Complete Safar Ki Dua Guide: Travel by Car, Plane & Return Dua

By Rokaiya

safar ki dua in hindi

Quick Summary

Dua Name

Safar Ki Dua

Arabic Text

سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَٰذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ. وَإِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا لَمُنقَلِبُونَ

Hindi Transliteration

सुब्हानल्लज़ी सख्ख़र लना हाज़ा वमा कुन्ना लहु मुक़रिनीन. व इन्ना इला रब्बिना लमुनक़लिबून.

English Transliteration

Subhana-l-ladhi sakhkhara lana hadha wa ma kunna lahu muqrinin. Wa inna ila Rabbina lamunqalibun.

Source

सूरह ज़ुख़रुफ़ 43:13-14, सही मुस्लिम: 2392

दीन-ए-इस्लाम में सफ़र की दुआ (Safar ki dua) पढ़ने की बहुत ज़्यादा फ़ज़ीलत और अहमियत है। हमारी ज़िंदगी मुसलसल एक सफ़र है, और जब हम घर से बाहर किसी भी छोटी या बड़ी मंज़िल की तरफ़ निकलते हैं, तो अल्लाह की हिफ़ाज़त तलब करना निहायत ज़रूरी है।

चाहे आप रोज़ाना कार या बाइक से दफ़्तर जा रहे हों, या किसी मुल्क के लिए हवाई जहाज़ का सफ़र (Plane travel) कर रहे हों, यह मसनून दुआएं हमें हर तरह के हादसात और परेशानियों से महफ़ूज़ रखती हैं। इस मुकम्मल गाइड में हम सवारी पर बैठने से लेकर सफ़र से वापस आने की दुआ (Safar se wapas aane ki dua) तक तफ़सील से जानेंगे।


1. सवारी पर बैठने की दुआ (Safar Ki Dua for Car, Bus or Bike)

जब भी आप किसी सवारी पर सवार हों, तो इत्मीनान से बैठकर यह सफ़र की दुआ ज़रूर पढ़ें। यह इस बात का इक़रार है कि अल्लाह की मदद के बग़ैर हम किसी चीज़ पर क़ाबू नहीं पा सकते।

अरबी (Arabic):

سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ وَإِنَّا إِلَى رَبِّنَا لَمُنْقَلِبُونَ

रोमन इंग्लिश (Transliteration):

Subhan-allazi sakh-khara lana hazhaa wa ma kunna lahu muqrinin. Wa inna ila Rabbina lamun-qalibun.

हिंदी तर्जुमा (Hindi Translation):

“पाक है वह ज़ात (अल्लाह) जिसने इस सवारी को हमारे क़ाबू में कर दिया, वरना हम इसे क़ाबू में करने की कुव्वत (ताक़त) नहीं रखते थे; और बेशक हमें अपने रब की ही तरफ़ लौट कर जाना है।”

हवाला (Reference): यह दुआ मुक़द्दस क़ुरआन मजीद (सूरह अज़-ज़ुख़रुफ़, आयत 13-14) में साफ़ तौर पर बयान की गई है।


2. हवाई जहाज़ और बड़ी सवारी की दुआ (Plane Travel Dua)

आज के वक़्त में हवाई सफ़र या लंबी दूरी की ट्रेन का सफ़र बहुत आम हो गया है। जहाज़ के उड़ान भरने (Take-off) के वक़्त ऊपर दी गई क़ुरआनी दुआ के साथ-साथ यह ज़िक्र भी करना सुन्नत है, जिससे इंसान मुकम्मल तौर पर अल्लाह पर तवक्कुल (भरोसा) करता है।

अरबी (Arabic):

بِسْمِ اللَّهِ تَوَكَّلْتُ عَلَى اللَّهِ، وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ

रोमन इंग्लिश (Transliteration):

Bismillahi tawakkaltu ‘alallah, wa la hawla wa la quwwata illa billah

हिंदी तर्जुमा (Hindi Translation):

“अल्लाह के नाम से, मैंने अल्लाह पर भरोसा किया। अल्लाह की मदद के बग़ैर न तो किसी बुराई से बचने की ताक़त है और न ही नेकी करने की कुव्वत।”

हवाला (Reference): यह हदीस सुनन अबू दाऊद (5095) और जामे अत-तिर्मिज़ी (3426) से साबित है, जिसे घर से निकलते वक़्त पढ़ा जाता है।


3. सफ़र से वापसी की दुआ (Safar Se Wapas Aane Ki Dua)

जब आपका सफ़र कामयाबी के साथ मुकम्मल हो जाए और आप अपने घर या शहर वापस लौट रहे हों, तो नबी-ए-करीम (ﷺ) का मामूल था कि वह यह सफ़र से वापसी की दुआ कसरत से पढ़ा करते थे।

अरबी (Arabic):

آيِبُونَ تَائِبُونَ عَابِدُونَ لِرَبِّنَا حَامِدُونَ

रोमन इंग्लिश (Transliteration):

Aa-yiboona, taa-iboona, ‘aabidoona, li-rabbinaa haamidoon.

हिंदी तर्जुमा (Hindi Translation):

“हम वापस लौटने वाले हैं, तौबा करने वाले हैं, इबादत गुज़ार हैं और अपने रब की हम्द (तारीफ़) बयान करने वाले हैं।”

हवाला (Reference): यह मुबारक़ दुआ सहीह मुस्लिम (1342) और सहीह बुख़ारी (2995) जैसी मोतबर अहादीस की किताबों में मौजूद है।


4. सफ़र के दौरान अहम सुन्नतें और आदाब (Etiquettes of Travel in Islam)

अपने सफ़र को आसान, कामयाब और इबादत बनाने के लिए इन मसनून आदाब का ज़रूर ख़्याल रखें:

  • सदक़ा (Sadaqah) देना: सफ़र पर निकलने से पहले सदक़ा करना हर तरह की बलाओं और मुसीबतों को टाल देता है।
  • बिस्मिल्लाह से आगाज़: सवारी में क़दम रखते ही सबसे पहले “बिस्मिल्लाह” (अल्लाह के नाम से) ज़रूर कहें।
  • तकबीर और तस्बीह का ज़िक्र: सुन्नत तरीक़ा यह है कि जब सवारी बुलंदी (ऊंचाई) की तरफ़ जाए तो “अल्लाहु अकबर” कहें, और जब ढलान (नीचे) की तरफ़ आए तो “सुब्हानअल्लाह” का ज़िक्र करें।
  • नमाज़-ए-सफ़र: मुमकिन हो तो घर से निकलने से पहले दो रकात नफ़्ल नमाज़-ए-सफ़र अदा करना निहायत मुस्तहब है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवालात (FAQs)

सवाल: क्या Safar ki dua in Hindi सिर्फ लंबे सफ़र के लिए पढ़ी जाती है? जवाब: जी नहीं, उलमा-ए-किराम के मुताबिक़ आप जब भी किसी सवारी (कार, बाइक, या बस) का इस्तेमाल करें, चाहे वह आपके रोज़मर्रा के काम के लिए ही क्यों न हो, यह दुआ पढ़ना सुन्नत है।

सवाल: सफ़र में नमाज़ (Qasr Namaz) का क्या हुक्म है? जवाब: अगर आपका सफ़र 77-78 किलोमीटर (शवाफ़े के नज़दीक) से ज़्यादा का है, तो शरीयत ने आसानी दी है कि आप ‘क़स्र’ नमाज़ पढ़ें। इसमें 4 रकात वाली फ़र्ज़ नमाज़ को आधा करके सिर्फ 2 रकात पढ़ा जाता है।

सवाल: क्या औरतें बिना महरम के सफ़र कर सकती हैं? जवाब: इस्लाम में औरतों के वक़ार और हिफ़ाज़त के लिए लंबे सफ़र में महरम (Mahram) का साथ होना लाज़मी बताया गया है ताकि सफ़र के दौरान उन्हें कोई तकलीफ़ या परेशानी न हो।


अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हम सबके सफ़र को आसान फरमाए, हर तरह के हादसात से हिफ़ाज़त करे और कामयाबी अता फरमाए। आमीन।