Taraweeh Ki Dua In Hindi | तरावीह की दुआ अरबी, रोमन और तर्जुमे के साथ

By Rokaiya

Chandeliers inside ornate mosque.

Quick Summary

Dua Name

Taraweeh Ki Dua

Arabic Text

اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي

Hindi Transliteration

अल्लाहुम्मा इन्नका अफ़ुव्वुन तुहिब्बुल अफ़वा फ़फ़ु अन्नी

English Transliteration

Allahumma innaka ‘afuwwun tuhibbul ‘afwa fa‘fu ‘anni

Source

तिर्मिज़ी, इब्न माजह

रमज़ान-उल-मुबारक का चाँद नज़र आते ही मुसलमानों के घरों और मस्जिदों में एक अलग ही रौनक़ आ जाती है। दिन में रोज़े की पाबंदी और रात में क़याम, यही इस मुक़द्दस महीने की ख़ूबसूरती है। अगर आप इंटरनेट पर Taraweeh ki dua in hindi तलाश कर रहे हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं।

यहाँ हमने तरावीह की दुआ को अरबी, हिंदी तलफ़्फ़ुज़, आसान रोमन इंग्लिश और उसके तर्जुमे के साथ पेश किया है ताकि आप इसे आसानी से ज़हन-नशीन (याद) कर सकें।


तरावीह की दुआ (Taraweeh Ki Dua In Hindi)

हिंदुस्तान में आम तौर पर यह रिवाज़ है कि तरावीह की हर 4 रकात मुकम्मल करने के बाद थोड़ी देर का वक़्फ़ा (Break) लिया जाता है। इसी वक़्फ़े में यह दुआ पढ़ी जाती है:

Arabic:

سُبْحَانَ ذِي الْمُلْكِ وَالْمَلَكُوتِ سُبْحَانَ ذِي الْعِزَّةِ وَالْعَظَمَةِ وَالْهَيْبَةِ وَالْقُدْرَةِ وَالْكِبْرِيَاءِ وَالْجَبَرُوتِ سُبْحَانَ الْمَلِكِ الْحَيِّ الَّذِي لَا يَنَامُ وَلَا يَمُوتُ سُبُّوحٌ قُدُّوسٌ رَبُّنَا وَرَبُّ الْمَلَائِكَةِ وَالرُّوحِ اللَّهُمَّ أَجِرْنَا مِنَ النَّارِ يَا مُجِيرُ يَا مُجِيرُ يَا مُجِيرُ بِرَحْمَتِكَ يَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِينَ

Hindi:

सुब्हाना ज़िल मुल्कि वल मलकूत, सुब्हाना ज़िल इज़्ज़ति वल अज़मति वल हैबति वल क़ुद्रति वल किबरियाई वल जबरूत। सुब्हानल मलिकिल हैय्यिल लज़ी ला यनामु व ला यमूत, सुब्बुहुन क़ुद्दुसुन रब्बुना व रब्बुल मलाइकति वर-रूह। अल्लाहुम्मा अजिरना मिनन-नार, या मुजीरु या मुजीरु या मुजीरु, बि-रहमतिका या अरहमर राहिमीन।

Roman:

Subhana Zil Mulki Wal Malakoot, Subhana Zil Izzati Wal Azamati Wal Haibati Wal Qudrati Wal Kibriyaai Wal Jabroot. Subhanal Malikil Hayyil Lazee La Yanaamu Wa La Yamoot, Subbuhun Quddusun Rabbuna Wa Rabbul Malaaikati War-Rooh. Allahumma Ajirna Minan-Naar, Ya Mujeeru Ya Mujeeru Ya Mujeeru, Bi-Rahmatika Ya Arhamar Rahimeen.

तर्जुमा / मत्लब:

“पाक है वह (अल्लाह) जो मुल्क और मलकूत (ज़मीन और आसमान की बादशाहत) का मालिक है। पाक है वह जो इज़्ज़त, अज़मत, हैबत, क़ुदरत, किबरियाई (बड़प्पन) और दबदबे वाला है। पाक है वह बादशाह जो ज़िन्दा है, जिसे न नींद आती है और न मौत। वह निहायत पाक और बहुत मुक़द्दस है, हमारा रब और फरिश्तों और रूह (हज़रत जिब्रील अमीन) का रब। ऐ अल्लाह! हमें जहन्नम की आग से पनाह दे, ऐ पनाह देने वाले, ऐ पनाह देने वाले, ऐ पनाह देने वाले। तेरी रहमत के वास्ते, ऐ सबसे ज़्यादा रहम करने वाले।”


तरावीह के वक़्फ़े की हक़ीक़त

यहाँ यह बात साफ़ समझ लेनी चाहिए कि हदीस से तरावीह के वक़्फ़े के लिए कोई मख़सूस (Fixed) दुआ साबित नहीं है। जो दुआ हमारे यहाँ मशहूर है, वो बुज़ुर्गों और उलेमा-ए-कराम ने अल्लाह ताला की तारीफ़, अज़मत और दुआ के लिए चुनी है।

इसे पढ़ना बहुत सवाब का काम है, लेकिन इसे फ़र्ज़ या सुन्नत-ए-मुअक्कदा समझना दुरुस्त नहीं होगा। अगर किसी को यह लंबी दुआ याद न हो, तो वो सुब्हान अल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह, या दुरूद शरीफ़ का विर्द (ज़िक्र) कर ले। यहाँ तक कि ख़ामोश बैठकर आराम करना भी बिल्कुल दुरुस्त है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सवाल 1: क्या तरावीह की दुआ पढ़ना लाज़िम (ज़रूरी) है?
जवाब: नहीं, यह पढ़ना फ़र्ज़ या वाजिब नहीं है। यह एक निहायत ही अच्छा अमल है, लेकिन इसके बिना भी आपकी तरावीह मुकम्मल मानी जाती है।

सवाल 2: अगर दुआ न पढ़ी जाए तो क्या तरावीह हो जाती है?
जवाब: जी हाँ, बिल्कुल। तरावीह एक नमाज़ है और यह दुआ नमाज़ के दरमियान के वक़्फ़े (Break) का हिस्सा है। अगर आप दुआ नहीं पढ़ते, तब भी आपकी नमाज़ पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।

सवाल 3: क्या घर पर भी यह दुआ पढ़ी जा सकती है?
जवाब: अगर आप घर पर अकेले या घर वालों के साथ जमात से तरावीह पढ़ रहे हैं, तो आप यह दुआ पढ़ सकते हैं। अगर याद न हो तो सिर्फ़ अस्तग़फ़ार (मग़फ़िरत की दुआ) कर लें।


आख़िरी बात: ख़ुशू-ओ-ख़ुज़ू और तरावीह

रमज़ान की रातों में थकान होना एक फ़ितरी बात है। दिन भर का रोज़ा और रात में देर तक क़याम करना आसान नहीं होता। लेकिन यही वो वक़्त है जब बंदा अपने रब को राज़ी करता है।

जब आप तरावीह में खड़े हों, तो कोशिश करें कि आपकी पूरी तवज्जो (ध्यान) क़िराअत पर रहे। दुआ ज़बानी याद हो या न हो, आपका दिल अल्लाह ताला से जुड़ा होना चाहिए। अल्लाह हम सबकी टूटी-फूटी इबादत और कोशिशों को क़ुबूल फ़रमाए। आमीन।