Quick Summary
Dua Name
Wazu Ke Baad Ki Dua
Arabic Text
أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
Hindi Transliteration
अश-हदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीका लहू, व अश-हदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुह
English Transliteration
Ashhadu an la ilaha illallahu wahdahu la sharika lahu, wa ashhadu anna Muhammadan abduhu wa rasuluhu
Source
सही मुस्लिम
नमाज़ हमारे दीन का सुतून (खंभा) है, और वुज़ू नमाज़ की चाबी है। अक्सर हम दुनियावी मसरूफ़ियत की वजह से जल्दी-जल्दी में वुज़ू कर लेते हैं। लेकिन अगर हम इसे पूरी तवज्जो और सुन्नत तरीक़े से करें, तो यह सिर्फ़ हाथ-मुँह धोना नहीं, बल्कि एक मुकम्मल और अज़ीम इबादत बन जाता है।
अगर आप इंटरनेट पर Wazu ke baad ki dua और वुज़ू शुरू करने की दुआ तलाश कर रहे हैं, तो यहाँ हमने नबी-ए-करीम (ﷺ) से साबित मसनून दुआएं अरबी, हिंदी तलफ़्फ़ुज़ और तर्जुमे के साथ पेश की हैं।
1. वुज़ू से पहले क्या पढ़ना चाहिए? (Wazu Se Pehle Ki Dua)
वुज़ू का आग़ाज़ करने से पहले सबसे अहम चीज़ ‘नीयत’ है। नीयत का मतलब ज़बान से बोलना नहीं, बल्कि दिल में पाकीज़गी हासिल करने का पुख़्ता इरादा करना है। इसके बाद, नबी (ﷺ) की सुन्नत यह है कि वुज़ू की शुरुआत अल्लाह के नाम से की जाए:
Arabic:
بِسْمِ اللَّهِ
Hindi:
बिस्मिल्लाह
Roman:
Bismillah
तर्जुमा / मफ़हूम:
“अल्लाह के नाम से (शुरू करता हूँ)।” (हवाला: सुनन अबी दाऊद: 101 – नबी करीम ﷺ ने फ़रमाया: “उस शख़्स का वुज़ू कामिल नहीं जिसने वुज़ू के शुरू में अल्लाह का नाम न लिया हो।”)
2. वुज़ू के बाद की मसनून दुआ (Wazu Ke Baad Ki Dua)
जब आप अपना वुज़ू मुकम्मल कर लें, तो आसमान की तरफ़ नज़र उठाकर या क़िबला रुख़ होकर यह दुआ पढ़ें। यह दुआ दो हिस्सों में है: पहले हम अपने ईमान (कलिमा-ए-शहादत) का इक़रार करते हैं, और फिर अल्लाह ताला से अपनी ज़ाहिरी और बातिनी पाकीज़गी की दुआ करते हैं।
हदीस शरीफ़ के मुताबिक़, जो शख़्स वुज़ू के बाद यह दुआ पढ़ता है, उसके लिए जन्नत के आठों दरवाज़े खोल दिए जाते हैं, वह जिससे चाहे दाख़िल हो जाए:
Arabic:
أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ، اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي مِنَ التَّوَّابِينَ وَاجْعَلْنِي مِنَ الْمُتَطَهِّرِينَ
Hindi:
अशहदु अल्ला इला-ह इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीक लहू, व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू। अल्लाहुम्मज-अलनी मिनत-तव्वाबीना वज-अलनी मिनल-मुततहिरीन।
Roman:
Ash-hadu al-la ilaha illallahu wahdahu la sharika lahu, wa ash-hadu anna Muhammadan abduhu wa rasuluhu. Allahummaj-alni minat-tawwabeena waj-alni minal-mutatahhireen.
तर्जुमा / मफ़हूम:
“मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद (ﷺ) उसके बंदे और रसूल हैं। ऐ अल्लाह! मुझे कसरत से तौबा करने वालों में शामिल फ़रमा और मुझे ख़ूब पाक-साफ़ रहने वालों में से बना दे।” (हवाला: जामे तिर्मिज़ी: 55)
वुज़ू और पाकीज़गी का रूहानी ताल्लुक़
इस्लाम सिर्फ़ ज़ाहिरी सफ़ाई नहीं, बल्कि बातिनी (अंदरूनी) पाकीज़गी भी चाहता है।
- पानी: हमारे आज़ा (शरीर के हिस्सों) का मैल साफ़ करता है।
- दुआ: हमारे दिल से गुनाहों का बोझ हटाती है।
जब हम Wazu ke baad ki dua में “तव्वाबीन” (तौबा करने वाले) और “मुततहिरीन” (पाक रहने वाले) के अल्फ़ाज़ बोलते हैं, तो दरअसल हम अल्लाह ताला से यह दुआ कर रहे होते हैं कि वह हमें ज़ाहिर और बातिन दोनों एतबार से एक उम्दा मोमिन बना दे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
सवाल 1: अगर वुज़ू से पहले ‘बिस्मिल्लाह’ पढ़ना भूल गए तो क्या वुज़ू दोबारा करना होगा?
जवाब: नहीं, आपका वुज़ू मुकम्मल हो जाएगा। लेकिन जान-बूझकर इसे तर्क (छोड़ना) नहीं चाहिए क्योंकि यह सुन्नत है। अगर दरमियान (बीच) में याद आए, तो दिल में अल्लाह का नाम ले लें।
सवाल 2: क्या वुज़ू के बाद दुआ पढ़ना लाज़िम (फ़र्ज़) है?
जवाब: यह फ़र्ज़ नहीं, बल्कि सुन्नत है। इसे पढ़ने से बहुत बड़ा सवाब मिलता है, लेकिन अगर कोई न पढ़े तो उसका वुज़ू फ़ासिद (ख़राब) नहीं होता।
सवाल 3: अगर पूरी दुआ अरबी में ज़बानी याद न हो तो क्या करें?
जवाब: जब तक अरबी अल्फ़ाज़ ज़हन-नशीन (याद) न हों, आप इसे अपने मोबाइल में देखकर पढ़ सकते हैं। कोशिश करें कि जल्द अज़ जल्द इसे याद कर लें क्योंकि यह बहुत मुफ़ीद दुआ है।
सवाल 4: क्या वुज़ू के बाद ग़ुस्ल करना ज़रूरी है? जवाब: नहीं, वुज़ू और ग़ुस्ल अलग-अलग हैं। लेकिन अगर आप पर ग़ुस्ल वाजिब है, तो सिर्फ़ वुज़ू काफ़ी नहीं होगा। ग़ुस्ल के सही मसाइल और मुकम्मल सुन्नत तरीक़े के लिए आप हमारा यह आर्टिकल देख सकते हैं: [Ghusl Ka Tarika in Hindi]।
आख़िरी बात: सही आदाब के साथ वुज़ू
मसनून दुआएं पढ़ने की आदत डालना बहुत आसान है, बस थोड़ी सी तवज्जो की ज़रूरत है। अगली बार जब आप वुज़ू के लिए नल खोलें, तो “बिस्मिल्लाह” से आग़ाज़ करें और वुज़ू मुकम्मल करते ही शहादत की उंगली (कलमे की उंगली) उठाकर Wazu ke baad ki dua ज़रूर पढ़ें।
अल्लाह ताला हमारी छोटी-छोटी सुन्नतों और इबादतों को क़बूल फ़रमाए और हमें नमाज़ का पाबंद बनाए। आमीन।



