सबसे बेहतरीन ज़रिया है। जब आप सजदे में होते हैं, तो अपने दिल का सारा बोझ अल्लाह के सामने रख दें।

इसके अलावा, खामोशी में अल्लाह का ज़िक्र करना और कुरान की तिलावत सुनना रूह को ठंडक पहुंचाता है। ज़िक्र का मतलब सिर्फ तस्बीह फेरना नहीं, बल्कि चलते-फिरते अल्लाह को याद करना और उसकी नेमतों का शुक्र अदा करना है। जब इंसान के अंदर शुक्र का जज्बा पैदा होता है, तो रूहानी बीमारियाँ और वसवसे खुद-ब-खुद खत्म होने लगते हैं।

छोटे सवाल-जवा

क्या रूहानी बीमारी का मतलब जिन्न होता है?

नहीं, रूहानी बीमारी का मतलब जिन्न या कोई रूहानी साया नहीं है। यह ज़हन के वसवसों, ईमान की कमजोरी और दिल की उस कैफियत का नाम है जहाँ इंसान को सुकून की तलाश होती है। इसे जादू या जिन्न से जोड़कर डरना गलत है।

क्या अपनी ज़ुबान में रूहानी सुकून के लिए दुआ मांग सकते हैं?

बिल्कुल, अल्लाह हर ज़ुबान समझता है। मसनून दुआएं अरबी में पढ़ना अफ़ज़ल है, लेकिन दिल के सुकून के लिए आप अपनी मादरी ज़ुबान (हिन्दी, उर्दू या कोई और) में रो-रो कर अल्लाह से अपनी तकलीफ बयान कर सकते हैं। अल्लाह बंदे की पुकार सुनता है।

आख़िरी बात

याद रखें कि अल्लाह की रहमत हर चीज़ पर छाई हुई है। रूहानी बेचैनी का यह दौर हमेशा रहने वाला नहीं है। शिफा का यह सफर आपकी आज़माइश भी हो सकता है और आपके गुनाहों की माफ़ी का ज़रिया भी। बस अपने दिल को अल्लाह की याद से जोड़े रखें, क्योंकि कुरान कहता है कि दिलों का सुकून सिर्फ अल्लाह की याद में ही है। धीरे-धीरे आपका दिल इत्मिनान की तरफ बढ़ेगा और रूह को वह ताज़गी मिलेगी जिसका वादा अल्लाह ने अपने मोमिन बंदों से किया है।

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