Tahajjud Ki Namaz Ka Tarika, Waqt Aur Dua In Hindi | तहज्जुद पढ़ने का सुन्नत तरीक़ा

By Rokaiya

tahajjud ki namaz ka tarika aur dua main

Quick Summary

Dua Name

Tahajjud Ki Namaz Ka Tarika

Arabic Text

اللَّهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ نُورُ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضِ وَمَنْ فِيهِنَّ

Hindi Transliteration

अल्लाहुम्मा लकल हम्दु अन्ता नूरुस-समावाति वल अर्ज़ि व मन फ़ी-हिन्न।

English Transliteration

Allahumma lakal hamdu anta nurus-samawati wal arzi w man fi-hinn.

Source

सहीह बुख़ारी: 1120

रात का वह हिस्सा जब पूरी दुनिया सो रही होती है और चारों तरफ़ सन्नाटा होता है, वह वक़्त अल्लाह ताला से चुप-चाप बातें करने का है। नींद से बोझिल आंखों के साथ मुसल्ले पर खड़े होना और अपनी दबी हुई आवाज़ में अपने रब को पुकारना एक अलग ही क़ल्बी सुकून देता है।

अगर आप Tahajjud ki namaz ka tarika और इसका सही वक़्त तलाश कर रहे हैं, तो यहाँ हमने मुकम्मल तफ़्सील (Details), मसनून दुआएं और वक़्त निकालने का आसान तरीक़ा पेश किया है।


तहज्जुद का सही वक़्त क्या है? (Tahajjud Timings)

तहज्जुद का वक़्त इशा की नमाज़ के बाद सोकर उठने से शुरू होता है और सुब्ह सादिक़ (फ़ज्र की अज़ान) से पहले ख़त्म हो जाता है। लेकिन अहादीस की रौशनी में इसका सबसे बेहतरीन और अफ़ज़ल वक़्त “रात का आख़िरी तिहाई हिस्सा” (Last Third of the Night) है।

इस वक़्त अल्लाह ताला आसमान-ए-दुनिया (पहले आसमान) पर नुज़ूल फ़रमाता है और पुकारता है: “क्या कोई है जो मुझसे मांगे और मैं उसे अता करूँ?”

तहज्जुद का वक़्त कैसे निकालें? (Calculation Table)

रात के वक़्त को समझने के लिए मगरीब (सूरज डूबने) से लेकर फ़ज्र (सुब्ह सादिक़) तक के वक़्त को 3 बराबर हिस्सों में बाँट लें:

रात का हिस्सा (Night Portion)वक़्त का अंदाज़ा (Estimated Time)फ़ज़ीलत (Significance)
पहला हिस्सा (First Third)इशा के बाद से रात 10:30 बजे तकआराम करने और सोने का सुन्नत वक़्त।
दूसरा हिस्सा (Second Third)रात 10:30 से रात 1:30 बजे तकतहज्जुद पढ़ी जा सकती है, मगर अफ़ज़ल तरीन नहीं।
आख़िरी हिस्सा (Last Third)रात 1:30 से सुब्ह सादिक़ (फ़ज्र) तकसबसे अफ़ज़ल वक़्त (दुआओं की क़बूलियत का ख़ास लम्हा)।

एक अमली मिसाल (Example for Kerala, India):

अगर आप इंडिया के केरला या किसी भी शहर में रहते हैं, तो अपने शहर के वक़्त के हिसाब से ऐसे कैलकुलेट करें:

  • मगरीब की अज़ान: शाम 6:30 बजे
  • फ़ज्र की अज़ान: सुब्ह 5:30 बजे
  • रात का कुल वक़्त: 11 घंटे (इसको 3 से तक़्सीम/Divide करें = 3 घंटे 40 मिनट)
  • तहज्जुद का बेहतरीन वक़्त: सुब्ह 5:30 से 3 घंटे 40 मिनट पीछे चले जाएं, यानी रात 1:50 AM से 5:20 AM तक का वक़्त सबसे अफ़ज़ल होगा।

तहज्जुद की नमाज़ का तरीक़ा (Step-by-Step Guide)

तहज्जुद पढ़ने का तरीक़ा निहायत सादा है। इसमें किसी पेचीदगी की ज़रूरत नहीं है:

  1. नींद से बेदार होना: सुन्नत यह है कि आप इशा पढ़कर सो जाएं और रात के आख़िरी हिस्से में उठें।
  2. वज़ू और मिस्वाक: अच्छी तरह सुन्नत के मुताबिक़ वज़ू करें और मिस्वाक कर लें ताकि सुस्ती दूर हो जाए।
  3. नीयत करना: नीयत दिल के इरादे का नाम है। आप दिल में इरादा करें कि “मैं अल्लाह के लिए 2 रकात तहज्जुद की नमाज़ पढ़ रहा/रही हूँ।” ज़बान से बोलना लाज़िम नहीं।
  4. रकात की तादाद: कम से कम 2 रकात और ज़्यादा से ज़्यादा 8 या 12 रकात तक पढ़ी जा सकती है। (हर 2 रकात के बाद सलाम फेरें)।
  5. क़िरात (सूरतें पढ़ना): इसमें आप अपनी याददाश्त के मुताबिक़ कोई भी सूरत पढ़ सकते हैं। लंबी सूरतें पढ़ना अफ़ज़ल है।
  6. वित्र की नमाज़: अगर आपने इशा के साथ वित्र नहीं पढ़े थे, तो तहज्जुद मुकम्मल करने के आख़िर में वित्र ज़रूर पढ़ें।

तहज्जुद में पढ़ी जाने वाली मसनून दुआएं

तहज्जुद के बाद अपनी ज़बान (उर्दू/हिंदी) में ख़ूब गिड़गिड़ा कर दुआ माँगी जा सकती है, लेकिन नबी-ए-करीम (ﷺ) से साबित ये मसनून दुआएं पढ़ना ज़्यादा बरकत वाला है:

1. अल्लाह की हम्द-ओ-सना की दुआ

जब आप तहज्जुद के लिए उठें, तो सबसे पहले यह दुआ पढ़ें:

Arabic:

اللَّهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ نُورُ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضِ وَمَنْ فِيهِنَّ

Hindi:

अल्लाहुम्मा लकल हम्दु अन्ता नूरुस-समावाति वल अर्ज़ि व मन फ़ी-हिन्न।

Roman:

Allāhumma lakal-ḥamdu anta nūrus-samāwāti wal-arḍi wa man fī-hinn.

तर्जुमा / मफ़हूम:

“ऐ अल्लाह! तमाम तारीफ़ें तेरे ही लिए हैं, तू आसमानों, ज़मीन और उनमें रहने वाली तमाम चीज़ों का नूर (रौशनी) है।”

(हवाला: सहीह बुख़ारी: 1120)

2. सैय्यदुल इस्तिग़फ़ार (तौबा की सबसे अफ़ज़ल दुआ)

तहज्जुद के वक़्त अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी मांगने के लिए यह दुआ सबसे अफ़ज़ल है:

Arabic:

اللَّهُمَّ أَنْتَ رَبِّي لَا إِلَهَ إِلَّا أَنْتَ، خَلَقْتَنِي وَأَنَا عَبْدُكَ، وَأَنَا عَلَى عَهْدِكَ وَوَعْدِكَ مَا اسْتَطَعْتُ، أَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا صَنَعْتُ، أَبُوءُ لَكَ بِنِعْمَتِكَ عَلَيَّ، وَأَبُوءُ لَكَ بِذَنْبِي فَاغْفِرْ لِي فَإِنَّهُ لَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ

Hindi:

अल्लाहुम्मा अन्ता रब्बी ला इला-ह इल्ला अन्ता, ख़लक़्तनी व अना अब्दुका, व अना अला अहदिका व वअदिका मस्ततअतु, अऊज़ु बिका मिन शर्रि मा सनअतु, अबू-उ लका बि-निअमतिका अलैया, व अबू-उ लका बि-ज़म्बी फ़ग़फ़िरली फ़-इन्नहू ला यग़फ़िरुज़्ज़ुनू-ब इल्ला अन्ता।

Roman:

Allāhumma anta Rabbī lā ilāha illā anta, khalaqtanī wa ana ‘abduka, wa ana ‘alā ‘ahdika wa wa‘dika mastaṭa‘tu, a‘ūdhu bika min sharri mā ṣana‘tu, abū’u laka bi-ni‘matika ‘alayya, wa abū’u laka bi-dhambī faghfirlī fa-innahu lā yaghfiru-dhunūba illā anta.

तर्जुमा / मफ़हूम:

“ऐ अल्लाह! तू ही मेरा रब है, तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। तूने ही मुझे पैदा किया और मैं तेरा बंदा हूँ। मैं अपनी ताक़त के मुताबिक़ तेरे अहद और वादे पर क़ायम हूँ। मैं अपने उन कामों के शर से तेरी पनाह चाहता हूँ जो मैंने किए। मैं तेरे सामने उन नेमतों का इक़रार करता हूँ जो तूने मुझे दीं और अपने गुनाहों का एतराफ़ करता हूँ, लिहाज़ा मुझे माफ़ फ़रमा दे, क्योंकि तेरे सिवा कोई गुनाहों को माफ़ करने वाला नहीं।”

(हवाला: सहीह बुख़ारी: 6306)


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Tahajjud FAQs)

सवाल 1: क्या रोज़ तहज्जुद पढ़ना लाज़िम है?
जवाब: नहीं, यह एक नफ़्ल इबादत है। अगर आप किसी दिन थकन की वजह से नहीं उठ पाते, तो इसमें कोई गुनाह नहीं है। अलबत्ता, इसकी फ़ज़ीलत बहुत बड़ी है।

सवाल 2: अगर कम रकात पढ़ें तो क्या नमाज़ मुकम्मल होगी?
जवाब: जी हाँ, अगर वक़्त कम हो या आप थक गए हों, तो सिर्फ़ 2 रकात तहज्जुद भी काफ़ी है। अल्लाह ताला नीयत और ख़ुलूस देखता है, तादाद नहीं।

सवाल 3: क्या बग़ैर सोए तहज्जुद पढ़ सकते हैं?
जवाब: तहज्जुद का असल तरीक़ा सोकर उठना ही है। अगर आप सोए बग़ैर रात को इबादत करते हैं, तो उसे ‘क़ियाम-उल-लैल’ कहा जाएगा, जिसका भी बहुत सवाब है। लेकिन तहज्जुद की असली फ़ज़ीलत अपनी नींद क़ुर्बान करने में है।


आख़िरी बात: ख़ामोशी में अल्लाह से जुड़ाव

तहज्जुद की असल रूह इख़्लास है। जब आप अपनी नींद छोड़कर ठंडे पानी से वज़ू करते हैं और अंधेरे में अपने रब के सामने झुकते हैं, तो वह लम्हा अल्लाह के सबसे ज़्यादा क़रीब होने का वक़्त होता है। अपनी इस छोटी सी कोशिश में सादगी और इस्तक़ामत रखें।

अल्लाह ताला हम सबको इस ख़ामोश इबादत और रातों को उठने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।